पानीपत, जेएनएन। सरकार जीटी बेल्‍ट से बनती है, इस बात में कोई दोराय नहीं। एक बार फिर हरियाणा की जीटी रोड बेल्ट से सत्‍ता का रास्‍ता साफ दिखाई दे रहा है। हालांकि इस बार ये रास्‍ता सत्‍ता पक्ष के लिए मुश्किल खड़ी कर रहा है। इस बेल्ट पर भाजपा को कांग्रेस के साथ-साथ जजपा से कड़ी चुनौती मिलती नजर आ रही है। ऐसे मेंतीनों पार्टियों के खास प्रत्‍याशियों पर नजरें टिकी हैं। 

2014 के चुनाव में भाजपा सत्ता में आने के बाद अंबाला कैंट से विधायक अनिल विज काफी चर्चित चेहरे रहे। इसके अलावा जगाधरी से प्रत्‍याशी विधानसभा अध्‍यक्ष कंवर पाल की हार-जीत भी खास मायने रखेगी। वहीं अंबाला कैंट से ही पूर्व मंत्री रहे निर्मल सिंह की बेटी चित्रा सरवारा पर भी नजरें टिकी हैं। कांग्रेस से बागी होने के बाद चित्रा निर्दलीय मैदान में उतरीं। 

विधानसभा 2014 में भाजपा ने जीटी रोड बेल्ट में अच्छा प्रदर्शन करते हुए 30 में से 22 सीटों पर जीत हासिल की थी। इनमें से तमाम सीटें कांग्रेस के कब्‍जे में थीं। कांग्रेस ने धीरे-धीरे जीटी बेल्ट पर जनाधार खो दिया। वहीं गुटबाजी के चलते कांग्रेस के लिए भाजपा का किला भेदना बड़ी चुनौती साबित हुआ। जबकि जेजेपी मजबूत तरीके से जनता में पकड़ बनाने में कामयाब रही और इनेलो जनाधार खो बैठी। 

हॉट सीट पर टिकी नजरें

जीटी रोड बेल्ट की हॉट सीटों पर पार्टियों और जनता की नजर है। इन सीटों पर भाजपा, कांग्रेस और जजपा के प्रत्‍याशी जीत का दावा कर रहे हैं। इन प्रत्याशियों के भाग्य ईवीएम में बंद हो चुके हैं। 24 अक्टूबर को तस्वीर साफ होगी कि किसी हॉट सीट पर कौन बाजी मारेगा। इन हॉट सीट में कैथल, उचाना, अंबाला कैंट, करनाल, पिहोवा, थानेसर, जगाधरी, इसराना शामिल हैं। 

इन पर दांव

लोकसभा से लेकर विधानसभा चुनाव में दिल्ली से पेशावर तक जाने वाली जीटी रोड पर हर पार्टी की नजर रहती है। इसराना से भाजपाा के कृष्णलाल पंवार, करनाल से भाजपा केे सीएम मनोहर लाल, थानेसर से भाजपा केे सुभाष सुधा, थानेसर से कांग्रेस के अशोक अरोड़ा, पिहोवा से भाजपा के संदीप सिंह, अंबाला कैंट से भाजपा के अनिल विज, आजाद प्रत्‍याशी चित्रा सरवारा, जगाधरी से भाजपा के कंवरपाल गुर्जर, उचाना से जजपा के दुष्यंत चौटाला, भाजपा की प्रेमलता, कैथल से कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला जीत का दावा कर रहे हैं। 

यहां नहीं कांटे की टक्‍कर

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इन हॉट सीटों में पानीपत शहरी और करनाल को छोड़कर अन्‍य जगह कांटे का मुकाबला है। 

मतदान में भी बेस्‍ट

विधानसभा चुनाव में कुरुक्षेत्र का मतदान जीटी रोड बेल्ट पर सबसे अधिक रहा है। हालांकि यह पिछले चुनाव से काफी कम है लेकिन प्रदेश में छठे नंबर पर है। जीटी बेल्ट में कुरुक्षेत्र नंबर एक पर है। अंबाला, करनाल, पानीपत और सोनीपत यह चार जिले कुरुक्षेत्र से काफी पीछे रहे हैं। धर्मक्षेत्र का मतदान का औसत फीसद 72.27 रहा। दूसरी तरफ प्रदेशभर के आंकड़े देखें तो देहात के जिले मतदान में आगे रहे हैं। शहरी हलकों में मतदाताओं का उत्साह इस बार अपेक्षाकृत कम रहा। यही कारण है कि सिरसा, फतेहाबाद, कैथल, जींद में सबसे ज्यादा मतदान हुआ है। प्रदेश में कोई भी सरकार जीटी रोड बेल्ट की भागीदारी के बिना नहीं बन सकती। मौजूदा भाजपा सरकार के 47 विधायकों में से 22 यहीं से हैं, यानि सरकार में तकरीबन आधा हिस्सा।

2014 में भी सत्‍ता की गाड़ी जीटी बेल्‍ट से निकली 

राजनीतिक रूप से भले ही दक्षिण हरियाणा अधिक सुदृढ़ माना जाता हो लेकिन सत्ता की गाड़ी जीटी रोड से होकर चंडीगढ़ पहुंचती है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल के करनाल से अपना विस चुनाव लड़ने के बाद से 2014 में यह पहला मौका रहा, जब कोई मुख्यमंत्री जीटी रोड के जिले से बना हो। ज्यादातर चौधर रोहतक, सिरसा और भिवानी में ही रही।

कुरुक्षेत्र लोकसभा अव्वल

जीटी रोड से इतर भी अगर बात करें तो कुरुक्षेत्र लोकसभा का मतदान में सबसे अधिक योगदान रहा है। इस संसदीय क्षेत्र के कैथल जिले में 75.61 फीसद मतदान हुआ। यमुनानगर में 74.17 और कुरुक्षेत्र में 72.27 फीसद मतदाताओं ने वोट डाले। प्रदेश के 22 में से 11 जिले 70 प्रतिशत का आंकड़ा पार कर सके।

Posted By: Anurag Shukla

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