अंबाला, [दीपक बहल]। रेलवे की ओर से जारी होने वाले टाइम टेबल में हजारों स्टेशनों पर ट्रेनों का ठहराव बंद होने जा रहा है। रात्रि 11 बजे से लेकर चार बजे तक जिन स्‍टेशनों पर यात्रियों की संख्या कम है, उन स्टेशनों की सूची तैयार की गई है। इन स्टेशनों पर ट्रेनों का ठहराव बंद कर दिया जाएगा। इसके अलावा जिन ट्रेनों में यात्रियों की संख्या भी कम है, उन ट्रेनों का रूट बदल जाएगा। इनमें ह‍रियाणा व पंजाब से गुअन्य ट्रेनों की स्पीड बढ़ाने और घाटे में चल रही रेलवे को उबारने के लिए इस तरह का फैसला लिया गया है। राहत की बात यह है कि जो पैसेंजर ट्रेनें हैं उनको मेल एक्सप्रेस का दर्जा दिया जाएगा। ट्रेन के एक स्टेशन पर रुकने और फिर चलने में 7600 से 9000 रुपये का खर्च आता है।

नए टाइम टेबल में कई रेलगाडिय़ों को मिलेगा मेल एक्सप्रेस का दर्जा

इंडियन इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलॉजी मुंबई (आइआइटी) और इंडियन स्पेस रिसर्च आर्गेनाइजेशन (इसरो) बेंगलुरु को टाइम टेबल बनाने का जिम्मा दिया गया है। रेल मंत्रालय ने देश के सभी मंडलों से रिपोर्ट मांगी है। इसमें किस स्टेशन पर क्या ठहराव, कितने यात्री उतरे, क्या आमदनी या खर्च हुआ, कितनी टिकट बुक हुई आदि का ब्योरा देना है। मौजूदा समय कोरोना काल के कारण चुङ्क्षनदा ट्रेनों को छोड़कर सिर्फ स्पेशल ट्रेनें ही नंबर बदलकर पटरी पर दौड़ रही हैं।

ट्रेनों का ठहराव कम होने से बढ़ेगी स्पीड, मंडल से भेजी रिपोर्ट पर माथापच्ची शुरू 

माना जा रहा है कि मार्च 2021 तक स्पेशल ट्रेनों का दर्जा वाली ट्रेनें ही पटरी पर दौड़ेंगी। इसलिए रेल अधिकारी चाहते हैं कि सन 2021-22 का टाइम टेबल अप्रैल तक तैयार हो जाए। ताकि सेंटर फार रेलवे इंफार्मेशन सिस्टम (क्रिस) को उन ट्रेनों की सूची दे दी जाए, जिनका ठहराव बंद किया जाएगा। इसके बाद क्रिस साफ्टवेयर को अपडेट करेगा, ताकि स्टेशनों से संबंधित ट्रेनों की टिकट जारी हो सके। इसको लेकर रेलवे अधिकारियों में माथापच्ची शुरू हो गई है।

इन ट्रेनों को मिलेगा मेल एक्सप्रेस का दर्जा

पैसेंजर ट्रेनों को रेलवे मेल एक्सप्रेस का दर्जा देने के प्रस्ताव पर मुहर लगा चुकी है। कालका से नई दिल्ली के बीच जाने वाले ट्रेन नंबर 54304 और बठिंडा से अंबाला आने वाली 54306 को मेल एक्सप्रेस का दर्जा दिया जा रहा है। इसके अलावा कुछ ट्रेनें ऐसी भी चिन्हित की गई हैं, जिसमें यात्रियों की संख्या ही कम है। ऐसे में उन रूटों पर ट्रेनों को बंद या दो से तीन सप्ताह तक चलाया जा सकता है।

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