यमुनानगर, जागरण संवाददाता। फर्जी ई रवाना के जरिए राजस्व काे नुकसान पहुंचाने वाले गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। प्रतापनगर थाना पुलिस ने तीन आरोपितों को गिरफ्तार किया है। यह खनन विभाग का पोर्टल हैक कर वाहनों के फर्जी नंबर डालकर फर्जी ई-रवाना जारी कर देते। जिसकी आड़ में यह अवैध खनन को वैध दिखाकर सप्लाई करते।

इन्‍हें किया गिरफ्तार

इनमें मुख्य आरोपित रूपनगर कालोनी निवासी देशदीपक, दुर्गा गार्डन कालोनी निवासी गुरप्रीत सिंह व उत्तर प्रदेश के सहारनपुर के गांव कोटड़ी निवासी अनुज को गिरफ्तार किया गया है। प्रतापनगर थाना प्रभारी पृथ्वी सिंह ने बताया कि गुरप्रीत को कोर्ट में पेश कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया। जबकि देशदीपक व अनुज को सात दिन के रिमांड पर लेकर पूछताछ की जा रही है।

अवैध माइनिंग की दी थी शिकायत

दरअसल, 14 सितंबर को खनन अधिकारी राजेश सांगवान ने थाना प्रतापनगर में शिकायत दर्ज कराई थी कि मैसर्स खालसा स्क्रीनिंग प्लांट देवधर पर फर्जी ई-रवाना बिल तैयार कर अवैध माइनिंग की जा रही है। जब टीम ने यहां पर जाकर जांच की, तो पता लगा कि यह प्लांट आठ माह से बंद पड़ा है। इसके बावजूद प्लांट के ई रवाना पोर्टल से खनिज की खरीद व बिक्री की जा रही है। इस प्लांट 23 जुलाई 2022 को मैसर्स जेएसएम फूड्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा 171 ई-रवाना से खनिज की खरीद की गई है। जबकि एनजीटी के आदेशानुसार यह घाट एक जुलाई से 15 सितंबर तक बंद है। इस मामले में प्रतापनगर थाना पुलिस ने केस दर्ज किया था।

प्लांट का लाइसेंस खरीदकर करते थे ठगी

पुलिस ने जब तफ्तीश शुरू की, तो पता लगा कि खालसा स्क्रीनिंग प्लांट का लाइसेंस देशदीपक ने 32 लाख रुपये में खरीदा था। जिससे उसे प्लांट का ई रवाना पोर्टल भी मिल गया था। उसके साथ अनुज कुमार, गुरप्रीत सिंह भी कार्य करते थे। इनमें गुरप्रीत बतौर कंप्यूटर आपरेटर कार्य करता था। पुलिस के अनुसार, आरोपित खनन विभाग का पोर्टल हैक कर उस पर वाहनों के फर्जी नंबर डाल देते। जिसका ई रवाना जारी कर देते। विभाग के पोर्टल पर ई रवाना चढ़ जाता। जबकि जिस वाहन का नंबर डाला गया। वह कागजों में नहीं आता। जिससे यह लोग अवैध खनन को वैध दिखाकर निकाल देते। इस तरह से अलग-अलग राज्यों से खनन सामग्री की खरीद व बिक्री की गई।

आरोपित देशदीपक पर पहले भी दर्ज हैं मामले

आरोपित देशदीपक के खिलाफ पहले भी चार मामले दर्ज हैं। इनमें से तीन केस धोखाधड़ी के दर्ज हैं, जबकि एक आबकारी अधिनियम के तहत दर्ज हैं। आरोपित को धोखाधड़ी के एक केस में दो वर्ष 11 महीने की सजा भी हो चुकी है। अन्य केस कोर्ट में विचाराधीन हैं।

Edited By: Anurag Shukla

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