पानीपत, जेएनएन। पौत्री को गोद में लेने के बाद दादी के आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे थे। वह पौत्री को लिपटाकर रो रही थी और वहां मौजूद लोग उसे देखकर खुद के आंसू नहीं रोक सके। वह चिल्ला रही थी कि अब पौत्री को देखकर कम से कम जिंदा रह सकूंगी। जानिए क्या है वजह।

हाई कोर्ट के आदेश पर एक साल की मासूम मानसी (परिवर्तित नाम) को आखिरकार करनाल जेल में बंद दादी रामरती के सुपुर्द कर दिया गया। छह माह बाद जैसे ही मासूम उसकी गोद में पहुंची तो आंखों से आंसू छलक गए। सुबकते हुए वह सिर्फ इतना कह सकी कि जेल में रहकर दिन-रात पौत्री की चिंता सताती थी। अब वह गोद में सोएगी तो जेल में रहने के कष्ट भी सह लूंगी। 

नहीं भूली दादी को
बाल कल्याण समिति की सदस्य किरण मलिक ने बताया कि मासूम मानसी अपनी दादी का चेहरा लगभग भूल चुकी थी। इसके बावजूद, वह रामरती की गोद में ऐसे खेलने लगी जैसे कुछ मनचाहा मिल गया हो।  

बहू की हत्या का लगा आरोप
सोनीपत के मुरथल निवासी कोमल की शादी दिसंबर 2015 को छाजू गढ़ी निवासी नवीन पुत्र रणधीर के साथ हुई थी। शादी के बाद उसने बेटी को जन्म दिया। 8 मई 2018 को उसकी संदिग्ध अवस्था में मौत हो गई थी। मृतका के पिता नरेश पति नवीन, ससुर रणधीर और सास रामरति पर जहर देकर मारने का आरोप लगाया था। समालखा थाना पुलिस ने पति और ससुर को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। जून माह में दादी रामरती की गिरफ्तारी से मानसी अकेली रह गई थी। 

दादी की मांग पर कोर्ट ने दिया आदेश
दादी की मांग पर हाई कोर्ट ने एसपी पानीपत और संबंधित सीसीआइ (चाइल्ड केयर इंस्टीट्यूशन) के नाम करीब 12 दिन पहले आदेश कर दिए थे। आदेशों पर अमल करते हुए बच्ची को जेल पहुंचाया गया है। किरण मलिक के साथ एसआइ रामदिया, सिपाही मंजू भी साथ रहे।  

लावारिस मिला बच्चा अस्पताल से डिस्चार्ज 
अक्टूबर माह में उरलाना कलां स्थित गुरुद्वारा के प्रवेश द्वार के पास लावारिस मिला दो दिन के नवजात को सिविल अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया। बाल कल्याण समिति ने मासूम को कैथल स्थित शिशु गृह पहुंचाया है। बता दें कि बच्चे के रोने की आवाज सुनकर गुरुद्वारा के ग्रंथी सुच्चा सिंह ने एक पेड़ के पास से उसे उठाया था। बच्चा अर्धनग्न हालत में था। तभी से वह अस्पताल के एसएनसीयू वार्ड में एडमिट था।

Posted By: Ravi Dhawan