विनीश गौड़, कुरुक्षेत्र

ग्रामीणों के श्रमदान और सहयोग से विकसित किरमिच गाव का ग्रामीण प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) जल्द ही राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने के लिए तैयार है। कुरुक्षेत्र शहर स्थित कृष्णा नगर गामड़ी की पीएचसी के गुणवत्ता आश्वासन मानक (क्यूए) में देश में भर में प्रथम आने से यह प्रेरणा मिली। उसे ही आदर्श मान लिया। स्थानीय निवासियों, पंचायत और अस्पताल के डॉक्टरों व कर्मचारियों ने

सुधार के सामूहिक प्रयास किए। संकल्प ने एक साल में ही पूरा दृश्य बदल दिया। कुछ मामलों में तो किरमिच का अस्पताल अपने आदर्श से भी आगे निकल गया है। यहा की व्यवस्था जाचने के लिए अगस्त के प्रथम सप्ताह में राष्ट्रीय स्तर की टीम आ रही है।

एक साल पहले जब इस पीएचसी को विशेष पहचान दिलाने की पहल शुरू हुई तो सरकार से 2017-18 में मात्र चार लाख का बजट मिला था। 2010 में स्थापना के समय तीन एकड़ जमीन देने वाली गाव की पंचायत ने मजदूरी और अन्य जिम्मेदारिया अपने ऊपर ले लीं। नतीजा सामने है। प्रदेश की 486 पीएचसी में इसे भी गुणवत्ता आश्वासन मानक वाले प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के रूप चुना गया है।

शहर से दस किमी दूर किरमिच गाव की 10 बिस्तरों वाली पीएचसी में 15 कमरे हैं। चार डॉक्टर प्रतिदिन औसतन 200 मरीजों का इलाज कर रहे हैं। दो एएनएम और तीन नसर्ें हैं। एक फार्मासिस्ट और एक लैब टेकनीशियन सेवाओं को प्रभावी बनाते हैं। चिकित्सकों ने अपने स्तर पर एक सफाई कर्मी भी रखा हुआ है।

किरमिच पीएचसी के प्रभारी डॉ. प्रदीप बताते हैं कि कृष्णा नगर गामड़ी पीएचसी

देशभर के शहरी स्वास्थ्य केंद्रों के लिए मॉडल बन गया है। उन्हीं मानकों को ध्यान में रखकर किरमिच में कार्य किया जा रहा है। कई मामलों में यह केंद्र उनसे भी आगे हैं। कृष्णा नगर गामड़ी में मेटरनिटी वार्ड अब तैयार किया जा रहा है, जबकि किरमिच में पहले ही तैयार है। इसकी नवजात शिशु यूनिट में विशेष मशीन भी लगी है, ताकि जरूरत पड़ने पर नवजात शिशु को उसमें रखा जा सके। डॉक्टर प्रदीप के अनुसार सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था में लोगों का भरोसा अर्जित करने में महिला चिकित्सा अधिकारी डॉ. अलका दहिया, होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ. भरत, दंत रोग विशेषज्ञ डॉक्टर गौरव बंसल के समर्पण की महत्वपूर्ण भूमिका है।

सबकुछ निगरानी में

यहा रोजाना औसतन 200 मरीज उपचार कराने आते हैं। मरीज के पर्ची कटवाने के बाद डॉक्टर से परामर्श लेने, टेस्ट कराने, दवा लेने तक का समय दर्ज होता है। सामान्य मरीज को 15 से 20 मिनट उपचार मिल जाता है। अगर टेस्ट कराने पड़े तो 40 से 50 मिनट लगते हैं। गुणवत्तापरक स्वास्थ्य सेवा के सभी कायरें की निगरानी होती है। सफाई का पूरा ध्यान रखा जाता है। केंद्र के बाहर पार्क बन रहा है। आक्सीजन से लेकर फ्रिजर व तमाम उपकरणों का रोजाना रिकॉर्ड रखा जाता है। प्रतिदिन 10 से 15 मरीजों से एक फॉर्म भराया जाता है, जिसमें यहा की सेवाओं, चिकित्सकों व कर्मचारियों का व्यवहार दर्ज होता है। केंद्र की इमारत को दिव्याग फ्रेंडली बनाया गया है। छोटी-छोटी चीजों का भी ध्यान रखा गया है। जैसे चिकित्सक की टेबल पर सेनिटाइजर, वाश बेसिन पर तौलिया, मरीजों के बेड पर धुली हुई चादर, उनके लिए पंखे आदि दुरुस्त हैं। पूरे प्रदेश में एकमात्र होम्योपैथिक डिस्पेंसर यहा उपलब्ध हैं। आइसोलेशन वार्ड बन रहा है, जो किसी पीएचसी में नहीं है। लेबर रूम से अटैच बाथरूम है ताकि गर्भवती महिलाएं ऑब्जरवेशन में रहें।

स्तनपान के लिए अलग रूम है।

तैयारी पूरी जोरों पर

जिला क्वालिटी एश्योरेंस यूनिट की नोडल अधिकारी डॉ. शिल्पा मनचंदा बताती हैं कि इसे प्रदेश स्तर पर गुणवत्ता मानक वाला ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्र चुन लिया गया है। उम्मीद है कि अगस्त में आने वाली राष्ट्रीय टीम के मानकों पर भी यह केंद्र खरा उतरेगा।

Posted By: Jagran