पानीपत, जेएनएन। शहर की सरकार में सीनियर और डिप्टी मेयर की कुर्सी सरकार के फैसले पर फंसी हुई है। 10 महीने में तीन चुनाव होने के बाद भी पार्षदों को यह कुर्सी नहीं मिल पा रही है। विधानसभा चुनाव के बाद पार्षदों में कोतूहल मच गया है। वे कुर्सी के लिए अब से पहले जुगाड़ में लग गए हैं। 

नगर निगम का नया हाउस दिसंबर महीने में गठित हुआ था। इस बार मेयर का चुनाव प्रत्यक्ष रूप से किया था। इसके बाद सीनियर व डिप्टी मेयर का चुनाव करना था। नियमानुसार चुनाव के 60 दिन तक इनका चयन करना जरूरी है। अधिकारियों ने नियमों की पालना करते हुए एक बार बैठक बुलाई, लेकिन भाजपा के ही पार्षद नहीं पहुंचे। ऐसे में चुनाव स्थगित कर दिया था। 

तीन चुनावों ने अटकाई कुर्सी 

सीनियर और डिप्टी मेयर की कुर्सी प्रदेश में गत 10 महीने में हुए तीन चुनावों ने अटका कर रखी हैं। पहले जींद विधानसभा का उप चुनाव हुआ। उस वक्त सरकार का सारा ध्यान उस तरफ था। इसके बाद लोकसभा चुनाव की तैयारी तेज कर दी। भाजपा प्रदेश में 10 सीटों पर जीतकर आगे आई। पार्षदों की इसके बाद उत्सुकता बढ़ गई। सरकार विधानसभा चुनाव से पहले इसके लिए खेल बिगाडऩा नहीं चाहती थी। ऐसे में पार्षदों को चुनाव में मेहनत करने की सलाह दी गई। 

भाजपा का है सारा सदन 

नगर निगम हाउस में 26 में से 22 पार्षद भाजपा के जीतकर आए थे। बाकी चार पार्षद कांग्रेस समर्थित और निर्दलीय थे। इनमें वार्ड-14 से शकुंतला गर्ग, वार्ड-15 की सुमन छाबड़ा, वार्ड-18 के बलराम मकोल व वार्ड-22 से चंचल डावर थी। चारों पार्षदों ने विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा को समर्थन दे दिया। अब भाजपा में ही दो कुर्सियों के लिए एक दर्जन पार्षद लाइन में हैं। ये पार्षद अपने-अपने स्तर पर नेताओं के साथ संपर्क में लगे हुए हैं। 

Posted By: Anurag Shukla

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