पानीपत, [अजय सिंह]। लॉकडाउन के बाद अब कॉमर्शियल वाहनों की खरीद में अब मामूली इजाफा हो रहा है। शहर के ट्रांसपोर्ट व्यवसाय का पहिया दोबारा सड़क पर आने लगा है। साल 2020 के पहले तीन महीनों में वाहनों की बिक्री बीते दो वर्षों की तुलना में अधिक रही। हालांकि 23 मार्च को लॉकडाउन घोषणा के बाद वाहनों की बिक्री में तेजी से गिरावट दर्ज की गई।एक जुलाई से 12 अगस्त तक स्थानीय ट्रांसपोर्टरों ने आरटीए कार्यालय से 87 कॉमर्शियल वाहनों का रजिस्ट्रेशन कराया है। जो मई और जून माह में खरीदे गए कॉमर्शियल वाहनों के आंकड़ों के लगभग तीन गुणा है।

  • 1491 कॉमर्शियल वाहनों का अब तक कुल रजिस्ट्रेशन हो चुका है 
  • 1197 कॉमर्शियल वाहन जनवरी से मार्च महीने में खरीदे 
  • 930 कॉमर्शियल वाहन खरीदे गए थे वर्ष 2019 की इस  तिमाही में 
  • 795 कॉमर्शियल वाहन खरीदे गए थे वर्ष 2018 की इस तिमाही में
  • 207 कॉमर्शियल वाहन बिके अप्रैल से जून 2020 के बीच
  • 878  वाहन पिछले वर्ष इसी  तिमाही में ट्रांसपोर्टरों ने वाहन खरीदे
  • 755 कॉमर्शियल वाहन 2018 की दूसरी तिमाही में बिके
  • 23 फीसद ज्यादा वाहन बिके लॉकडाउन लगने से पहले, पिछले वर्ष की तुलना में
  • 77 फीसद बिक्री कम हो गई लॉकडाउन के पीरियड में, व्यवसाय पर बड़ा असर 
  • 22.75 करोड़़ रुपये ट्रांसपोर्टरों ने साल 2018 में जमा कराए
  • 23.23 करोड़ रुपये का राजस्व जमा कराया 2019 में 
  • 12.52 करोड़ रुपये का राजस्व ही जमा हो पाया है इस वर्ष अब तक
  • 1014 परमिट ही जारी किए है रीजनल ट्रांसपोर्टर अथॉरिटी ने अब तक
  • 3104 कॉमर्शियल वाहनों के परमिट बनाए गए थे पिछले वर्ष

नौकरियों पर संकट

वाहनों की बिक्री में आई गिरावट के कारण कॉमर्शियल वाहन निर्माता कंपनियों में काम करने वालों की नौकरी पर संकट है। कुछ को सैलरी कम कर दी है तो कुछ को हटाया गया है। स्टाफ लगातार कम किया जा रहा है। 

आधा हुआ रेवेन्यू, परमिटों की संख्या में आई तिगुना कमी

राजस्व वसूली की बात करें तो साल 2019 के मुकाबले आरटीए कार्यालय में अब तक आधा ही राजस्व जमा हुआ है। परमिट की संख्या में तीन गुना तक कमी आई है।

किस्तों की चिंता में फंसे ट्रांसपोर्टर

कोरोना काल में ट्रांसपोर्ट व्यवसाय काफी प्रभावित हुआ है। स्थानीय ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि संक्रमण के कारण काम आधा भी नहीं रहा। सरकार ने टैक्स पैनलटी छूट की घोषणा तो कर दी, लेकिन आज तक सिस्टम में इसे अपडेट नहीं कराया। अभी तक सिस्टम कंप्यूटर में जुर्माना दिखाता है। कागजात बनवाने से पहले टैक्स भरना अनिवार्य है। मजबूरन जुर्माना जमा कराना पड़ रहा है। वहीं सितंबर माह से बैंकों की किस्तें भी शुरू हो जाएगी, जो ट्रांसपोर्टरों के लिए ङ्क्षचता का विषय बनी हुई है।

Posted By: Anurag Shukla

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