पानीपत, जागरण संवाददाता। घर की रसोई में रोजाना इस्तेमाल होने वाले आटा, चावल, खाद्य आयल, नमक, दूध और मैदा में अब पोषक तत्वों का मिश्रण अनिवार्य कर दिया गया है। फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथारिटी आफ इंडिया (एफएसएसएआइ)ने रिमाइंडर जारी करते हुए जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी को इन वस्तुओं की सैंपलिंग संख्या बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।

जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी श्यामलाल महीवाल ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कुपोषित-अति कुपोषित बच्चों की संख्या को शून्य पर लाने के लिए केंद्र सरकार ने यह निर्णय लिया है। पहले बच्चों में कुपोषण ज्यादा मिलता था, अब हर आयु वर्ग में यह स्थिति देखने को मिल रही है। इससे निपटने के लिए एक जनवरी 2019 को आदेश जारी किए गए थे। एफएसएसएआइ ने नमक में आयोडीन के साथ आयरन कंटेंट मिलाना अनिवार्य कर दिया है। खाद्य तेल और दूध में विटामिन ए-डी, आटा, मैदा और चावल में आयरन, फोलिक एसिड और विटामिन बी मिलाना होगा। भविष्य में इस सूची में कई और खाद्य पदार्थों को शामिल करने का प्लान है। पैक्ड सामान पर यह गाइडलाइन लागू होगी। कोरोना महामारी के चलते सैंपलिंग अभियान गति नहीं पकड़ सका था।

अब पुन: सूचीबद्ध वस्तुओं के नमूने लिए जाएंगे। जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी के मुताबिक पैक्ड आइटम में पोषक तत्व नहीं मिलने पर पर निर्माता पर पां लाख रुपये तक का जुर्माना भी किया जा सकता है।

पोषक तत्व न मिलने से दिक्कत :

-शारीरिक विकास कम होना।

-वजन कम, भूख कम लगना।

-हड्डियों से जुड़े रोग।

-आखों की रोशनी कम होना।

-रोग प्रतिरोधक क्षमता का कम होना।

चीनी-नमक कम सेवन की सीख :

फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथारिटी आफ इंडिया के सहयोग से कंज्यूमर राइट आर्गनाइजेशन चीनी-नमक और घी-तेल कम मात्रा में सेवन की सीख दे रही है। चीनी के अधिक सेवन से शुगर-मोटापा, नमक के ज्यादा सेवन से रक्तचाप बढ़ता है। दोनों बीमारियां अन्य रोगों को भी जन्म देती हैं। घी-तेल का अधिक सेवन करने से हार्ट की समस्या और मोटापा बढ़ता है।

Edited By: Anurag Shukla