त्रिभुवन विश्वविद्यालय कीर्तिपुर काठमांडु के सेंट्रल डिपार्टमेंट ऑफ केमेस्ट्री से अंतरराष्ट्रीय कांफ्रेंस में आए डॉ. विनय कुमार झा ने प्रस्तुत किया शोधपत्र राज सिंह, पानीपत:

घर की रसोई, होटल और रेस्टोरेंट से निकली सब्जी और अंडे के छिलके, बासी रोटी, खराब सब्जी का कचरा प्रदूषण से मुक्ति दिलाएगा। हरित पर्यावरण की दिशा में इसे बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। प्रदूषित आबोहवा इससे स्वच्छ होगी। आर्य पीजी कॉलेज में इनोवेशन इन केमेस्ट्री बॉयोलॉजिकल एंड इनवायरमेंटल साइंसेज पर आयोजित इंटरनेशनल कांफ्रेंस में प्रोफेसर डॉ. विनय कुमार झा ने इस पर आधारित शोधपत्र प्रस्तुत किया। प्रो. झा त्रिभुवन विश्वविद्यालय कीर्तिपुर काठमांडु के सेंट्रल डिपार्टमेंट ऑफ केमेस्ट्री में कार्यरत हैं। वेस्ट मैनेजमेंट और हरित पर्यावरण पर आधारित उनके नए रिसर्च रसायन विज्ञान की दुनिया में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

काठमांडु से अंतरराष्ट्रीय कांफ्रेंस में भाग लेने आए डॉ. विनय झा ने आर्य कॉलेज में प्रथम सत्र के समापन के बाद दैनिक जागरण से खास बातचीत की। उन्होंने बताया कि प्रदूषण एक सबसे बड़ी समस्या बनकर विश्व के सामने उभर रही है। कई वैज्ञानिक इसे नियंत्रित करने के लिए शोध कर रहे हैं। सब्जियों के कचरे को फिटकरी मिलाकर जलाने से चारकोल बनेगा। इस चारकोल का इस्तेमाल पेयजल को शुद्ध करने के लिए लगे आरओ (रिवर्स ऑसमोसिस) सहित इंडस्ट्रीज से निकलने वाली जहरीली गैस को साफ करने, मेडिसिन और सौंदर्य उत्पाद बनाने में किया जा सकता है। अभी तक चारकोल का निर्माण लकड़ी और पशुओं की हड्डियों को जलाकर बनाया जाता है। लकड़ी को जलाने का अर्थ, पेड़ों की अंधाधुंध कटाई। हड्डियों के लिए पशु वध किया जाता है। दोनों ही स्थितियां मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली है। धुएं की शुद्धि संभव

प्रोफेसर झा ने बताया कि फैक्ट्रियों की चिमनियों से निकलने वाले हैवी मेटल धुआं को भी शुद्ध किया जा सकता है। कुछ जगह इस्तेमाल कर देखा तो अच्छे परिणाम आए हैं। अभी कुछ काम करना बाकी है। उद्यमियों को सहयोग के लिए पहल करनी होगी। रिसर्च से समाज में बदलाव

रिसर्च पेपर में उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में कम लागत पर वेस्ट प्रोडक्ट्स के रिसाइकिल पर कार्य करने की आवश्यकता है। सब्जियों और पेड़ पौधे के वेस्ट से जैविक खाद का निर्माण किया जा सकता है। इस तरह के रिसर्च से समाज में बड़े स्तर पर बदलाव लाकर जनहित में उपयोगी बनाना संभव हो सकता है।

Posted By: Jagran

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