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पानीपत, [अरविन्द झा]। सर्दी के सीजन में शॉल का बाजार मंदा है। जानकार थोड़ी हैरानी जरूर हुई होगी। लेकिन ये सच है। इस बार होलसेल से लेकर खुदरा कारोबार प्रभावित हैं। मार्केट में मांग कम है। शॉल विक्रेता अब धुंध छाने का इंतजार कर रहे हैं। उधार पर लिए माल का पैसा तभी होलसेलर को चुकता कर सकेंगे। 

शॉल उत्पादकों के लिए सितंबर से नवंबर महीने तक का सीजन बेहतर माना जाता है। जीटी रोड बेल्ट में औद्योगिक शहर पानीपत में कंबल और शॉल का अच्छा खासा मार्केट है। मिंक और पोलर सहित अन्य प्रकार के कंबलों का उत्पादन पानीपत में होता है। थोक विक्रेता शॉल अमृतसर और लुधियाना से मंगाते हैं। छोटे व्यापारी इनसे माल उठाकर बेचते हैं। पेट्रोल और डीजल के दामों में उतार चढ़ाव का असर इस बार शॉल मार्केट में दिख रहा है। पानीपत में 116 रिटेल शॉप हैं, जहां शॉल बिकता है। नवंबर माह में ठंड नहीं पडऩे से शॉल की बिक्री काफी कम हुई है। दुकानदारों की मानें तो इस महीने का दूसरे पखवाड़ा बिजनेस में पूरी तरह से फ्लॉप रहा है।

महज एक-दो गाड़ी माल की खपत 
अमृतसर और लुधियाना से आमतौर पर प्रतिदिन 7-8 गाड़ी माल आता था। सर्दी न पडऩे से अब एक-दो ट्रक ही माल आ रहा है। 2017 के नवंबर माह के मुकाबले बिक्री पूरी तरह से प्रभावित है। 5-7 दिन और धुंध नहीं पड़ी तो सर्दी का ये सीजन बेकार जाएगा। दुकानदार के लिए खर्चा निकालना भी मुश्किल होगा। 

औसतन 20-25 लाख की सेल 
शॉल एसोसिएशन के प्रधान अशोक नारंग ने बताया कि तीन महीने कंबल बेच कर दुकानदार पूरे साल का खर्चा निकालता है। नवंबर के प्रथम पखवाड़े में कुछ बिक्री हुई। उम्मीद थी कि सीजन ठीक निकलेगा, लेकिन दूसरा पखवाड़ा पूरी तरह से फ्लॉप हो गया। मॉल मंगाने की कोई हिम्मत नहीं जुटा रहा है। 20 से 25 लाख रुपये प्रतिदिन का सेल घट कर 2-2.50 लाख रह गया है।

Posted By: Ravi Dhawan

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