जागरण संवाददाता, पानीपत : सड़क हमें मंजिल तक पहुंचाती हैं। अगर यातायात नियमों को न अपनाएं तो यही सड़क अपनों से दूर भेज देती है। जीवन जीने के लिए हर व्यक्ति को यातायात नियमों को खुद से शुरू करने की जरूरत है। सड़क हादसों के प्रति संवेदना और जागरूकता का संदेश शनिवार को पुलिस विभाग ने एसडी विद्या मंदिर सिटी में जिला स्तरीय सड़क सुरक्षा चौपाल में दिया। बतौर मुख्य वक्ता पहुंचे एसपी सुमित कुमार ने स्पष्ट संदेश दिया कि यातायात नियमों में किसी को किसी तरह की छूट नहीं दी जाएगी। उन्होंने कहा कि रविवार को जागरूकता का आखिरी दिन है, फिर पुलिस सख्ती दिखाएगी।

मंच संचालन डीएसपी मुख्यालय सतीश वत्स ने किया। इस मौके पर एसडीवीएम सेक्टर-12 के चेयरमैन रघुनंदन गुप्ता, राजीव गर्ग, विवेक गुप्ता, प्रिसिपल मीनाक्षी श्रॉफ, भाजपा महिला मोर्चा की जिलाध्यक्ष डॉ. अर्चना गुप्ता, रेखा बजाज व आरएसओ गौरव लीखा मौजूद रहे।

फोन कराया तो दोगुना चालान कटेगा

चालान से बचने के लिए पुलिसकर्मी अंकल का फोन कराया तो उनका दोगुना राशि का चालान कटेगा। एसपी ने 2004 में ट्रेनिग के दौरान सोनीपत से मधुबन जाते समय पानीपत में एनएफएल के पास अपनी कार के एक्सीडेंट होने का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि सीट बेल्ट बांधने के चलते मेरी जान बच गई। मेरी गाड़ी पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी थी। इस तरह, हम सभी भी नियमों का पालन कर अपना कीमती जीवन सहेज सकते हैं। विदेशी कल्चर से पहले नियमों को अपनाएं

एसडीवीएम सिटी के चेयरमैन सतीश चंद्रा ने कहा कि मैं विदेशों में जाता हूं तो वहां हर व्यक्ति यातायात नियमों को अपनी जिम्मेदारी समझता है। ग्रीन लाइट होने पर भी किसी राहगीर के सड़क पार करने तक वाहन चालक इंतजार करता है। हमारे यहां इसका उल्टा होता है। ग्रीन लाइट होने से पहले ही वाहन चालक गियर लगा देता है। विदेशी कल्चर से पहले यातायात नियमों को अपनाना होगा। बच्चों को भी नियमों की पालना करनी चाहिए। ए भाई जरा देख के चलो..

एसडी विद्या मंदिर सिटी के विद्यार्थियों ने ए भाई जरा देख के चलो नाटक की प्रस्तुति दी। रंगकर्मियों ने बताया कि नजदीक ऑफिस होने और हेयर स्टाइल खराब होने या फिर अनुभव होने की कहकर यातायात नियमों को नहीं अपनाते। उनकी लापरवाही हादसों का कारण बन जाती है। विद्यार्थियों ने सड़क सुरक्षा जीवन के लिए होती है..गीत की प्रस्तुति देकर यातायात नियमों को बताया। चौपाल में एसपी ने लोगों से की सीधी बात

मोहन : दोपहिया वाहन पर पति-पत्नी हैं और उनका बच्चा साथ में है। क्या वह तीन सवारियों में गिना जाएगा? बच्चे को भी साथ ले जाना जरूरी है और वे उसको अलग से दोपहिया दे नहीं सकते।

एसपी : छोटा बच्चा गोद में बैठा सकते हैं। इससे 7-12 साल का बच्चा तीसरी सवारी में गिना जाएगा। इसमें कोई छूट नहीं मिलेगी।

दीपिका : प्रदूषण का सर्टिफिकेट बिना जांच के बना दिया जाता है। यह एक नहीं सभी सेंटरों पर किया जा रहा है। ऐसे में वाहन चालक को इंजन की जानकारी कैसे मिलेगी?

एसपी : यह सब फ्रॉड है। ऐसा कोई मामला है तो शिकायत दें। पुलिस खुद भी डिकोय भेजकर खुलासा करेगी।

रघुनाथ : ऑटो चालक दिन में मुश्किल से 400-500 रुपये ही कमा पाते हैं। उनको तो चालान में छूट दे दी जाए।

एसपी : ऑटो चालक भी नियमों पर चलें तो उनका कोई चालान नहीं करेगा। पुलिस उन्हें ट्रेनिग देने को तैयार है।

Posted By: Jagran

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