यमुनानगर, जेएनएन। यमुनानगर के जगाधरी में दिल दहला देने वाला वाक्‍या हुआ। जिस स्‍कूल में पढ़कर मासूम का भविष्‍य संवारने का माता-पिता ने सपना देखा, उसी की बस काल बन गई। छह साल की मासूम स्‍कूल की बस के पहिए के नीचे आ गई। लोग चीखते रहे, लेकिन पहिया उसके ऊपर से गुजर गया।

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जगाधरी के थाना छप्पर थाना क्षेत्र के गांव लवाणी में स्कूल बस चालक की लापरवाही ने छह वर्षीय मन्नत की जान ले ली। वह बस से नीचे उतरी। जैसे ही छह वर्षीय मन्नत बस के आगे से सड़क क्रोस करने लगी, तो चालक ने अचानक बस चला दी और कंडक्टर साइड की तरफ  के पहिए के नीचे आ गई। आसपास के लोगों ने शोर मचाया, लेकिन तब तक पहिया मन्नत के ऊपर से गुजर गया। उसे गंभीर हालत में अस्पताल में लेकर गए। जहां उसकी मौत हो गई। थाना प्रभारी राय सिंह ने बताया कि मामले में आरोपित चालक पर केस दर्ज किया गया है।

छुट्टी के बावजूद स्‍कूल बुलाया

मंगलवार को शहीदी दिवस पर सभी स्कूलों की छु़ट्टी थी, लेकिन दहिया पब्लिक स्कूल को खोला गया था। बच्चों को लाने के लिए बाकायदा बस भी लगाई गई थी। मन्नत के पिता मनीष कुमार ने बताया कि उन पर फीस को लेकर दबाव बनाया जा रहा था। मंगलवार को फीस जमा कराने के लिए ही बेटी को बुलाया गया था। वह भी बेटी मन्नत के साथ स्कूल में गए। यहां पर फीस जमा करा दी। इसके बाद बेटी को स्कूल में ही रोक लिया गया था। वह वापस आ गया। दोपहर बाद करीब तीन बजे स्कूल बस बेटी को छोडऩे के लिए आई। तभी यह हादसा हो गया।

सरकार के नियमों को रखा ताक पर

कोरोना की वजह से सरकार ने नर्सरी कक्षा के बच्चों को स्कूल में बुलाने पर रोक लगाई हुई है, लेकिन फीस के लालच में स्कूल ने नियमों को भी तोड़ दिया। लगातार अभिभावकों पर फीस जमा कराने का दबाव जा रहा था। यही वजह है कि छुट्टी के दिन भी स्कूल को खोला गया। मृतका मन्नत के चाचा विक्रम ने बताया कि जिस बस से मन्नत घर आई थी, उसमें करीब 50 विद्यार्थी थे।

मंगलवार को ही फीस जमा कर बनवाया था आइकार्ड

मनीष कुमार मजदूरी करता है। कोरोना की वजह से फिलहाल काम भी अधिक नहीं मिल रहा है। जिस वजह वह फीस जमा नहीं करा पाया था। मन्नत की डायरी में हर रोज फीस जमा कराने के लिए नोट लिखा जा रहा था। मंगलवार को किसी से पैसे उधार लेकर मनीष एक माह की स्कूल व बस फीस जमा कराने गया था। फीस जमा कराने के बाद ही उसका आइकार्ड बना था।

हादसे के बाद मां-बाप हुए बेसुध

घर से चंद कदम की दूरी पर बस चालक की लापरवाही से मन्नत की मौत हो गई। जबकि नियमों के अनुसार स्कूल बस में कंडक्टर का होना जरूरी है, लेकिन इस स्कूल बस में चालक के अलावा कोई नहीं था। मन्नत इकलौती बेटी थी। उसका एक छोटा भाई है। जब उसकी मौत की खबर मनीष व उसकी पत्नी को लगी, तो वह बेसुध हो गए। किसी तरह से उन्हें संभाला गया।

गंभीर मामला है : डीसी

डीसी मुकुल कुमार का कहना है कि यह मामला बेहद गंभीर है। जिला शिक्षा अधिकारी से इस मामले की जांच कराई जाएगी। रिपोर्ट के बाद निश्चित कार्रवाई की जाएगी।

की जाएगी कार्रवाई

डीईओ नमिता कौशिक का कहना है कि नर्सरी कक्षा के बच्चों को स्कूल में नहीं बुला सकते। इस स्कूल की पहले भी शिकायत मिली थी। जांच करने गए थे, तो संचालक स्कूल बंद कर चला गया था। अब दोबारा फिर स्कूल में जांच की जाएगी, जो भी लापरवाही सामने आएगी। उस पर कार्रवाई होगी।

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