अंबाला, [दीपक बहल]। स्पेशल ट्रेनों को पटरी पर उतारने के बावजूद रेलवे लॉकडाउन के दौरान हुए नुकसान की भरपाई नहीं कर सका है। देशभर के रेलवे स्टेशनों पर स्थित स्टॉल, भोजनालय, पार्किंग, एसटीडी बूथ संचालक भी इससे प्रभावित हैं। रेल मंत्रालय ने इन सबका दर्द समझा और तीन माह की लाइसेंस फीस माफ कर दिया है। मार्च से जून तक इन स्टॉल संचालकों से किराया नहीं लिया जाएगा।

स्पेशल ट्रेनें पटरी पर उतरने के बावजूद स्टॉल संचालकों की आमदनी में बढ़ोतरी नहीं

अभी भी सभी ट्रेनों का संचालन शुरू नहीं हो सका है। इस कारण रेल मंत्रालय ने स्टॉल संचालकों को और राहत देने का फैसला लिया है। इसके लिए हर मंडल स्तर पर अधिकारियों की टीम गठित की गई है। टीम यह देखेगी कि स्पेशल ट्रेनों के पटरी पर उतरने से इन स्टॉल संचालकों की आर्थिक स्थिति में कितना सुधार हुआ और रेलवे इन संचालकों की किस तरह से मदद कर सकता है।

सभी मंडल पर अफसरों की बनाई कमेटी, लाइसेंस फीस घटाने या फिर किराया माफ करने पर करेगा विचार

यह रिपोर्ट मंडल रेल प्रबंधक (डीआरएम) के माध्यम से रेलवे जोन और फिर रेल मंत्रालय पहुंचेगी। इसके बाद आगे की लाइसेंस फीस घटाने या फिर किस-किस की माफ करनी है, इस पर फैसला लिया जाएगा। फिलहाल 25 मार्च 2020 से 22 जून 2020 तक इनका किराया माफ किया जा चुका है। बता दें कि कुछ स्टॉल का किराया हर माह जमा होता है तो कुछ का सालाना।

प्लेटफार्म पर आ रही ट्रेन तो खोलें स्टॉल

स्पेशल ट्रेनें पटरी पर उतरने के बाद रेल मंत्रालय स्टॉल खोलने का दे चुका है। अब जिस-जिस प्लेटफार्म पर ट्रेन का ठहराव है, टीम उसकी सूची तैयार कर रही है। पहले की तुलना में अब कितनी ट्रेनें प्लेटफार्म पर रुक रही हैं, इसकी के अनुसार स्टॉलों का आगे का किराया तय किया जाएगा। जिन प्लेटफार्म पर ट्रेनें आ ही नहीं रही उनकी भी सूची तैयार हो रही है।

स्टॉल संचालकों के पक्ष में फैसला : सीनियर डीसीएम

सीनियर डीसीएम हरिमोहन ने कहा कि रेल मंत्रालय ने स्टॉल संचालकों की पीड़ा को समझते हुए 25 मार्च से 22 जून तक की लाइसेंस फीस माफ कर दी है। मंडल स्तर पर गठित टीम सभी पहलुओं पर विचार-विमर्श कर अपनी रिपोर्ट देगी।

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