जागरण संवाददाता, पानीपत : 11 साल की उम्र से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ा हूं, अब उम्र 85 वर्ष हो गई है। आठवीं कक्षा में था तो पहली बार जेल गया। पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी आरएसएस के प्रचारक थे, तब उनसे कई बार मुलाकात हुई थी। वर्ष 1996 में जब उन्होंने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। इसके कुछ दिन बाद मनाली जाकर उनसे मिला था। उनका व्यक्तित्व अन्य नेताओं से बहुत भिन्न था। वे सहृदयी और मिलनसार थे। लालकृष्ण आडवाणी या समकालीन किसी नेता से उनकी तुलना नहीं की जा सकती। अटल के बताए रास्ते पर ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश आगे बढ़ रहा है। यह बातें सेक्टर 29 पार्ट 2 स्थित दैनिक जागरण के कार्यालय में अटल के दौर वाली राजनीति क्या अब संभव विषय पर हुए जागरण विमर्श में जनसंघ से जुड़े और वरिष्ठ अधिवक्ता रघुवीर ¨सह सैनी ने कही।

उन्होंने बताया कि अटल बिहारी वाजपेयी को वर्ष 1958-59 से जानता हूं। वे जनसंघ के प्रचारक थे और मैं दिल्ली में लॉ की पढ़ाई कर रहा था साथ ही संघ से भी जुड़ा था। उस समय संघ के कार्यालय में उनकी कविताएं भी खूब सुनी जाती थी। पंजाब से हरियाणा के विभाजन के दौरान हुई एक ¨हसा के दौरान एक दुकान जला दी गई थी, 18 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ, मेरा नाम भी शामिल था। दिल्ली जाकर अटल बिहारी वाजपेयी से मिला तो वे मुझे इंदिरा गांधी के पास ले गए और पैरवी की लेकिन वहां से खास मदद नहीं मिली।

वाजपेयी दृढ़ निश्चयी और अपनी बात पर अटल रहते थे। यही कारण रहा कि दोबारा प्रधानमंत्री बनने पर पोखरण में मिसाइल का परीक्षण हो सका। अटल और आडवाणी, ज्यादा मिलनसार कौन? इस पर सैनी ने कहा कि दोनों के प्रसंशकों की कमी नहीं है लेकिन लोग अटल को ज्यादा मिलनसार मानते थे। वैचारिक प्रतिबद्धता रखते हुए भी वे विरोधियों के प्रति उदार रहते थे।

अब ऐसा कौन नेता है? इस पर सैनी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम लेते हुए कहा कि ये भी किसी से बैर नहीं रखते। अटल भी देश के विकास की बात करते थे मौजूदा पीएम भी ऐसा ही कर रहे हैं।

अब लोकसभा में पप्पू और शहजादा जैसे शब्द बोले जाते हैं, अटल होते तो क्या होता? इस पर उन्होंने कहा कि अब पंडित जवाहर लाल नेहरू और लाल बहादुर शास्त्री जैसे विपक्षी भी तो नहीं हैं। अटल बिहारी के प्रधानमंत्री रहते हुए रसोई गैस सस्ती और सुलभ हुई। मोबाइल फोन का सिम खरीदना भी आसान हो गया था।

कश्मीर मुद्दे पर एडवोकेट रघुवीर सैनी ने कहा कि अटल पडोसी देशों से मित्रता के पक्षधर थे, इसलिए पाक जाकर जनरल मुशर्रफ से मिले थे, मौजूदा पीएम ने भी ऐसा प्रयास किया है। राजनीतिक और सामाजिक चरित्र ऐसा था कि विश्व पटल पर अटल को बहुत सम्मान मिलता था, देश-विदेश और पक्ष-विपक्ष में उनको सुना जाता जाता था। परिचय :

नाम : रघुवीर ¨सह सैनी

पेशा : एडवोकेट

आवास : सुखदेव नगर

सामाजिक जुड़ाव : संघ और पतंजलि

राज्य सदस्य : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, संपर्क विभाग

Posted By: Jagran