समालखा (पानीपत), जागरण संवाददाता। सड़क हादसे परिवारों के लिए घातक साबित हो रहे हैं। घर का मुखिया छीन जाता है। बच्चों के सिर से पिता का साया उठ जाता है। जो दिन उनके खेलने कूदने और पढ़ने के होते हैं। उन दिनों में उनके ऊपर जिम्मेदारी आ पड़ती है। कोई भी हादसा कितना दर्दनाक होता है, ये पीड़ित परिवार ही जानता है। जिसे मिले जख्म जिंदगी भर नही भर पाते हैं। कुछ ऐसी ही कहानी है समालखा के गांव छदिया वासी सुभाष के परिवार की। जून माह में जीटी रोड पर सड़क हादसे में उनकी जान चली गई। इससे न केवल परिवार का मुखिया चला गया, बल्कि इकलौते बेटे पर बेवक्त जिम्मेदारी आ गई।

गाड़ी की टक्कर से हुई थी मौत

बेटे नितेश ने बताया कि पिता सुभाष खेतीबाड़ी कर परिवार का गुजर बसर कर रहे थे। 27 जून को ट्रैक्टर लेकर खेत से लौट रहे थे। तभी हल्दाना बार्डर के पास गाड़ी ने ट्रैक्टर को टक्कर मार दी और उनकी जान चली गई। हादसे ने परिवार के मुखिया के साथ उसके व बड़ी बहन के सिर से पिता का साया छीन लिया, बल्कि मां का सुहाग और दादी का बेटा तक चला गया।

पिता के निधन से परिवार का गुजर बसर प्रभावित हुआ तो मजबूरीवश उसे आगे की पढ़ाई छोड़ कंपनी में काम करना पड़ा। अचानक सारी जिम्मेदारी उनके ऊपर आ पड़ी तो कुछ समझ नहीं पाया। अब धीरे धीरे समझ आ रही, लेकिन बहुत मुश्किल हो रही है। हादसे ने पिता को छीन जो जख्म दिया, शायद ही जिंदगी में वो भर पाए। वहीं पति की जान जाने के बाद से पत्नी भरपाई व मां बेलो देवी भी गम में हैं।

अभियान चलाए सरकार

नितेश ने कहा कि सरकार हादसों पर अंकुश लगाने के लिए न केवल जागरूकता अभियान चलाए, बल्कि नेशनल व स्टेट हाईवे पर बने अवैध कट बंद करे। सड़कों पर बने गड्ढों को भरे, ताकि सड़कें किसी के खून से लाल न हो। वहीं किसी का परिवार उजड़ने से बच सके।

Edited By: Naveen Dalal

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