जेएनएन, [विजय गाहल्‍याण]। पानीपत से सटे जिले के सबसे बड़े गांवों में शुमार सिवाह का नाम आते ही यहां के गैंगस्टर युवाओं की छवि उभर आती थी। कभी यहां नशे का चलन था। इन हालात को बदलने के लिए बीड़ा युवाओं ने ही उठाया। युवाओं ने फुटबाल को अपनाकर राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल में मैदान तैयार किया। सरकारी कोच न होने के बावजूद सुबह-शाम युवाओं को सीनियर खिलाड़ियों ने फुटबाल का अभ्यास कराना शुरू किया।

14 साल के अथक प्रयास के बाद नशे का चलन कम हुआ है। अब गांव की पुरुषों की फुटबाल टीम प्रदेश की नामचीन टीमों में से एक है। 30 से ज्यादा खिलाड़ी राज्य, राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीत चुके हैं। खेल कोटे से नौकरी भी हासिल की है। फुटबाल ने तस्वीर और युवाओं की तकदीर बदल दी है। 11 से 14 फरवरी को अंबाला में हुई 2021 में हरियाणा सीनियर फुटबाल चैंपियनशिप में जिले की टीम ने रजत पदक जीता। ये खिताब टीम पहली बार जीत पाई है। इसमें भी सिवाह के खिलाड़ियों का अहम योगदान रहा है।

प्रैक्टिस करते सिवाह के युवा। जागरण

ये हैं स्टार खिलाड़ी

सिवाह गांव के अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी गांव के वीरेंद्र कादियान उर्फ बंसी एफसी गोवा क्लब के गोलकीपर कोच हैं। अमित कादियान संतोष ट्राफी, सुब्रतो कप, नितिन कादियान सुब्रतो कप विजेता, और आयुष कादियान डूरंड कप खेल चुके हैं। संजू बैंगलुरु ओजोने एफसी क्लब के गोलकीपर हैं। नवीन और मोहित इंडिया फुटबाल टीम के सदस्य हैं। साहिल कादियान अंडर-16 अंडर-19 इंडिया फुटबाल टीम के कैंप में हैं।

सिवाह गांव के फुटबाल खिलाड़ी। जागरण

इन्होंने पाई खेल कोटे से नौकरी

खेल कोटे से आयुष व नितिन ने आर्मी, विकास ने रेलवे और हरपाल ने ग्रुप डी की नौकरी पाई। इसी तरह प्रदीप कादियान, अमित, सुरेश और सुमित ने डीपीई की नौकरी प्राप्त की। इसी ग्राउंड पर अभ्यास कर एथलेटिक्स के बूते भी युवकों ने नौकरी हासिल की है। गांव की टीम झज्जर के जहागीरपुर में हुई राज्यस्तरीय फुटबाल चैंपियनशिप में तीन बार एक-एक लाख रुपये का इनाम जीत चुकी है।

Panipat Player

सीनियर खिलाड़ी जुटाते है खेल का सामान, 40 खिलाड़ी करते हैं अभ्यास

सीनियर फुटबाल खिलाड़ी अमित कादियान ने बताया कि गांव के युवाओं को नशे की लत से दूर करने के लिए फुटबाल का सहारा लिया। सिवाह, दिवाना, समालखा और पानीपत के 40 खिलाड़ी प्रतिदिन अभ्यास करते हैं। वह, सीनियर खिलाड़ी बीनू और प्रदीप के साथ मिलकर अभ्यास कराते हैं। पूर्व सरपंच खुशदिल कादियान, लेक्चरर सुरेंद्र कादियान, सीनियर खिलाड़ी व ग्रामीणों के सहयोग से खेल का सामन जुटाया जाता है। अब युवाओं का रुझान नशे की बजाय फुटबाल के प्रति ज्यादा है। युवा नौकरी पाकर परिवार का भी सहारा बन रहे हैं। 

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