कुरुक्षेत्र [जगमहेंद्र सरोहा]। टोक्यो ओलिंपिक में भाारतीय महिला हाकी टीम को मजबूत स्थान तक ले जाने वाली कप्तान रानी रामपाल ने सशक्‍त महिलाओं की सूची में जगह बनाई है। फोर्ब्स इंडिया मैगजीन ने ये सूची जारी की है। रानी रामपाल ने मैगजीन के कवर में जगह हासिल की। रानी के शक्तिशाली महिलाओं की फोर्ब्स की सूची में शामिल होने पर धर्मनगरी कुरुक्षेत्र के लोग उत्साहित हैं।

जानिये रानी रामपाल के संघर्ष की कहानी

भारतीय महिला हाकी टीम ने टोक्यो ओलिंपिक में इतिहास रचा था। टीम ने ओलिंपिक में पहली बार सेमीफाइनल में जगह बनाई थी। टीम ने क्वार्टर फाइनल में आस्ट्रेलिया को 1-0 से हराकर पूरे विश्व के हाकी प्रेमियों काे अपनी तरफ खींचा था। बतौर कप्तान रानी रामपाल का इसमें विशेष योगदान रहा है।

पिता घोड़ा बुग्गी में छोड़कर आते थे

रानी रामपाल आज इस स्थान पर ऐसे ही नहीं पहुंची। इसके लिए संघर्ष करना पड़ा। उसके पिता रामपाल उसको घोड़ा बुग्गी से उसको हाकी के मैदान तक छोड़कर आते थे। पिता ने अपना काम छोड़ा, लेकिन कभी भी रानी की प्रेक्टिस को मिस नहीं होने दिया गया। रानी ने भी कोच बलदेेव सिंह की देखरेख में मैदान पर जमकर पसीना बहाया। उसने अपने लक्ष्य को पाने के लिए अपने भाई की शादी के दिन भी प्रेक्टिस नहीं छोड़ी। वह 15 साल की उम्र में 2010 विश्वकप के लिए राष्ट्रीय टीम में सबसे कम उम्र की खिलाड़ी बनी। वर्ल्ड गेम्स एथलीट आफ द ईयर उनके नाम है।

संघर्ष से लड़कर आगे बढ़ीं रानी

रानी रामपाल के परिवार की हालात तंग थी। वह स्कर्ट की बजाय सूट सलवार पहनकर खेलती थी। पिता इसको लेकर चिंतित भी रहते थे, लेकिन उन्होंने बेटी के सपनों को पूरा करने के लिए अपनी सोच को भी बदला। घर में घड़ी न होने पर मां आसमान के तारे देखकर उसको उठाती थी। उसको प्रेक्टिस के समय अपने लिए 300 एमएल दूध लाना होता था, लेकिन वह 200 ग्राम ही ला पाती थी। वह दूध पूरा करने के लिए इसमें बाकी मात्रा में पानी मिला लेती थी। रानी रामपाल आज इसका श्रेय अपने कोच बलदेव सिंह को देती हैं।

हाल ही में मिला पदमश्री पुरस्कार

रानी रामपाल को हाल ही में पदमश्री पुरस्कार मिला है। राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने उनको सम्मानित किया। रानी रामपाल को इससे पहले भी कई अवार्ड मिल चुके हैं। उन्होंने बताया कि पदमश्री या दूसरे पुरस्कार मिलने पर किसी भी खिलाड़ी या व्यक्ति की जिम्मेदारी बढ़ जाती है। उनकी भी जिम्मेदारी बढ़ गई है। वह अब हाकी को और ऊंचाइयों तक लेकर जाएंगी।

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Edited By: Anurag Shukla