पानीपत [उमेश त्यागी]। बेटियों को मौका मिले तो हर क्षेत्र में आगे निकल सकती हैं। जलालपुर की बेटियों ने वालीबाल में एक के बाद एक मेडल जीतकर ये साबित भी कर दिया। कोई किसान, कोई दूध बेचने और कोई आटो चालक की बेटी है, पर हौसला किसी से कम नहीं।

इनकी वजह से दूसरी बेटियां प्रेरित हो रही हैं। आसपास के पांच गांवों के अलावा उत्तर प्रदेश के मेरठ, बागपत, शामली से भी 15 बेटियां अभ्यास करने नवज्योति माडल स्कूल की खेल नर्सरी में पहुंचने लगी हैं। कई महीने बाद सरकारी खेल नर्सरी में 85 लड़कियां रोजाना अभ्यास कर रही हैं। कोच आनलाइन अभ्यास कराते हैं तो स्कूल के इशम सिंह व बिजेंद्र निशुल्क ट्रेनिंग देते हैं।

दूध बेचते हैं पारूल के पिता

नेशनल टीम की खिलाड़ी पारूल के पिता मित्रपाल दूध बेचते हैं। पारूल ने खेलना शुरू किया तो लोगों ने उन पर ताने कसे, पर उन्होंने परवाह नहीं की। बेटी को मैदान पर भेजा। पारूल ने मेडल जीतकर ताने देने वालों को जवाब दे दिया।

पारूल।

किसान हैं शिवानी के पिता

खिलाड़ी शिवानी के पिता बिजेंद्र किसान हैं। बेटी को वालीबाल खेलने का शौक है। बेटी को प्रोत्साहित किया। उसने प्रदेश में गांव का नाम रोशन किया है। बेटों और बेटियों में फर्क नहीं समझना चाहिए।

शिवानी।

आटो रिक्‍शा चलाते हैं कीर्ति के पिता

कीर्ति के पिता दिनेश कुमार ने बताया कि वह आटो रिक्शा चलाते हैं। बेटी को आगे बढ़ने से नहीं रोका। कीर्ति की वजह से अब लोग उन्हें जानने लगे हैं।

कीर्ति।

मजदूर हैं अन्‍नू के पिता

खिलाड़ी अन्नू के पिता सतपाल मजदूर हैं । उनकी बेटी ने प्रदेशस्तर पर मेडल जीता है। उन्हें अपनी बेटी पर गर्व है।


अन्नू।

सरकारी कोच आनलाइन देते हैं ट्रेनिंग

स्कूल संचालक राजेश शर्मा ने बताया कि उन्हें सरकार की ओर से कोच मिला है, जो आनलाइन सिखाते हैं। इसके अलावा दो कोच स्कूल में हैं। जरूरतमंद बेटियों को निशुल्क ट्रेनिंग देते हैं। उनके यहां बेटियां नेशनल स्तर पर गोल्ड मेडल जीत चुकी हैं। 

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