जागरण संवाददाता, पानीपत : साक्षी गोपाल दास (अध्यक्ष इस्कॉन मंदिर धर्मक्षेत्र कुरुक्षेत्र) ने कहा कि शुकदेव गोस्वामी परीक्षित महाराज को बता रहे हैं कि नंद महाराज ने 20 लाख गाय को सजा कर बड़े ही आदर से ब्राह्मणों को दान दिया था। उन्होंने साथ में सात तिल के पहाड़ भी दान किए। जब हम स्नान करते हैं तो स्नान करने के बाद हमें अपने शरीर पर तिलक लगाना चाहिए। हमारे शरीर पर 12 स्थानों पर भगवान का वास होता है। अगर हम 12 तिलक नहीं लगा सकते तो कम से कम हमें एक वैष्णव तिलक अपने माथे पर गोपी चंदन का अवश्य लगाना चाहिए।

साक्षी गोपाल दास मुल्तान भवन मॉडल टाउन में श्रीमद्भागवत कथा सुना रहे थे। उन्होंने कहा कि तपस्या करने से हमारी इंद्रियां शुद्ध होती हैं। बिना तपस्या के मानव योनि और पशु योनि में कोई अंतर नहीं है। जब हमारी इंद्रियां अशुद्ध होती हैं तब वे हमें भौतिक संसार के गलत कार्यों की तरफ प्रेरित करती हैं।

उन्होंने कहा कि सबसे पहली तपस्या जिह्वा (जीभ) की तपस्या, भौतिक बातों को छोड़कर भगवान के नामों का गुणगान करना चाहिए। दूसरी तपस्या है खाना, हम जो भी खाए भगवान को भोग लगाकर खाना चाहिए। भगवान को सतोगुणी भोजन का भोग लगता है। भगवान कभी भी तमोगुणी पदार्थ का भोग स्वीकार नहीं करते। जैसे कि प्याज लहसुन, चाय, मांसाहार इनका भोग भगवान को नहीं लगता। भगवान की कृपा ²ष्टि मात्र से सारे पाप नष्ट हो जाते हैं।

कलयुग में सर्वोत्तम यज्ञ भगवान कृष्ण के नामों का जप

यज्ञ करना, दान देना, तपस्या करना हमें किसी भी व्यवस्था में नहीं छोड़ना चाहिए। कलयुग में सब से सर्वोत्तम यज्ञ है भगवान कृष्ण के नामों का कीर्तन करना। कार्यक्रम में विशाल गोयल, आशु गुप्ता, अनिल गोयल, सागर गोयल, बॉबी गुप्ता, संजय मंगला, सोनू गर्ग, सुंदर लाल चुघ, वरुण सिगला, सन्नी अग्रवाल, नीरज अग्रवाल , विजय शर्मा मौजूद रहे।

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