पानीपत/करनाल, [अश्विनी शर्मा]। करनाल विधानसभा हरियाणा की इकलौती ऐसी सीट बनकर उभरी है, जहां सिर्फ जोर मतदान फीसद बढ़ाने पर लग रहा है। ऐसा माना जा रहा है कि इस सीट पर जितना अधिक मतदान होगा, सीएम मनोहर लाल की जीत का अंतर उतना ही बड़ा होगा। उनके मुकाबले में विपक्ष बौना है। जबकि चुनौती यह भी है कि जहां पूरे विधानसभा क्षेत्र में यह लहर है कि मनोहर लाल बड़ी जीत दर्ज कर रहे हैं, उससे कहीं मतदान प्रतिशत पर असर न पड़े। लिहाजा सक्रिय तौर चुनाव प्रचार में उतरी पांच हजार कार्यकर्ताओं की टीम पिछले चुनाव की तुलना में मतदान प्रतिशत को बढ़ाना चाहती है। इनका उद्देश्य यह भी सुनिश्चित करना है कि प्रत्येक बूथ पर पिछले चुनाव की तुलना में अधिक मतदान हो। पिछले चुनाव में सीएम मनोहर लाल ने 63 हजार 773 मतों से जीत दर्ज की थी। इस बार लक्ष्य एक लाख से अधिक का है।

मनोहर दूतों की मतदान के हर एंगल पर नजर 

मनोहर दूतों की मतदान के हर एंगल पर नजर है। 2014 के चुनाव में 67.2 प्रतिशत मतदान हुआ था। उस समय दो लाख सात हजार मतदात थे। इन पांच साल में करीब 33 हजार मतदाता बढ़कर करीब दो लाख 40 हजार हुए थे। यानी करीब 15 प्रतिशत वोट बढ़े हैं। अभी भाजपा के पांच हजार कार्यकर्ताओं की टीम इस मतदान प्रतिशत को तीन प्रतिशत अधिक करवाने पर ध्यान दे रही है। यदि इसमें कामयाब हो जाते हैं तो करनाल से एक नया इतिहास बनेगा।  

प्रत्येक बूथ पर मतदान बढ़ाने पर जोर

करनाल विधानसभा में जब सीएम मनोहर लाल की बड़ी जीत की बाद होती है तो यह भी शंका उभरती है कि कहीं मतदान का ग्राफ नीचे न रह जाए। भाजपा के करनाल विधानसभा के चुनाव संचालक अशोक सुखीजा का कहना है कि करनाल विधानसभा में औसत मतदान प्रतिशत 62 फीसद के करीब रहता है। मतदान प्रतिशत को बढ़ाने की दिशा में काम किया जा रहा है। 2014 में 67.2 मतदान हुआ था। उस समय दूसरे, तीसरे व चौथे नंबर के प्रत्याशी ने मिलकर करीब 50 हजार मत हासिल किए थे। अब विपक्ष बिखरा हुआ है। इन 50 हजार मतों का बड़ा हिस्सा भाजपा के पास आ रहा है। मतदान प्रतिशत बढ़ाने को लेकर काम किया जा रहा है। जबकि हम यह मानकर चल रहे हैं कि विपक्ष 20 से 25 हजार मतों के बीच में सिमट जाएगा। प्रत्येक बूथ पर मतदान प्रतिशत बढ़ाने के लिए सजगता से काम हो रहा है।

Posted By: Anurag Shukla

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