केस एक

बच्ची के हत्यारे को तीन माह में कोर्ट ने सुनाई उम्रकैद की सजा

शहर के पटौदी रोड स्थित एक मोहल्ले की चार वर्षीय बच्ची का पिछले साल 4 फरवरी को बिजली बोर्ड कॉलोनी में रहने वाले प्रदीप नामक युवक ने अपहरण कर लिया था। हैवान ने दुष्कर्म के बाद बच्ची की हत्या कर दी। अगले दिन बच्ची का शव खेतों में मिला था। शहर के लोगों के लिए यह वारदात किसी सदमे से कम नहीं थी। सामाजिक संगठनों ने एकजुट होकर न्याय की मांग उठाई थी। इस मामले को स्पेशल मानकर कोर्ट में सुनवाई हुई और महज तीन महीने में ही सेशन कोर्ट ने दोषी प्रदीप को उम्रकैद की सजा सुना दी। दोषी पर दो लाख रुपये से अधिक का जुर्माना भी लगा।

केस दो

द¨रदगी करने वाले को सुनाई 20 साल की सजा

शहर के एक मोहल्ला की 9 वर्षीय बच्ची 17 अप्रैल 2017 की शाम को मयूर विहार निवासी सुभाष की दुकान पर चाकलेट लेने के लिए गई थी। दुकानदार सुभाष ने बच्ची के साथ दुष्कर्म किया। आरोपी दुकानदार के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ और कोर्ट ने उसे दोषी मानते हुए 20 साल कैद की सजा सुनाई। महज नौ महीनों में आया फैसला नजीर बना।

केस 3

बच्ची के हत्यारे को 30 साल की सजा

24 जनवरी 2017 को दो साल की मासूम बच्ची का उसके गांव चिराहाडा से अपहरण हो गया। उसके परिजनों से सात लाख रुपये की फिरौती मांगी गई। फिरौती ना मिलने पर उप्र के बलिया निवासी अपहरणकर्ता अमित ने मासूम की गला दबा हत्या कर दी। न्यायधीश फलित शर्मा की कोर्ट ने उक्त दोषी को महज सात माह के भीतर ही 30 साल की सजा सुनाई।

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अमित सैनी, रेवाड़ी

यह तो केवल उदाहरण हैं। असल में कोर्ट मासूमों के साथ हैवानियत करने वालों को न केवल कड़ी सजा दे रहे हैं बल्कि सख्त टिप्पणी से समाज को कड़ा संदेश भी दे रहे हैं। दुकानदार द्वारा बच्ची से दुष्कर्म मामले में भी कोर्ट ने कुछ इसी अंदाज में टिप्पणी की और कहा। मासूम बच्चियों से भी द¨रदगी। यह जघन्य अपराध है। यह लोग जानवर हैं और दया के हकदार नहीं।

पॉक्सो एक्ट आने के बाद आसान हुआ न्याय

दिल्ली में हुए निर्भया कांड के बाद देश की संसद ने सख्त रुख अपनाया और पॉक्सो एक्ट (प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रेन फ्रॉम सेक्सुअल अफेंस) 2012 अस्तित्व में आया। इस एक्ट में अलग- अलग अपराध के लिए अलग-अलग सजा का प्रावधान है। एक्ट की धारा सात और आठ के तहत वे मामले दर्ज किए जाते हैं जिनमें बच्चों का यौन शोषण होता है।

अधिवक्ता बोले

मासूम बच्चियों के खिलाफ अपराध बढ़ रहे हैं इनको देखते हुए अब न्यायपालिका भी संवेदनशीलता व सख्ती से कार्य कर रही है। कोर्ट और बार दोनों इन मामलों को गंभीरता से लेते हैं और आरोपी को कड़ी सजा तक दी जा रही है ताकि बच्चियों को समाज में सुरक्षित माहौल मुहैया कराया जा सके। 20 साल की सजा वाले मामले में भी कोर्ट ने अपने निर्णय में बच्चियों के खिलाफ बढ़ रहे अपराधों को लेकर ¨चता जाहिर की है।

-अमरजीत ¨सह यादव, वरिष्ठ अधिवक्ता।

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न्यायपालिका पर भी समाज में सुरक्षित माहौल मुहैया कराने की बड़ी जिम्मेदारी है। अपराधियों को कड़ी सजा मिलती है तो समाज में बड़ा संदेश भी जाता है। बच्चियों से दुष्कर्म वाले मामलों में उम्रकैद तक की सजा दी जानी चाहिए ताकि मासूमों से द¨रदगी करने वालों को सबक मिल सके।

-कामरेड राजेंद्र ¨सह, वरिष्ठ अधिवक्ता।

Posted By: Jagran

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