जींद, [कर्मपाल गिल]। समाज में आम धारणा है कि हार्ट अटैक आने के चांस 50 साल से ऊपर के लोगों में ज्यादा होते हैं। अब आप इस धारणा को बदल लीजिए। जींद जिले के विकास की उम्र 28 साल और कैथल के अभिलाष की उम्र 29 साल है। इन दोनों को बीते दिनों हार्ट अटैक आ चुका है। 50 से कम उम्र के लोगों की नसें भी ब्लाक हो रही हैं और उन्हें स्टंट डलवाना पड़ रहा है। जाड़ों में हार्ट अटैक आने व नसें ब्लाक होने का खतरा ज्यादा रहता है, इसलिए अगले कुछ महीने अपने दिल को संभालकर रखें।

नसों के ब्लाक होने और हार्ट अटैक आने का सबसे कारण लोगों की गलत जीवनशैली को माना जा रहा है। जंक फूड का अधिक मात्रा में सेवन, धूम्रपान करना और खेती में केमिकल्स का ज्यादा प्रयोग करने से भी हार्ट के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। अब सबसे ज्यादा चिंताजनक बात जवान बच्चों को भी हार्ट अटैक आने की है। जींद के 43 साल के बिजेंद्र, 36 साल के दिनेश, रजाना कलां के 40 साल के सुमेर व पिल्लूखेड़ा के धीरज अभी जवान हैं। इन सबको बीते दिनों नसें ब्लाक होने पर स्टंट डलवाना पड़ा है। मुख्यमंत्री के मीडिया एडवाइजर 48 वर्षीय अशोक छाबड़ा को भी पांच दिन पहले स्टंट डलवाना पड़ा।

जानिए क्‍या कहते हैं विशेषज्ञ

जींद के हृदय रोग विशेषज्ञ डा. धनंजय कुमार कहते हैं कि हार्ट अटैक में उम्र का कोई बैरियर नहीं है। यह सही है कि ज्यादातर केसों में 50-60 साल पार कर चुके लोगों को हार्ट अटैक आता है, लेकिन यह किसी भी उम्र के लोगों को हो सकता है। पहले मेडिकल सुविधाएं ज्यादा नहीं थी। इसलिए कह देते थे कि थोड़ा सा कमर, छाती या बाजू में दर्द हुआ और मौत हो गई। अब हम ईसीजी, इको, टीएमटी, होल्टर, एंजियोग्राफी, एंजियोप्लास्टी, पेसमेकर जैसी आधुनिक मेडिकल सुविधाओं से बीमारी को तुरंत पकड़ लेते हैं और समय पर इलाज हो जाता है।

हार्ट अटैक की ये बड़ी वजह

डा. धनंजय बताते हैं कि हार्ट अटैक व नसें ब्लाक होने के कई कारण हैं। इनमें पहला बड़ा कारण वंशानुगत माना जाता है। इसलिए जिन लोगों को पीढ़ीगत यह समस्या हो, उन्हें सबसे ज्यादा जोखिम रहता है। दूसरा बड़ा कारण बीड़ी, सिगरेट व हुक्का आदि धम्रपान करना है। इनका धुआं नसों के अंदर जमता रहता है, जिससे खून बहने के लिए जगह कम होती जाती है और नसें ब्लाक हो जाती हैं। शारीरिक व्यायाम न करने और सही डाइट लेने के कारण भी हार्ट अटैक के केस बढ़ रहे हैं।

ठंड में सिकुड़ जाती हैं नसें

हृदय रोग विशेषज्ञ डा. सुमित खर्ब कहते हैं कि ठंड में नसों में सिकुड़ जाती हैं। व्यायाम न करने से नसों में ऐंठन व सिकुडऩ ज्यादा बढ़ती है। इसलिए हर रोज सुबह के समय कम से कम आधा घंटा वर्कआउट जरूर करें। सर्दियों में ठंडी चीजें खाने से बचना है। सलाद व फलों का ज्यादा सेवन करना है। दाल व दही का सेवन ज्यादा करना है। अंडा भी खा सकते हैं। पानी या दूध को गर्म करके पीना है।

अचानक अटैक अचानक होता है दर्द

हार्ट अटैक आने से पहले शरीर किस तरह प्रतिक्रिया देता है, इस बारे में ज्यादातर लोगों को जानकारी नहीं है। हृदय रोग विशेषज्ञ डा. संदीप मलिक बताते हैं कि हार्ट अटैक में अचानक छाती में दर्द होगा। यह दर्द कालजे से लेकर गले तक छाती में दोनों तरफ कहीं भी हो सकता है। बाजुओं में भी दर्द हो सकता है। यह दर्द कमर में नहीं होगा। जब नसें ब्लाक होना शुरू होती हैं तो उसके शुरुआती लक्षणों में तेज चलने-फिरने में व सीढ़ी चढऩे में सांस फूल सकता है। चलते-चलते बैठना पड़ता है। हाथों में भी दर्द हो सकता है। ठंड के दिनों में अलसुबह नसें सिकुडऩे से ज्यादा अटैक के चांस ज्यादा होते हैं। हाई कोलेस्ट्रोल से भी अटैक आ सकता है। मोटापा भी हार्ट अटैक होने का कारण है। मोटे लोगों की नसें जल्दी ब्लाक होती हैं।

हार्ट अटैक व नसों ब्लाक होने से ऐसे बचें

हार्ट अटैक होने व नसें ब्लाक होने से बचने के लिए लोगों को अपने खानपान व व्यवहार में बदलाव करना होगा। जींद हार्ट अस्पताल के हृदय रोग विशेषज्ञ डा. सुमित खर्ब बताते हैं कि मोटे व्यक्तियों को वजन कम करने का प्रयास करना चाहिए। रोज आधा से एक घंटा तक पैदल चलना व व्यायाम करना चाहिए। बीड़ी, सिगरेट सहित सभी तरह कर धूम्रपान पूरी तरह छोड़ देना है। फास्ट फूड बंद करना है। फल व सब्जियां ज्यादा लेनी हैं। हाई कार्बोहाइड्रेट वाली चीजें जैसे बर्गर, समोसा, कचोरी को कम खाना है। शुगर है तो उसे कंट्रोल करना होगा। जिसकी फैमिली में हार्ट अटैक की हिस्ट्री है तो उसको शुरू से इन सभी चीजों पर ध्यान देना होगा। बीपी है तो उसकी दवाएं लगातार लेनी होंगी। कई स्टडी में बताया गया है कि घी का सेवन भी कम करना चाहिए।

युवाओं का लाइफ स्टाइल 20 साल में यूं बदला

युवाओं की लाइफ स्टाइल पिछले 20 किस तरह बदली है, इस बारे में डा. धनंजय अपना खुद का उदाहरण देते हुए बताते हैं कि वर्ष 2002 में जब उन्होंने रोहतक पीजीआई से एमबीबीएस शुरू तो शहर में एक भी पिज्जा व बर्गर की दुकान नहीं थी। रेस्टोरेंट गिनती के होते थे। सभी स्टूडेंट होस्टल से कालेज में पैदल जाते थे। 120 के बैच में मात्र पांच स्टूडेंट के पास बाइक थी। किसी के पास फोन नहीं होता था। मैस में खाना खाने जाते थे। दो बार कालेज पैदल आना-जाना हो जाता था और खेलकूद कर लेते थे। इसी में पूरा व्यायाम हो जाता था। अब ये सभी काम बंद हो गए हैं। अब सबके कमरों में टीवी, लैपटाप है। खाने के लिए आर्डर पर पिज्जा आ जाता है। 120 बच्चों में से 100 के पास बाइक है, बाकी के पास कार है। आराम की जिंदगी हो गई है। इसी कारण कई तरह की बीमारियां बढ़ रही हैं। अब कोई पांच मिनट के लिए भी पैदल नहीं चलते। थोड़ी सी दूर जाना हो तो भी बाइक या कार में जाते हैं।

हार्ट अटैक में सावधानी ही सबसे बड़ा इलाज

हार्ट अटैक से बचने के लिए सावधानी ही सबसे बड़ा इलाज है। समय पर चेकअप कराते रहें। 30 साल के बाद साल-दो साल में एक बार ईसीजी, हीमोग्लोबिन, किडनी फंक्शन टेस्ट, शुगर, कोलेस्ट्राल का टेस्ट जरूर करवाना है। जिनकी फैमिली हिस्ट्री स्ट्रांग है, उन्हें तो यह टेस्ट जरूर करवाने ही चाहिए। शुगर पीडि़त को हर साल टेस्ट करवाने चाहिए। छाती में दर्द होने पर जरूर डाक्टर के पास जाना चाहिए। शुगर पीडि़त को कई बार दर्द नहीं होता, उनका सांस फूलेगा और घबराहट बढ़ेगी। महिलाओं में जी मिचल सकता है, उलटी आ सकती है।

-डा. धनंजय कुमार, हृदय रोग विशेषज्ञ, जींद

Edited By: Anurag Shukla