पानीपत/यमुनानगर, जेएनएन। यमुनानगर में दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है। सेना से आनरेरी कैप्‍टन रैंक से रिटायर वृद्ध का सड़ा गला शव पड़ा घर पर पड़ा हुआ था। उसका विक्षिप्‍त बेटा घर पर अकेला था। घर से बदबू आ रही थी। पड़ोसियों ने इसकी सूचना पुलिस को दी।

सेक्टर 17 में सेना से आनरेरी कैप्‍टन रैंक से रिटायर वृद्ध 80 वर्षीय राम सिंह का शव उनके घर में ही सड़ी गली अवस्था में मिला। शव से बदबू उठ रही थी। जिससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि उनकी मौत तीन से चार दिन पहले हुई होगी। परिवार में उनका केवल एक ही बेटा प्रवीण कुमार है। जो मानसिक रुप से विक्षिप्त है। उसे पिता की मौत तक के बारे में कुछ नहीं पता।

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बेटा सुबह कपड़ों में लगा रहा था आग

गुरुवार की सुबह प्रवीण ने छत पर कुछ कपड़े एकत्र किए और उनमें आग लगा रहा था। पड़ोस में ही छत से किसी महिला ने उसे देखा। तब पुलिस को सूचना दी, क्योंकि प्रवीण की मानसिक हालत ठीक नहीं है। ऐसे में वह पहले भी कई बार इस तरह की हरकत कर चुका है। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर प्रवीण को रोका और उससे कपड़े लिए। इसी दौरान कमरे से बदबू उठ रही थी। जब पुलिस ने देखा, तो रजाई के नीचे करीब वृद्ध का शव पड़ा था।

बेटा नहीं बता पा रहा नाम तक

सेक्टर 17 थाना प्रभारी अजीत कुमार ने बताया कि मृतक का बेटा अपने पिता का नाम  तक नहीं बता पा रहा था। उसे पिता की मौत होने के बारे में भी कोई जानकारी नहीं थी। जब उससे बात की, तो उसने कहा कि अभी खाना खाने के लिए पिता उठेंगे। आसपड़ोस के लोगों से बात की, तो पता लगा कि यह दोनों ही इस मकान में रहते हैं। कैप्टन की पत्नी की काफी पहले मौत हो गई थी। उनकी एक बेटी की भी मौत हो चुकी है। परिवार में इन दो के अलावा किसी और के बारे में अधिक जानकारी नहीं मिल सकी। शव को पोस्टमार्टम हाउस में रखवाया गया है। प्राथमिक जांच में यही लग रहा है कि ठंड की वजह से मौत हुई है।

पहले पत्नी व बेटी की मौत, फिर बेटे की दिमागी बीमारी ने तोड़ दिया था कैप्टन को

हुडा सेक्टर 17 में रहने वाले सेना से आनरेरी कैप्टन सेवानिवृत्त हुए 83 वर्षीय राम सिंह मुदहद पर तकलीफों का पहाड़ टूटा हुआ था। उनके पास पैसा तो काफी था, लेकिन इस पैसे के बावजूद भी उन्हें सुख नसीब नहीं हुआ। पहले पत्नी, फिर बेटी पूनम की मौत ने उन्हें पूरी तरह से तोड़ दिया था। रही सही कसर इकलौते बेटे प्रवीण कुमार की मानसिक बीमारी ने पूरी कर दी। अकेले ही वह अपना और बेटे का बोझ उठा रहे थे। पड़ोस से भी उन्हें कोई मतलब नहीं था। जब तक वह रहे। घर की खुद ही सफाई करते थे। एक्टिवा पर दूध भी खुद ही लेने के लिए जाते थे।

घर के कई हिस्‍से में आग के निशान

सेक्टर 17 में जिस कोठी में वह रहते थे। वह 250 गज से ज्यादा में बनी है। एक बड़ा कमरा प्रथम मंजिल पर है, जबकि नीचे दो कमरे अटैच बाथरूम के साथ और हॉल व ड्राइंग रूम था। आलीशान कोठी बनी हुई थी, लेकिन अब देखरेख के अभाव में वह खंडहर सी नजर आने लगी थी। छत पर जाने वाली सीढिय़ों का कांच टूटा पड़ा था। जगह-जगह आग से जलने के निशान बने हुए थे। पड़ोसियों के मुताबिक, उनका बेटा ही कई बार कपड़ों में आग लगा देता था।

सात दिन पहले हो गया था एक्सीडेंट

बताया जा रहा है कि सात दिन पहले कैप्टन राम ङ्क्षसह घर से एक्टिवा पर दूध लेने के लिए निकले थे। उस दौरान रास्ते में उनका एक्सीडेंट हो गया था। हाथ में चोट लगी थी। तभी कोई उन्हें एक्टिवा पर छोडऩे के लिए आया था। तभी पड़ोसियों ने उन्हें आखिरी बार देखा था। कैप्टन राम सिंह के मकान के बराबर में रहने वालों ने बताया कि वह किसी से अधिक मतलब नहीं रखते थे। करीब 30 साल से हम भी यहां पर रह रहे है, लेकिन उन्होंने कभी कोई बात नहीं की।

 

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