जागरण संवाददाता, कुरुक्षेत्र :

कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय प्रशासन में कार्य किस ढंग से हो रहे हैं इसका अंदाजा कुवि के अधिकारियों का सूचना आयुक्त को दिए जवाब से आसानी से लग सकता है। विश्वविद्यालय ने एक आरटीआइ के जवाब में पिछले तीन वर्ष का रिकार्ड ही दीमक से चट किया हुआ दिखा दिया। सूचना आयुक्त ने आरटीआइ कार्यकर्ता की अपील के बाद सूचना आयुक्त भूपेंद्र धर्माणी ने कुवि प्रशासन को एक सप्ताह का समय दिया है। जिसमें कुवि स्थापना शाखा और यूनिवर्सिटी कॉलेज प्राचार्य की ओर से शपथ पत्र देकर सूचना देने के आदेश दिए हैं।

आरटीआइ कार्यकर्ता डॉ. विरेंद्र पूनिया ने बताया कि उन्होंने पिछले वर्ष कुवि प्रशासन के विभिन्न विभागों से सूचना के अधिकार के तहत जानकारी मांगी थी। जिसमें यूनिवर्सिटी कॉलेज भी शामिल था। यूनिवर्सिटी कॉलेज के अर्थशास्त्र विभाग और वाणिज्य विभाग ने सूचना नहीं दी थी। जिसमें प्रथम अपीलीय अधिकारी डॉ. अनिल वोहरा के पास अजीब तर्क दिया गया था कि पूरा रिकार्ड दीमक खा गई। जिसके बाद कई बार दोनों विभागों को रिकार्ड देने के आदेश जारी किए गए, लेकिन आदेश मान्य नहीं हुए। उन्होंने बताया कि 18 फरवरी 2018 को सूचना आयोग की ओर से सूचना देने के आदेश दिए गए, लेकिन यूनिवर्सिटी कॉलेज व कुवि प्रशासन ने एक बार भी मामले में गंभीरता नहीं दिखाई। डीसी कोर्ट में लगी पेशी

डीसी कोर्ट में सुबह सवा 11 बजे सूचना आयुक्त भूपेंद्र धर्माणी पहुंच गए थे। उन्होंने आरटीआइ कार्यकर्ता, कुवि के स्थापना शाखा के असिस्टेंट रजिस्ट्रार सतीश शर्मा और यूनिवर्सिटी कॉलेज के प्राचार्य सूरजभान मलिक के पक्षों का सुना। उन्होंने दोनों पक्षों को सुनने के बाद पांच सितंबर तक का समय दिया है। अगर उस दिन तक सूचना मुहैया नहीं कराई गई तो जुर्माने के लिए अपील की जा सकती है। उन्होंने कुवि अधिकारियों को फटकार भी लगाई और एक सप्ताह में शपथ पत्र देने के आदेश दिए गए हैं।

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