जागरण संवाददाता, यमुनानगर : श्री न्यू यमुना ज्वेलर्स के संचालक संजीव कुमार खन्ना की हत्या के आरोप में पुलिस ने स्वर्ण कारोबारी योगेश सूरी व भाड़े के दो बदमाशों को गिरफ्तार कर लिया है। पूछताछ में उन्होंने हत्या करना कबूला है। एक साथी ने पहले तार से संजीव का गला घोंटा और फिर दोनों ने हथोड़े से कई वार कर मौत के घाट उतार दिया।

पुलिस ने बाडी माजरा से शुक्रवार शाम तीनों की गिरफ्तारी दिखाई। शनिवार को उन्हें कोर्ट में पेश करेगी। पुलिस के मुताबिक थापर कॉलोनी निवासी योगेश ने पूछताछ में बताया कि वह करीब दो साल से संजीव खन्ना के संपर्क में था। उनसे 13 किलो सोना उधार ले चुका था। इस सोने को वह बाजार में अन्य ज्वेलरों को सप्लाई कर देता था। इसके अलावा 30 लाख रुपये भी लिये थे। संजीव अपने रुपये मांग रहे थे। धमकी दी थी कि यदि रुपये वापस नहीं किए तो उसे उठवा देंगे। इससे वह घबरा गया था। इसलिए संजीव को ठिकाने लगाने की साजिश रची। उसने राजा राम गली निवासी रोहित व ग्लैडविन उर्फ शंटी को हायर किया। शंटी को तीन लाख रुपये देने की बात कही थी। गोशाला में काम करने वाले रोहित को हर महीने 25 हजार रुपये देने का वादा किया था। शंटी बेरोजगार है और योगेश के संपर्क में था। योगेश ने सोना व रुपये देने के बहाने 27 जून की रात संजीव को अपनी कार में बिठाया। तीनों उनको शहजादपुर की तरफ ले गए। योगेश के अनुसार ग्लैडविन ने तार से संजीव का गला घोंटा। फिर रोहित व उसने हथोड़ा मार कर उसे जान से मार दिया। शव खेतों में फेंक कर वे वापस यमुनानगर आ गए थे। बाक्स-1

परिजनों के साथ करा रहा था तलाशने का नाटक

हत्या के बाद योगेश संजीव के परिजनों के साथ-साथ उसकी तलाश में घूमने लगा। पुलिस अधिकारियों को भी झांसा दिया। जब पुलिस ने हिरासत में लिया तो कहने लगा कि उसके शहर के एक इंस्पेक्टर से अच्छे संबंध हैं। वह उसको कह कर संजीव खन्ना के मोबाइल की कॉल डिटेल निकलवा लेगा। एक बार तो पुलिस भी उसकी बातों में आ गई। इंस्पेक्टर को उसके साथ देखकर जांच अधिकारी ने सख्ती से पूछने की हिम्मत नहीं दिखाई। जब तक इंस्पेक्टर साथ था, आरोपित खुद को सुरक्षित महसूस कर रहा था। लेकिन मामला आला अधिकारियों तक पहुंचा तो साथ दे रहे इंस्पेक्टर को पीछे हटना पड़ा। बस फिर क्या था, सिटी पुलिस व सीआइए वन ने सीआइए में ले जाकर पूछताछ की तो उसने सारा राज उगल दिया। योगेश व रोहित के थे अलग-अलग बयान

पुलिस को भी शुरू में योगेश पर शक नहीं हुआ। संजीव के परिजनों के आरोप के बाद पुलिस ने योगेश व दूसरे आरोपित रोहित से पूछताछ की। योगेश ने बताया कि वह कार में बिठाकर संजीव खन्ना को अपने साथ ले गया था। रात करीब साढ़े 10 बजे उसने संजीव को गाबा अस्पताल से पहले जमींदारा पेट्रोल पंप के नजदीक छोड़ दिया था।

पुलिस को यह बात खटकी। क्योंकि कोई भी व्यक्ति इतना सोना देकर उसे घर से दूर क्यों छोड़ेगा। क्योंकि जमींदारा पेट्रोल पंप व मृतक के हुडा सेक्टर-17 स्थित घर के बीच एक किलोमीटर दूर है। दूसरा हत्या के बाद योगेश ने मृतक के नौकर को फोन कर कहा कि उसने उनका सोना देकर संजीव को पेट्रोल पंप के पास उतार दिया है, जबकि रोहित ने पुलिस पूछताछ में बताया कि उन्होंने संजीव को जगाधरी में मटका चौक पर गोशाला के नजदीक गाड़ी से नीचे उतार दिया था। दोनों के बयानों में अंतर होने से पुलिस को उन पर शक गहरा हुआ। भटकाने के लिए फेंका मोबाइल :

आरोपित ने ध्यान भटकाने के लिए संजीव का मोबाइल रादौर रोड की साइड में नहर में फेंक दिया, ताकि उस साइड की लोकेशन आए और पुलिस उसकी उधर ही तलाश करती रहें। आरोपित संजीव को अंबाला की साइड में ले गए और रास्ते में हत्या कर शव को खेतों में फेंक दिया। संजीव के परिजनों ने साधी चुप्पी:

एक दिन पहले पुलिस पर योगेश सुरी को बचाने के आरोप लगाने वाले मृतक संजीव खन्ना के परिजन शुक्रवार को पूरा दिन चुप्पी साधे रहे। वे किसी से भी बात करने से बचते रहे। सबसे बड़ा सवाल, ऐसा क्यों। परिजनों पर किसी का दबाव है या फिर उन्हें किसी का डर है। थाना शहर में पहुंचने के बाद उन्होंने एसएचओ के अलावा किसी से बात नहीं की। एक दिन पहले उन्होंने एक पुलिस इंस्पेक्टर व डीएसपी पर योगेश के साथ हत्याकांड में शामिल होने का आरोप लगाया था। दिनभर पूछताछ के बाद शाम को किया खुलासा :

पुलिस ने योगेश, शंटी व रोहित से दिनभर पूछताछ की। एसपी राजेश कालिया खुद दोपहर व शाम को उनसे पूछताछ करने सीआइए-वन स्टॉफ में पहुंचे। उन्होंने एक के बाद एक कई सवाल तीनों आरोपितों से पूछे। शाम सात बजे सिटी एसएचओ आरोपितों को सामने लेकर आए। योगेश के जिला के एक इंस्पेक्टर व डीएसपी से मिलीभगत होने पर पुलिस ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि परिजनों ने गुस्से में पुलिसकर्मियों का नाम बोल दिया था। संजीव के परिजन भी कुछ कहने से बचते रहे। बेटे आनंद खन्ना का कहना था कि पिता की मौत ने उनको हिला दिखा है। वे कुछ बात करने की स्थिति में नहीं हैं। ये कहते हुए वे कार में बैठ कर चले गए। मैं सब बेच कर चला जाउंगा : विनोद

हत्यारोपित योगेश सुरी का पिता विनोद सुरी भी थाना शहर यमुनानगर में अपने बेटे से मिलने पहुंचा। बेटे को पुलिस लॉकअप में देखकर वो फूट फूट कर रोने लगे। विनोद ने बेटे को फटकारते हुए कहा कि तूने पूरे शहर में मेरी बेइज्जती करवा दी। अब मैं किसी को क्या मुंह दिखाउंगा। इसलिए मैं शहर से अपना सबकुछ बेच कर कहीं ओर चला जाउंगा। भले ही मुझे कहीं ऑटो ही क्यों न चलाना पड़े। योगेश भी पिता को रोता देख अपने आंसू नहीं रोक पाया। वह हाथ जोड़ कर उनसे माफी मांगने लगा। उसने कहा कि तब उसे कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था की वह क्या करने जा रहा है। योगेश ने पिता से कहा कि वह मम्मी से मिलना चाहता है। लेकिन पिता ने उसे मम्मी से मिलवाने से मना कर दिया। योगेश गाड़ी चला रहा था पीछे बैठा संजीव :

जिस कार में योगेश ने संजीव को अपने साथ लिया। उसको वह खुद चला रहा था। शंटी ने तार से उसका गला दबाया और रोहित ने हथौड़े से 11 वार कर उसकी हत्या की। दोनों की आठवीं तक पढ़े हुए है। योगेश बीकॉम पास है। वह इकलौता बेटा है। उसके दो बहनें हैं।

Posted By: Jagran

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