जींद [कर्मपाल गिल] जिद्द और जुनून हो तो विपरीत हालात में भी कामयाबी कदम चूमती है। जुलाना के वार्ड-1 के छोटे से किसान के बेटे रिंकू लाठर ने यह साबित कर दिखाया है। रिंकू ग्रामीण परिवेश में पढऩे वाले बच्चों के लिए प्रेरणास्रोत हैं। यूपीएससी की परीक्षा की परीक्षा में रिंकू ने 232वां रैंक हासिल किया है। आईपीएस कैटेगरी में उसका चयन लगभग पक्का है, लेकिन रिंकू का सपना डीसी बनना है। इसलिए अच्छी रैंङ्क्षकग के लिए फिर पेपर देंगे।

दैनिक जागरण के साथ बातचीत में 26 वर्षीय रिंकू ने बताया कि पिताजी सुरेश लाठर एकड़ जमीन पर खेती करते हैं। मां कृष्णा भी गृहिणी हैं। मम्मी-पापा दोनों अनपढ़ हैं। उन्होंने हम दोनों भाइयों व बहन को पढ़ाया। बड़ा भाई सतीश नेवी में सेलर है। उसने नौवीं तक की पढ़ाई गांव जुलाना के सरकारी स्कूल में हुई। दसवीं जुलाना के रोहिला स्कूल से की। रोहतक से 11वीं-12वीं करने के बाद कुरुक्षेत्र एनआईटी से मैकेनिकल इंजीनियङ्क्षरग की। ग्रेजुएशन तक कई बार पापा के साथ खेतों में काम भी किया। लेकिन पापा हमेशा कहते थे कि मेरा कर्म खेतों में काम करना है। आपका कर्म पढ़ाई करना है। इसलिए अपने लक्ष्य पर फोकस रखो। बीटेक के बाद भारत पेट्रोलियम में एग्जीक्यूटिव आफिसर के पद पर ज्वाइन किया।

वहां प्रशासनिक अफसरों से मिलना होता था। उन्हें देखकर मन में आया कि समाज के लिए भी कुछ करना है और नौकरी के साथ यूपीएससी की तैयारी शुरू की। पिछले साल सीआईएसएफ में असिस्टेंट कमांडेंट के पद पर चयन होने के बाद भारत पेट्रोलियम की नौकरी छोड़ दी थी, लेकिन अभी तक सीआईएसएफ में ज्वाइन नहीं किया था। रिंकू कहते हैं अनुशासन को अपनाकर विद्यार्थी कुछ भी हासिल कर सकते हैं। यह कभी न सोचें कि मुझे अंग्रेजी नहीं आती या मैं गांव का रहने वाला हूं। सोच को हमेशा बड़ा रखना होता है।

इंटरव्यू में पूछा था जींद के डीसी बनोगे तो क्या करोगे: पढ़ें जवाब

रिंकू ने बताया कि उससे इंटरव्यू में पूछा गया था कि जींद के डीसी बने तो कौन से चार काम करोगे? उसने जवाब दिया कि जींद की ज्यादातर आबादी खेती करती है, लेकिन उत्पादन कम हो रहा है। इसलिए कृषि उत्पादन बढ़ाने पर काम होगा। महिला सशक्तीकरण में जींद पीछे है। लड़कियों की पढ़ाई के लिए काम करूंगा। पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं की स्थिति को मजबूत किया जाएगा। स्वास्थ्य के क्षेत्र में जींद पिछड़ा हुआ है, इसलिए हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ाने पर फोकस रहेगा। साक्षरता दर बढ़ाने पर फोकस रहेगा।

मां-बाप की आंखों से बहते रहे आंसू

यूपीएससी परीक्षा का जब परिणाम आया, तब ङ्क्षरकू रोहतक में थे। एक दोस्त ने उनके कमरे पर आकर 232वां रैंक आने की खुशखबरी दी। रिंकू ने सबसे पहले माता-पिता को फोन किया। फिर केरल में नेवी में तैनात भाई-भाभी से बात की। बड़ी बहन कविता को जानकारी देकर दोस्त के साथ गांव के लिए रवाना हो लिए। मम्मी-पापा पहले ही इंतजार कर रहे थे और ढोल-नगाड़े बज रहे थे। रिंकू के गाड़ी से उतरते ही मम्मी-पापा की आंखों से खुशी के आंसू बह निकले। रिंकू भी कई देर तक उनसे लिपटकर रोता रहा। खुशी इतनी ज्यादा थी कि आसपास खड़े लोगों को चुप करवाना पड़ा। इसके बाद मां ने बेटे की आरती उतारी और टीका लगाया।

फेसबुक और व्हाट्सएप से बनाई दूरी

रिंकू कहते हैं कि जिस दिन उन्होंने यूपीएससी की तैयारी शुरू की थी, उसी दिन से फेसबुक चलाना बंद कर दिया था। पांच साल से कभी फेसबुक पर नहीं गया। व्हाट्सएप भी कुछ दिन पहले ही चलाना शुरू किया है। सिर्फ इंस्टाग्राम को पढ़ाई के उद्देश्य से प्रयोग करता था। टीवी पर सिर्फ राज्यसभा चैनल की डिबेट देखता था। भारत पेट्रोलियम में नौकरी करते हुए पार्टियों से दूरी बनाकर रखी। सभी तरह की पार्टी से किनारा कर लिया था। सिर्फ एक ही लक्ष्य था कि पढऩा है और यूपीएससी क्लीयर करना है।

Posted By: Manoj Kumar

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