पानीपत, जेएनएन। हरियाणा में पहली बार राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा प्रचार के लिए आए थे। इस दौरान उन्होंने गुटबाजी भी भांप ली थी। कई बार जनसभा और रोड शो में सभी को एकजुट करने की कोशिश की, बावजूद जीत के अंजाम तक नहीं पहुंचा पाए। यही वजह है कि सोनीपत से भूपेंद्र सिंह हुड्डा, करनाल से अश्विनी शर्मा, अंबाला से कुमारी सैलजा, हिसार से कुलदीप विश्नोई के बेटे भव्य विश्नोई, भिवानी महेंद्रगढ़ से किरण चौधरी की बेटी श्रुति चौधरी, रोहतक से दीपेंद्र हुड्डा और सिरसा सीट से अशोक तंवर भी अपनी सीट न बचा सके। वहीं कार्यकर्ता इस हार की वजह हरियाणा में पार्टी की गुटबाजी को मान रहे हैं।

अंबाला लोकसभा सीट पर शुरू से ही कड़ा मुकाबला माना जा रहा था। यहां तक कि इस सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी कुमारी सैलजा के पक्ष में यमुनानगर में राहुल गांधी और अंबाला कैंट में प्रियंका गांधी वाड्रा ने रैली की। वहीं भाजपा के प्रत्याशी रतन लाल कटारिया के प्रति लोगोंं में गुस्सा था। बावजूद कांग्रेस प्रत्याशी इसे भुनाने में सफल नहीं रहे।

कई गांवों में हुआ था विरोध
भाजपा ने जब रतन लाल कटारिया को अंबाला लोकसभा टिकट से प्रत्याशी बनाया तो लोगों को यह रास नहीं आया। यहां तक कि जब वह गांवों में प्रचार के लिए आए, तो कई जगहों पर उनका पुरजोर विरोध हुआ। यहां तक कि लोगों ने उन्हें यह तक कहा कि पांच साल तक कभी नहीं आए हो। 

स्थानीय नेताओं ने दिखाया दम
भाजपा के स्थानीय नेताओं और विधायकों ने अपना दम दिखाया। जगाधरी विधानसभा में स्पीकर कंवरपाल गुर्जर, यमुनानगर में विधायक घनश्याम दास अरोड़ा और साढौरा में विधायक बलवंत ने उनके पक्ष में जमकर प्रचार किया। हालांकि विधायकों ने भाजपा के विकास कार्यों को प्रमुखता से सामने रखा। इन सबके बावजूद भी लोगों की पहली पसंद नरेंद्र मोदी रहे। कई जगहों पर तो यह खुले आम लोगों ने कहा कि हमें वोट मोदी को देना है।

राहुल और प्रियंका की रैली नहीं आई काम
पहली बार कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी और उनकी बहन और पार्टी की महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा हरियाणा में आए। यहां पर उन्होंने कुमारी सैलजा के पक्ष में रैली की। सबसे पहले राहुल गांधी जगाधरी अनाज मंडी में आए। यहां पर उन्होंने जनता को जोडऩे के लिए पूरा जोर दिया। हालांकि उनके भाषण में स्थानीय मुद्दे शामिल नहीं थे। यहां उन्होंने अपनी न्याय योजना के जरिये लोगों को जोडऩे की कोशिश की। इसके बाद प्रियंका ने अंबाला कैंट में रैली की। दोनों भाई बहन की रैली भी कुमारी सैलजा को जीत नहीं दिला सकी। 

जीत का आधार बने मोदी
कटारिया की जीत का आधार मोदी ही बने। जहां पर उनका विरोध हो रहा था। वहां भी उन्हें खूब वोट मिली। स्पीकर के विधानसभा क्षेत्र में कुमारी सैलजा को खूब वोट मिलने की उम्मीद थी, लेकिन यहां पर भी वह वोटों में काफी पिछड़ गई। जगाधरी में उन्हें मात्र 57922 वोट ही मिले। जबकि कटारिया को 86715 वोट मिले। 

एकजुट नहीं हो सके बड़े नेता
कांग्रेस में चल रही गुटबाजी की वजह से हरियाणा के दिग्गज पार्टी कार्यकर्ता पर भरोसा नहीं जता सके। खुद मैदान में उतरना पड़ा। ऐसे में दूसरे प्रत्याशियों की रैली और जनसभा में भी दिग्गज नहीं पहुंच सके। ये भी हार की एक बड़ी वजह रही। 

टूटा भ्रम : गांधी परिवार भी नहीं बचा पाया अंबाला में कांग्रेस का हाथ
लोकसभा सीट अंबाला पर कांग्रेस के लिए न तो नारा काम आया और न ही गांधी परिवार का सहारा ही प्रत्याशी को पार लगा पाया। प्रियंका गांधी वाड्रा के सहारे जीत की उम्मीद लगाए बैठी कांग्रेस को इस सीट से तगड़ा झटका लगा। 

रिकॉर्ड मतों से जीते कटारिया
मोदी लहर में यह भ्रम भी टूट गया कि जब-जब गांधी परिवार की अंबाला में रैलियां हुई, कांग्रेस प्रत्याशी विजयी हुआ है। जबकि इस सीट पर इतिहास गवाह रहा है, इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, सोनिया गांधी जब भी अंबाला में चुनाव प्रचार के लिए आए कांग्रेस की जीत रही है। इस बार कांग्रेस प्रत्याशी कुमारी सैलजा के चुनाव प्रचार के लिए कांग्रेस की महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा अंबाला आईं। ऐसे में माना जा रहा था कि सैलजा की जीत होगी, लेकिन इसके उलट भाजपा के रतनलाल कटारिया ने 1952 से लेकर 2014 तक के लोकसभा चुनावों में बनाया जीत के अंतर का रिकार्ड 2019 में तोड़ दिया। पिछली बार जहां कटारिया 340074 वोट से जीत हासिल की थी, वहीं इस बार फिर कटारिया ने 345345 वोटों से जीत हासिल कर अपना ही रिकार्ड बना डाला। 

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Posted By: Anurag Shukla