कैथल, जागरण संवाददाता। सरकार के आदेशों के तहत कोरोना महामारी के बाद स्कूल खोल दिए गए हैं। शिक्षा विभाग की मिड डे मील योजना के तहत बच्चों के शारीरिक एंव मानसिक विकास के लिए दोपहर का भोजन दिया जाता है। इस योजना में कोरोना काल में बच्चों को डोर-टू-डोर जाकर सूख राशन वितरित किया जा रहा है। जबकि इसके बनाने में खर्च होने वाली राशि को बैंक खातों में डाला जा रहा है। मिड डे मिल योजना के तहत सरकार द्वारा मौलिक शिक्षा विभाग को जिला स्तर पर राशन के लिए हर तीन माह बाद अलग से बजट दिया जाता है।

अप्रैल मई में कोरोना महामारी की दूसरी लहर आने के कारण यह बजट जारी नहीं हो सका था, जो हाल ही में जारी किया गया है। इसके तहत राशन में चावल और गेंहू व दाल और सूखा दूध के पैकेट वितरित किए जाते हैं। परंतु इस बार दूध का टेंडर अभी तक जारी नहीं किया गया है। जिससे बच्चों को दूध वितरित नहीं किया जा रहा है। जबकि मिड डे मील योजना में बच्चे को एक माह में एक किलो सूखा दूध देने का नियम है। बता दें कि सूखा दूध के वितरण को लेकर विभाग द्वारा अलग से टेंडर किया जाता है। जो इस साल अभी तक नहीं हो पाया है।

स्कूल तो खुले, मिड डे मील योजना में पूरा नहीं मिल रहा राशन

शिक्षा विभाग द्वारा स्कूल तो खोल दिए गए हैं, लेकिन मिड डे मील योजना के तहत राशन पूरा नहीं दिया जा रहा है। जिसमें विद्यार्थियों के मानसिक विकास के लिए शुरू किया सूखे दूध का वितरण नहीं किया जा रहा है। हालांकि अब स्कूल खुलने के बाद योजना के तहत अन्य राशन सामग्री तो बच्चों को दी जा रही है।

मिड डे मील योजना के तहत राजकीय स्कूल में पढ़ने वाले पहली से आठवीं के हर बच्चे को राशन वितरित किया जा रहा है। दूध का टेंडर जिला स्तर पर नहीं, बल्कि निदेशालय स्तर पर लगाया जाता है। जैसे ही आला अधिकारियों द्वारा दिशा निर्देश जारी किए जाएंगे, उसी अनुसार कार्य किया जाएगा।

Edited By: Anurag Shukla