पानीपत/करनाल, [यशपाल वर्मा]। आंसू दुख या सुख की बपौती नहीं है। वह तो भावों को बयां करने की बानगी भर हैं। गुपचुप ही सही, उसके आंसू भी कुछ इसी तरह के भावों की कहानी कह रहे थे। कभी तेज होते तो कभी मध्यम। शब्द तो कह ही न पाते, उसकी बात। इतना आसान भी तो नहीं है, एक दशक के दर्द को शब्दों में ढालना। वह आज तक गुमनाम थी। आज उसकी पहचान है। 

11 साल लग गए इसमें। जब वह छह साल की थी, तो पालने में असमर्थ दिव्यांग पिता उसे करनाल के एमडीडी आश्रम में छोड़ गए थे। मां तो जन्म देते ही कहीं चली गई थी और इस तरह से भरे-पूरे परिवार की यह बच्ची अनाथ हो गई। उसका एक चचेरा भाई है। जिसके मन में इस बच्ची के प्रति टीस थी। वह हर वक्त सोचता उसकी बहन घर पर रहे। बच्चा था। सो इच्छा व्यक्त नहीं कर पाता था, लेकिन इसी उम्मीद के साथ जी रहा था कि एक दिन वह बहन को अपने घर लाएगा। बुधवार को उसका सपना साकार हो गया। छह साल की वह बच्ची अब 17 साल की है।

पिता बच्ची को आश्रम में छोड़ लापता हो गया
बच्ची के पैदा होने के कुछ समय बाद माता उन्हें छोड़ कर चली गई। पिता क्योंकि दिव्यांग था, वह किसी तरह से गुजारा चलाता रहा। बाद में जब उसे मुश्किल लगा तो वह भी बच्ची को एमडीडी आश्रम छोड़कर लापता हो गया। तब से उसका कोई पता नहीं चला। बच्ची भी यहीं पली बड़ी होती रही। 

मजदूरी करता है चचेरा भाई
इंद्री निवासी लड़की का चचेरा भाई इस बात को जानता था। उसकी एक ही तमन्ना थी कि जब हम सभी परिवार के साथ रह रहे हैं, फिर चचेरी बहन आश्रम में क्यों रहे। उसे यह भी नहीं पता चल पा रहा था कि वह है किस आश्रम में। उसने अंबाला, पानीपत और जहां भी जानकारी मिली, वहां बहन की खोज की। 

फिर पता चला कि वह एमडीडी आश्रम में है
इसी दौरान उसे पता चला कि उसकी बहन करनाल के एमडीडी आश्रम में हैं। उसने आश्रम के संचालकों से बातचीत की। आश्रम संचालक पीआर नाथ ने बताया कि युवक ने दस्तावेज दिखाए। यह साबित कर दिया कि वह बच्ची का चचेरा भाई है। सब ठीक तो बहन को भाई से मिलाया गया। बच्ची ने घर जाने की इच्छा जाहिर की। 

पत्नी के साथ भाई पहुंचा लेने के लिए
बच्ची अब दसवीं कक्षा में पढ़ रही है। उसे संगीत व नृत्य का शौक है।  चंडीगढ़ में हरियाणवी लोकनृत्य में पहला स्थान हासिल किया है। उसने बताया कि पिता ने उसे जिस तरह से छोड़ दिया था, उसका दुख तो हैं, मगर शुक्रगुजार है, कम से कम सुरक्षित तो छोड़ा। अब तो आश्रम ही घर लगने लगा था। वह अब वापस जा रही है, परिवार से मिलने की खुशी है। फिर भी कहीं न कहीं लग रहा है कि एक बार फिर वह घर से बिछुड़ रही है।

Posted By: Anurag Shukla

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