जागरण संवाददाता, पानीपत : स्वास्थ्य विभाग की ओर से सिविल अस्पताल में थैलेसीमिया से बचाव एवं रोकथाम अभियान के तहत सेमिनार का आयोजन हुआ।इसमें सरकारी और इंडियन मेडिकल एसोसिएशन,पानीपत से जुड़े चिकित्सकों ने हिस्सा लिया।

अध्यक्षता करते हुए सिविल सर्जन डॉ. जितेंद्र कादियान ने कहा कि माता-पिता थैलेसीमिया से पीड़ित हैं तो उनकी होने वाली संतान रोग का रोग ग्रस्त होने की 25 फीसद संभावना रहती है। गर्भकाल के दौरान जांच जरूरी है ताकि संतान को रोग ग्रस्त होने से बचाया जा सके। कार्यक्रम की जिला नोडल अधिकारी एवं डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. शशि गर्ग ने बताया कि नौ हजार गर्भवती महिलाओं ने थैलेसीमिया जांच करायी, कोई पॉजिटिव नहीं मिली है। उन्होंने कहा कि शादी से पहले लड़का-लड़की थैलेसीमिया जांच अवश्य कराएं। कोई बच्चा रोग से पीड़ित मिलता है तो उसे इलाज के लिए सिविल अस्पताल भेजें। सरकार की ओर से मरीजों की फ्री बस पास दिया जाता है। डॉ. सोनिया कुंडू ने कहा कि सिविल अस्पताल में मरीजों की जांच और रेडक्रॉस से ब्लड निश्शुल्क मिलता है। जिले में करीब 80 मरीज बताए गए हैं।

इस मौके पर डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. सुनील संडूजा, डॉ. ललित वर्मा, एमएस डॉ. आलोक जैन, आइएमए की अध्यक्ष डॉ. अंजलि बंसल, डॉ. शबनम बतरा, डॉ. राकेश कालरा, डॉ. जगजीत आहूजा, डॉ. प्रवीन मल्होत्रा आदि मौजूद रहे। थैलेसीमिया के लक्षण

-चेहरा सूखना।

-लगातार बीमार रहना

-वजन न बढ़ना।

-चिड़चिड़ापन।

-भूख न लगना।

-शारीरिक विकास धीमा।

Posted By: Jagran

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