पानीपत, जेएनएन। पानीपत में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है।  राजनगर की एक महिला ने सिविल अस्पताल में बेटे को जन्म दिया। पति को मृत बेटी पैदा होने की बात कर गुमराह किया। सात साल बाद झगड़ा होने पर पति को बच्चा बेच देने की बात कह दी। पति ने नगर निगम में आरटीआइ लगाई तो राज खुला कि उसकी पत्नी ने बेटे को ही जन्म दिया है। पुलिस ने पत्नी सहित पांच लोगों के खिलाफ षड्यंत्र, धोखाधड़ी और बच्चे को खुर्द-बुर्द करने का मामला दर्ज किया है।

 गणेश कालोनी में रहने वाले नरेंद्र कौशिक ने पुलिस को शिकायत दी कि चार अक्टूबर 2008 को उसकी शादी राजनगर की अनीता के साथ हुई थी। शादी के कुछ महीने बाद ही दोनों में विवाद हो गया था।  18 मई, 2011 को पत्नी मायके चली गई। उस समय पत्नी गर्भवती थी। 24 मई को निजी अस्पताल में अल्ट्रासाउंड कराया तो बच्चा स्वस्थ था। बच्चे के पैदा होने की संभावित तिथि 8 अक्टूबर 2011 थी। इसके बाद पत्नी से विवाद चल रहा था। मायके में थी। 12 अक्टूबर को साला अनिल, मामा कुलदीप के साथ उसके घर आया और कहा कि अनीता ने सिविल अस्पताल में मृत बच्ची को जन्म दिया था। बच्ची को शिवनगर की श्मशान भूमि में दफना दिया है।  तब उसने साले पर यकीन कर लिया था। दिसंबर 2018 में पत्नी बाजार में मिली और झगड़ा कर बताया कि उसने बेटी को नहीं, बेटे को जन्म दिया था। बेटे को बेच भी दिया था। वह दो साल की बेटी प्रियंका और चार साल के बेटे दीक्षांत को भी बेच देगी।

इससे उसे पत्नी पर शक हुआ और उसने अपने स्तर पर तहकीकात शुरू की है। आरोप कि पत्नी अनीता ने ससुर सतबीर, सास संतरा, मामा कुलदीप और सतकरतार कालोनी के साहब ङ्क्षसह ने षड्यंत्र रचकर उसके बेटे को बेच दिया है। इस बारे में थाना शहर प्रभारी योगेश कुमार ने बताया कि उक्त आरोपितों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। बच्चे के बेचे जाने के मामले की जांच की जा रही है।  

 

पांच महीने सुबूत जुटाए, आइटीआइ से सुलझी गुत्थी

 नरेंद्र ने बताया कि पांच महीने तक वह नगर निगम और सिविल अस्पताल में चक्कर लगाता रहा। इसके बाद नगर निगम के रिकार्ड से बच्चे के पैदा होने का रजिस्ट्रेशन नंबर मिला। मई 2019 में आइटीआइ लगाई। इससे पता चला की उसकी पत्नी अनीता ने 10 अक्टूबर 2011 को बेटे को जन्म दिया था। रिकार्ड में बेटे का नाम दीपक लिखवाया गया है। पत्नी ने मृत बेटी को जन्म देने का झूठ बोला था।

जांच अधिकारी ने धमकाया, गृहमंत्री विज को शिकायत देने पर जांच शुरू

नरेंद्र ने बताया कि 28 नवंबर 2019 को डीएसपी मुख्यालय सतीश कुमार को शिकायत दी। बस अड्डा चौकी के एक एएसआइ ने धमकाया और सुनवाई नहीं की। 22 फरवरी 2020 को गृहमंत्री अनिल विज को शिकायत दी। 16 मार्च को तत्कालीन डीएसपी बिजेंद्र ङ्क्षसह ने उसके व पत्नी के बयान दर्ज किए। डीएसपी का तबादला हो गया और फिर लाकडाउन लग गया। जांच बंद कर दी। 20 जुलाई को एसपी मनीषा चौधरी को शिकायत दी। डीएसपी सिटी ने 28 जुलाई को नगर निगम से रिकार्ड मंगवाया। इसमें बताया कि अनीता ने जीवित बेटे को जन्म दिया था। सिविल अस्पताल ने रिकार्ड मुहैया नहीं कराया।

पहले बच्चे का नाम दर्ज कराया, फिर दहेज का केस दर्ज करा दिया

नरेंद्र ने बताया कि पत्नी अनीता ने 10 अक्टूबर 2011 में पैदा हुए बेटे का 21 जनवरी 2013 नगर निगम में रजिस्ट्रेशन कराया। आरोप है कि इसके बाद उसके, मां, दो भाइयों और बहन के खिलाफ आठ मरला चौकी में दहेज का केस दर्ज करा दिया। इसके बाद उसके चाकू से वार करने का भी मामला दर्ज कराया गया।

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