जींद, [बिजेंद्र मलिक]। दिसंबर में अटल पार्क में अचानक बीजेपी विधायक द्वारा की गई रेड भी चर्चा का विषय रही। इसका रिजल्ट चाहे कुछ ना निकला हो, लेकिन इससे जिले की सियासत जरूर गरमाई। अटल पार्क का निर्माण नगर परिषद करा रही है, जिसकी प्रधान के पति भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं। करीब साढ़े पांच करोड़ रुपये की लागत से बन रहे अटल पार्क में विधायक ने घटिया सामग्री का प्रयोग करने का आरोप लगाते हुए पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों से सैंपल भरवाए थे। साथ ही नप को कार्रवाई करने को भी कहा था उस दौरान नगर परिषद ने ठेकेदार को कार्रवाई के नाम पर नोटिस देकर जांच की और कहा गया कि जो ईंटें वहां रखी हुई थी, वो मजदूरों की झुग्गियां बनाने के लिए लाई गई थी। इसके बाद विधायक भी चुप्पी साध गए। इस चुप्पी के कारण क्या रहे, इसको लेकर लोगों में तरह-तरह की बातें हैं।

अगले साल होंगे नगर परिषद के चुनाव शहर में अभी से लगने लगे पोस्टर

नगर परिषद के चुनाव के लिए अभी एक साल से ज्यादा का समय बाकी है, लेकिन नए साल पर पूरे शहर में भावी पार्षद प्रत्याशियों के बैनर लगे हुए हैं। किसी ने अपने फोटो के साथ पार्टी नेताओं के फोटो लगाए हुए हैं तो किसी ने निर्दलीय के तौर पर खुद को पेश किया है। नगर परिषद के प्रधान का सीधा चुनाव होने की आहट से दावेदारों की संख्या भी लंबी है। पार्षदों के बीच अभी से कयास लगाए जाने लगे हैं कि कौन किस पार्टी के समर्थन से चुनाव लड़ने के लिए किस नेता की हाजिरी लगा रहा है। बीजेपी में ही प्रधान का चुनाव लड़ने के इच्छुक लोगों की लिस्ट लंबी है। विधायक व बीजेपी के दूसरे नेताओं के नजदीकी इनमें शामिल हैं। मौजूदा पार्षदों में से भी कई लोग पार्षद का चुनाव लड़ने के साथ-साथ प्रधान पद का चुनाव लड़ने का मन बना चुके हैं।

कार्यकर्ताओं में पदाधिकारी बनने की होड़

सत्ता में हिस्सेदारी होने के बाद जेजेपी में पदाधिकारी बनने की होड़ लगी हुई है। इन लोगों को लगता है कि सत्ता में उन्हीं लोगों की सुनवाई ज्यादा होगी, जिनके पास कार्यकारिणी में पद है। कार्यकारिणी में शामिल होने के लिए उन्होंने अपने आकाओं के पास हाजिरी लगानी शुरू कर दी है। वहीं कुछ लोग जो विधानसभा चुनाव में टिकट ना मिलने से नाराज होकर पार्टी छोड़ कर चले गए थे। उस समय उन्होंने भी नहीं सोचा था कि पार्टी सत्ता में भी आ सकती है। उन्हें अब पार्टी छोड़ने का मलाल हो रहा है और वह किसी तरह से दोबारा आना चाहते हैं, लेकिन तरीका समझ में नहीं आ रहा है। वह पार्टी में आने के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपना रहे हैं। साथ ही कुछ वरिष्ठ नेताओं के चक्कर भी काट रहे हैं, पर फिलहाल इसका फायदा न मिलने से बुरी तरह से बेचैन हैं।

पहले साथ घूमते थे, अब चुनाव में आमने-सामने

शहर की प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्था की प्रबंधन कमेटी का चुनाव पांच जनवरी को होना है। मौजूदा प्रधान दोबारा चुनाव लड़ रहे हैं। लेकिन उनके सामने अग्रवाल समाज से किसी बड़े चेहरे ने प्रधान पद के लिए नामांकन नहीं किया। अग्रवाल समाज का संस्था में अच्छा रुतबा है। मौजूदा प्रधान के खिलाफ चुनाव लड़ने के लिए सिर्फ एक व्यक्ति ने नामांकन फार्म भरा है। यह सज्जन पहले इनके काफी नजदीकी थे। लेकिन पिछले साल किसी बात को लेकर दोनों में संबंध बिगड़ गए। उसके बाद इन साहब ने संस्था व कुछ अन्य लोगों के साथ प्रबंधन कमेटी पर अनियमितता बरतने के आरोप लगाते हुए रजिस्ट्रार कार्यालय में शिकायत की। इससे पिछले साल होने वाले चुनाव स्थगित हो गए थे।

Posted By: Anurag Shukla

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