जागरण संवादताता, पनीपत: जीएस स्पिनिग मिल के नीतीश उर्फ प्रेम, अनुज और मुनीष अंसारी की हाईटेंशन तार की चपेट में आने से हुई मौत को श्रमिक मिल प्रबंधन की लापरवाही बता रहे हैं। उनका कहना है कि दीवारों और टोंटी में चार दिन से करंट दौड़ रहा था, लेकिन प्रबंधन ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। यह लापरवाही तीन लोगों की मौत में बदल गई।

यहां 19 क्वार्टरों में करीब 133 लोग रह रहे थे। हादसे की वजह ईटों की ग्रिल से टूटकर निकले सरिये का हाईटेंशन लाइन के नजदीक होना बताया है। श्रमिक सतीश और विजय ने बताया कि कंरट आने के बारे में उन्होंने मिल के इलेक्ट्रिशियन को भी अवगत कराया था, लेकिन सरिया छत से नहीं हटाया गया। इससे उसके भाई नीतीश और अन्य दो की मौत हो गई। हादसे के बाद मिल में श्रमिक पांच घंटे तक हंगामा करते रहे। दो मिनट में जिदा जल गए तीन दोस्त

मोहित ने बताया कि दोस्तों को छुड़वाते समय वह करंट से आठ फुट दूर दूसरी छत पर गिरा। होश में आने पर चिल्लाया। छत और दीवारों में करंट था। चप्पल नहीं पहनी थी। आंखों के सामने तीनों दोस्त दो मिनट आग से जल गए और उनकी मौत हो गई। 10 मिनट बाद दोस्त पंकज कुमार आठ से दस श्रमिकों के साथ छत पर आया। उसे चप्पल दी। इसके बाद डंडे मारकर सरिये को हाईटेंशन लाइन से हटाया।

दस मिनट बाद सप्लाई रोकी

मिल के डिस्पैच मैनेजर जसबीर सिंह ने बताया कि हादसे की सूचना मिलने पर जीएम मनोज ने चंदौलाी पावर हाउस में कॉल की। हाईटेंशन लाइन की सप्लाई बंद कराई। मिल के अंदर की बिजली की सप्लाई भी बंद कराई गई। इसके बाद ही श्रमिक छत पर पहुंचे। मिल मालिक का दावा: दीवारों में नहीं था करंट

मिल के मालिक घनश्याम गोयल ने बताया कि 10 साल पहले उसने मिल खरीदा था। इसमें श्रमिक क्वार्टर बना रखे हैं। क्वार्टर में दूसरी मंजिल तक सीढ़ी नहीं है। श्रमिकों का छत पर जाना वर्जित है। श्रमिक नंगे पांव छत पर गए और हाईटेंशन लाइन की चपेट में आने हादसा हो गया। श्रमिक का आरोप झूठा रहे हैं कि दीवार और टोंटी में करंट था। यहां चार इलेक्ट्रिशियन हैं। सिकी को सूचना नहीं दी।

कंप्यूटर का कोर्स कर रहा था नीतीश

सतीश ने बताया है कि परिवार में पिता रुद्रपाल, बड़ा भाई अजीत, राहुल, बहन मनीषा, निशा, किरण और गुड़िया और पारुल हैं। नीतीश पांचवें नंबर का था और 12वीं पास करके कंप्यूटर का कोर्स कर रहा था। वह चार दिसंबर से काम कर रहा था। छिन गया अनुज के परिवार का सहारा

कोहंड के पास भारतीय फैक्ट्री में काम करने वाले माधव ने बताया कि उसके नाती अनुज के दो भाई हैं। तीन साल से वह जीएस मिल में काम कर रहा था। अनुज की कमाई से घर चलता था। पुलिस और मिल मालिक जबरदस्ती उसके नाती और दो श्रमिकों के शव अस्पताल ले गए। खाना खाकर गया था मुनीष, लौटा शव

अनीश अंसारी ने बताया कि परिवार में भाई रिजवान, मुमताज, बहन संजीदा, अंजीता और जरीना है। भाई मुनीष सबसे बड़ा था। चार साल से मिल में काम कर रहा था। मुनीष खाना खाकर छत पर गया था। इसके बाद भाई तो नहीं लौटा उसका शव ही कमरे में आया है।

एंबुलेंस में आग लगाने की चेतावनी, सूझबूझ से बची जान

श्रमिकों ने चेतावनी दी कि अगर शवों को मालिक पर कार्रवाई के बिना ले जाया गया तो एंबुलेंस को आगे लगा देंगे। एंबुलेंस से नीचे उतरकर ईएमटी (इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन बलराज मलिक) ने श्रमिकों को समझाया कि वे घायल श्रमिक मोहित का इलाज करने दें। इसके बाद मामला शांत हुआ। एंबुलेंस के सामने लेट गए श्रमिक

एंबुलेंस के सामने श्रमिक लेट गए। मनीष अंसारी के शव को ले जाने का विरोध किया। पुलिस ने उन्हें हटाया। मिल मालिक के बेटे और अधिकारियों ने श्रमिकों को हड़काया कि उन सबको को मिल में ही काम करना है। काम नहीं मिलेगा को भूखे मरेंगे। समझौते के लिए दबाव बनाया। वहीं मिल मालिक घनश्याम गोयल ने घायल मोहित को समझाया कि पुलिस को बताना कि वे चप्पल नहीं पहने थे। टाइम लाइन

9:00 बजे सुबह हुआ हादसा

9:30 बजे सामान्य अस्पताल की एंबुलेंस मिल में पहुंची। श्रमिकों ने हंगामा किया।

10:05 बजे थाना सदर प्रभारी अशोक कुमार और बाद में डीएसपी जयप्रकाश पहुंचे। श्रमिकों को समझाने का प्रयास किया पर वे नहीं माने।

12:35 बजे मुनीश अंसारी के शव को अस्पताल ले जाया गया।

1:30 बजे डीएसपी मुख्यालय सतीश कुमार वत्स पहुंचे और श्रमिकों को निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया।

-1:58 बजे श्रमिकों को मिल से बाहर खदेड़ा और नीतीश और अनुज के शवों को सामान्य अस्पताल के शवगृह में ले जाया गया।

-शाम 5:00 बजे मृतकों के स्वजन नहीं पहुंचे। इसी वजह से शवों का पोस्टमार्टम नहीं हो पाया।

Posted By: Jagran

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस