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IDFC बैंक घोटाले से भी सबक नहीं, पानीपत की दो पंचायतों ने निजी बैंकों में कराई 225 करोड़ की FD; जांच शुरू

Published: Thu, 17 Sep 2026 11:12 PM (IST)

पानीपत की बाल जाटान और खंडरा ग्राम पंचायतों ने बिना अनुमति 225 करोड़ रुपये निजी बैंकों में सावधि जमा (एफडी) करा दिए, जो सरकारी नियमों का उल्लंघन है।

IDFC बैंक घोटाला। फाइल फोटो

IDFC बैंक घोटाला। फाइल फोटो

HighLights

  1. पानीपत की पंचायतों ने 225 करोड़ रुपये निजी बैंकों में बिना अनुमति जमा किए।

  2. बाल जाटान, खंडरा पंचायतों ने सरकारी धन के नियमों का उल्लंघन किया।

  3. उपायुक्त डॉ. हरीश वशिष्ठ ने इस वित्तीय अनियमितता की जांच शुरू की।

जागरण संवाददाता, पानीपत। आईडीएफसी फर्स्ट बैंक से जुड़े करीब 600 करोड़ रुपये के कथित फ्राड प्रकरण के बाद प्रदेश सरकार ने सरकारी धन को निजी बैंकों में रखने को लेकर नियम सख्त किए थे। जिले की बाल जाटान और खंडरा ग्राम पंचायतों ने तय प्रक्रिया का पालन किए बिना करीब 225 करोड़ रुपये निजी बैंकों में सावधि जमा (एफडी) करा दिए।

दोनों पंचायतों को पंचायती जमीन इंडियन आयल कारपोरेशन लिमिटेड (आईओसीएल) को बेचने के बदले कुल 383.45 करोड़ रुपये मिले थे। एफडी कराने से पहले सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति जरूरी थी। मामला उपायुक्त डा. हरीश वशिष्ठ IDFC बैंक घोटाले से भी सबक नहीं, पानीपत की दो पंचायतों ने निजी बैंकों में कराई 225 करोड़ की FD; जांच शुरूके संज्ञान में आने के बाद जांच के दायरे में है।

दोनों पंचायतों ने करीब 180 एकड़ भूमि आईओसीएल को दी थी। बाल जाटान की लगभग 124 एकड़ जमीन के बदले 277 करोड़ और खंडरा की करीब 56 एकड़ भूमि के एवज में 106.44 करोड़ रुपये मिले। पूरी धनराशि पंजाब नेशनल बैंक के बचत खातों में जमा हुई थी। इसके बाद इसका बड़ा हिस्सा अलग-अलग बैंकों में एफडी के रूप में लगा दिया गया।

करीब 165 करोड़ रुपये चार निजी संस्थानों में रखे गए

दस्तावेज के मुताबिक बाल जाटान की 264.96 करोड़ रुपये की 16 एफडी बनाई गईं। इनमें 10 निजी बैंकों में थीं और करीब 165 करोड़ रुपये चार निजी संस्थानों में रखे गए। इन पर 6.50 से 7.40 प्रतिशत तक ब्याज दर दर्ज है।

वहीं खंडरा की 101.81 करोड़ रुपये की नौ एफडी में करीब 60 करोड़ रुपये दो निजी बैंकों की पांच एफडी में रखे गए। इस तरह दोनों पंचायतों की लगभग 225 करोड़ रुपये की राशि निजी क्षेत्र के बैंकों में पहुंच गई।

18 मई को वित्त विभाग ने जारी किए थे निर्देश

आईडीएफसी फर्स्ट बैंक प्रकरण के बाद वित्त विभाग ने 18 मई 2026 को सरकारी धन की एफडी को लेकर प्रक्रिया तय की थी। इसके तहत अधिकृत बैंकों से ब्याज दरों के कोटेशन लेने, तुलनात्मक विवरण तैयार कराने और सक्षम अधिकारी से प्रस्ताव मंजूर कराने की व्यवस्था की गई थी।

निजी बैंकों में एफडी के लिए भी अनुमति अनिवार्य थी। इसके बावजूद दोनों पंचायतों की ओर से बिना अनुमति एफडी कराने की बात सामने आई है।