जागरण संवाददाता, समालखा : ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी विकास की अदालत ने आरटीआइ कार्यकर्ता पीपी कपूर को मानहानि के एक चार वर्ष पुराने मामले में बरी कर दिया है। अदालत ने टिप्पणी की कि प्रार्थी के रिकॉर्ड में ऐसा कोई सबूत नही है जिससे यह साबित हो कि कपूर द्वारा तत्कालीन डीसी व एडीसी पर लगाए गए घूसखोरी के आरोप झूठे हैं। ऐसा भी नहीं कहा जा सकता कि कपूर ने किसी को बदनाम करने के लिए समाचार पत्रों में यह आरोप लगाए थे। यह है मामला वर्ष 2012 में पानीपत के मॉडल टाउन के आवासीय क्षेत्र में नगर निगम से रिहायशी कोठी का नक्शा पास कराकर भवन मालिक अनिल ने अवैध शॉ¨पग मॉल बना लिया था। निगम ने जांच के बाद उसे गिराने का ऑर्डर कर मॉल को सील कर दिया। 9 माह बाद प्रशासन ने उसकी सील खोल दी। कपूर ने लोकायुक्त को अगस्त 2014 में शिकायत भेजकर तत्कालीन डीसी व एडीसी पर 20 लाख रुपये घूस लेने के एवज में इसे ध्वस्त नहीं करने का आरोप लगाया था। भवन मालिक अनिल ने अदालत में शिकायत देकर पीपी कपूर पर झूठा प्रचार कर बदनाम करने का आरोप लगाया और मानहानि का दावा किया था। कपूर ने कहा कि यह झूठा केस उन पर लोकायुक्त में दर्ज शिकायत को वापस लेने और दबाव बनाने के लिए डाला गया था, लेकिन गवाह और सबूत के अभाव में अदालत ने उन्हें बरी कर दिया गया।

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