पानीपत, जेएनएन। राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान में आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय डेयरी मेले में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के उप महानिदेशक डॉ. एके सिंह ने विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कृत किया। उन्होंने किसानों को खेती का एकीकृत मॉडल अपनाने की सलाह देते हुए एनडीआरआइ से इसमें मदद करने की अपेक्षा की। किसानों को पशुओं की देसी नस्लें अपनाने के लिए प्रेरित करते हुए उन्होंने वैज्ञानिकों से कहा कि वे दूध का उत्पादन बढ़ाने के तरीके उन्नत करने का प्रयास करें। 

एनडीआरआइ परिसर में आयोजित मेले के अंतिम दिन बड़ी संख्या में पशु और पशुपालक मौजूद रहे। इनमें हरियाणा से लेकर पंजाब, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, राजस्थान सहित अन्य राज्यों से आए पशुपालक भी शामिल रहे। समापन समारोह में मुख्य अतिथि आइसीएआर के डीडीजी डॉ. सिंह ने विजेताओं को पुरस्कार दिए। उन्होंने आयोजन में शामिल किसानों एवं प्रदर्शकों की सराहना की।

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डॉ. सिंह ने कहा कि देश में डेयरी विकास की अलख जगाने में एनडीआरआइ का अहम योगदान है। डेयरी में किसान की आय बढ़ाने की क्षमता है। खासकर सीमांत या भूमिहीन किसान इसका लाभ ले सकते हैं। उन्होंने किसानों को खेती का एकीकृत मॉडल अपनाने और एनडीआरआइ से इसमें मदद के लिए कहा। पशुओं की देसी नस्लें अपनाने पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि ये नस्लें भारतीय परिस्थितियों के अनुकूल हैं। उन्होंने वैज्ञानिकों से कहा कि इन नस्लों और इनसे दूध की पैदावार बढ़ाने के तरीके उन्नत करें। 

एनडीआरआइ के निदेशक डॉ. मनमोहन सिंह चौहान ने कहा कि ईनाम जीतना ही जरूरी नहीं है, बल्कि किसी प्रतियोगिता में भाग लेना बड़ी उपलब्धि है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने के मिशन में डेरी सेक्टर तथा इंटीग्रेटेड कृषि की अहम भूमिका है। किसानों को अब डेयरी उद्यमी बनना चाहिए। उन्होंने किसानों को एनडीआरआइ में उपलब्ध सुविधाओं का लाभ उठाने की सलाह दी। डॉ. ङ्क्षसह ने कहा कि अध्ययन ने संकेत दिया है कि एक किसान को डेयरी व्यवसाय का लाभ पाने के लिए कम से कम 80 पशु रखने चाहिए।

एनडीआरआइ के संयुक्त निदेशक डॉ. एके त्यागी ने बताया कि मेले में दस हजार से अधिक किसानों ने भाग लिया। उन्होंने सबका और खासकर कृषक महिलाओं का उत्साहवर्धन किया। आयोजन सचिव डा. केएस कादियान ने स्वागत संबोधन और रिपोर्ट प्रस्तुत की। मेले में डॉ. बीएस मीणा, डॉ. सुजीत झा व डॉ. अनुज कुमार आदि मौजूद रहे। संस्थान के बीटेक छात्रों ने नुक्कड़ नाटक अन्नदाता में किसान का जीवन दर्शाया। 

इन्हें मिले पुरस्कार 

मेले में सौंदर्य, दुग्ध उत्पादन व दुग्ध दोहन सहित 10 श्रेणियों में प्रतियोगिताएं हुईं। उच्च दुग्ध उत्पादन की एचएफ संकर नस्ल की श्रेणी में दादूपुर करनाल के प्रदीप की गाय ने 58.86 किलो दूध देकर प्रथम स्थान प्राप्त किया। बारानी खालसा के किसान विजेंदर चौहान की गाय 58.17 किलो दूध देकर द्वितीय व दादुपुर के प्रदीप की गाय 57.65 किलो दूध देकर तृतीय रही। क्रॉस ब्रिड स्पर्धा में अंबाला के किसान जसदीप सिंह की गाय 26.97 किलो दूध देकर अव्वल रही। देसी गाय की दुग्ध उत्पादन स्पर्धा में तरावड़ी के रामसिंह की गाय 21.31 किलो दूध देकर प्रथम, नरेश की गाय 15.81 किलो दूध देकर द्वितीय और करनाल के रामपाल की गाय 15.75 किलो दूध देकर तृतीय रही। मुर्राह भैंस दुग्ध उत्पादन स्पर्धा में असन्ध के रणदीप की भैंस 21.77 किलो दूध देकर पहले और मुंध गांव के कुलदीप की भैंस द्वितीय और कैथल के राकेश की भैंस तृतीय रही।

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वैज्ञानिकों की राय, किसानों की आय दोगुनी करने में डेयरी सेक्टर की अहम भूमिका

भारतीय कृषि अनुुसंधान परिषद के उप महानिदेशक कृषि प्रसार डॉ. एके सिंह करनाल में थे। वे राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान में आयोजित राष्ट्रीय डेयरी मेले के समापन कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि 2022 तक किसानों की आय दोगुना करने में डेयरी सेक्टर सबसे अहम भूमिका निभाएगा। डॉ. सिंह ने पशुपालन के क्षेत्र में हरियाणा के विज्ञानियों और किसानों की ओर से दिए जा रहे योगदान की भरपूर सराहना भी की। उनसे दैनिक जागरण की विशेष वार्ता के प्रमुख अंश। 

पशुपालन को बढ़ावा देने में राष्ट्रीय डेयरी मेले सरीखी गतिविधियों को कितना महत्वपूर्ण मानते हैं ?

निस्संदेह, बहुत महत्वपूर्ण। हरियाणा में पशुपालकों व किसानों तक नवीनतम तकनीक और अनुसंधान की बहुपयोगी जानकारी पहुंचाने में इस प्रकार की गतिविधियों की बड़ी भूमिका है। इससे न केवल पशुपालकों को लाभ मिलता है, बल्कि देश की प्रगति में योगदान करने वाले वैज्ञानिकों के साथ उनका प्रत्यक्ष संवाद भी संभव हो पाता है। पशुओं के नस्ल सुधार और अन्य योजनाओं के लिए यह प्रक्रिया दूरगामी परिणाम की संवाहक बनती है।

प्रदेश में पशुपालन और कृषि क्षेत्र में कैसा काम हो रहा है ?

पूरा देश हरियाणा के प्रति आशा भरी उम्मीदों से देख रहा है। यहां के प्रगतिशील किसान हर क्षेत्र में अमूल्य योगदान दे रहे हैं। पशुपालकों की भी भरपूर सराहना की जानी चाहिए। जिस तरह वे पशुओं की देखरेख से लेकर उनके संरक्षण और संवर्धन पर बारीकी से ध्यान देते हैं, उसी का सुखद परिणाम है कि पूरे देश में आज भी यह राज्य नंबर वन है।

2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने से जुड़े मिशन में डेयरी सेक्टर की भूमिका क्या रहेगी ?

निर्विवाद रूप से इस क्षेत्र की भूमिका न केवल सबसे महत्वपूर्ण है बल्कि किसानों और पशुपालकों से इसके सीधे जुड़ाव के कारण सरकार भी डेयरी सेक्टर का भरपूर प्रोत्साहन दे रही है। फार्मर फस्र्ट सरीखे मिशन की परिकल्पना इसी सोच के साथ तैयार की गई है। अच्छी बात यह है कि किसान व वैज्ञानिकों के बीच आदर्श समन्वय के बूते हर चुनौती से निपटने में लगातार सफलता हासिल हो रही है। यही सिलसिला एक दिन लक्ष्य तक पहुंचाएगा। 

पशुपालन के क्षेत्र में रिसर्च की क्या स्थिति है ?

आइसीएआर की ओर से इसमें भरपूर योगदान किया जा रहा है। लगातार मॉनीटङ्क्षरग के साथ जहां भी आवश्यकता होती है, वहां तमाम संसाधन मुहैया कराए जाते हैं। इसी का सुखद परिणाम है कि अब किसान देसी और संकर नस्लों के बेहतर संतुलन पर बारीकी से ध्यान दे रहे हैं। इससे दुग्ध उत्पादन और नस्ल सुधार के क्षेत्र में लगातार बेहतर काम हो रहा है। यह सिलसिला कायम रखने में कोई कमी नहीं छोड़ी जाएगी।

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Posted By: Anurag Shukla

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