जागरण संवाददाता, पानीपत : सेक्टर 29 थाना क्षेत्र में 11 साल के बच्चे हैवानियत मामले में एससी-एसटी एक्ट की धारा जोड़ने को लेकर कॉलोनीवासियों ने थाने का घेराव किया। मामला तूल पकड़ता देख डीएसपी सिटी विजेंद्र सिंह मामला शांत कराने सुबह 10:50 बजे थाने पहुंचे। स्वजनों के संग मौजूद एडवोकेट ने उन्हें घेर लिया और कानूनी धाराओं का हवाला देकर सवाल दागने शुरू कर दिए। कैमरा सामने आते ही उन्होंने डीएसपी विजेंद्र को दलित विरोधी बताते हुए प्रशासन फेल होने की नारेबाजी शुरू कर दी।

मामला बिगड़ता देख डीएसपी ने धाराएं जोड़ने के बारे में लिखित शिकायत मांगी तो एडवोकेट भड़क गए। वीडियोग्राफी के आधार पर आरोपित के खिलाफ दर्ज मुकदमे में धारा जोड़ने की मांग की। डीएसपी ने थोड़ा दबाव बनाया तो एडवोकेट ने डीएसपी विजेंद्र को अपना जमीर जगाकर गरीबों की सुनवाई करने तक की बात कह दी। कैमरे से बचने के लिए डीएसपी उन्हें थाने के अंदर ले गए। लगभग आधे घंटे बाद ही बच्चे का पिता बाहर आया और डीएसपी पर भी सुनवाई नहीं करने का आरोप लगाया। कुछ महिलाओं ने काले झंडे लहराकर प्रशासन विरोधी नारे लगाते लगाए। पुलिस प्रशासन पर भ्रष्ट होने का आरोप लगाया। लगभग साढ़े चार घंटे तक चले हंगामे के बाद डीएसपी ने आरोपित के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट की धारा जोड़ने, बच्चे की मेडिकल जांच, काउंसिलिग और 164 के बयान करने पर सहमति बनी। पिता ने दी आत्मदाह की चेतावनी, बाइक से निकालने लगे पेट्रोल

दोपहर एक बजे तक डीएसपी ने स्वजनों की बात नहीं मानी तो नाराज पिता का सब्र टूट गया। सुबह से शहर छोड़ने की बात कह रहे पिता ने थाने में ही परिवार सहित आत्मदाह करने की चेतावनी दे डाली। बाइक का पेट्रोल निकालने के लिए चल पड़ा तो परिवार के अन्य सदस्य भी साथ चल पड़े। कॉलोनीवासियों ने किसी तरह उसे शांत कराया। नाराज कॉलोनीवासियों ने परिवार को इंसाफ दिलाने की मांग की। फेसबुक पर किया लाइव

पीड़ित के बड़े भाई ने फेसबुक पर थाने के हालातों को लाइव चलाया तो सोशल मीडिया यूजर्स ने भी खूब भड़ास निकाली। ऑनलाइन यूजर्स ने पुलिस पर गरीबों की सुनवाई नहीं करने और थानों के भ्रष्टाचार का अड्डा बनने तक के कमेंट किए। कुछ यूजर्स ने पुलिस पर गरीबों को समझौते के लिए मजबूर करने का आरोप लगाया तो कुछ ने मिलीभगत कर आरोपितों को छोड़ने तक के दावे किए। छोटी बहन ने बताया, भाई को पीटते हैं युवक

पीड़ित की छोटी बहन अक्सर घर में कहती थी कि उसके भाई को कुछ बड़े लड़के पीटते हैं, लेकिन परिवार ने बच्ची की बातों को नजर अंदाजकर दिया। घर में रुपये चोरी की घटनाएं बढ़ी तो परिवार में तनाव रहने लगा। छह माह में लगभग दो लाख रुपये का आर्थिक नुकसान होने के कारण परिवार के सदस्य आपस में बातचीत करने से भी कतराने लगे थे। परिवार को इसका मलाल है।

Posted By: Jagran

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस