जागरण संवाददाता, पानीपत : दरगाह शाह शरफुद्दीन बू अली शाह कलंदर पानीपत के वार्षिक उर्स में रोजे के 11वें दिन इशा की नमाज हुई। इसके बाद मुज्जफरनगर, दिल्ली, उत्तराखंड से आई पांच कव्वाल पार्टियों ने कव्वालियों के माध्यम से शमां बांधा। हर वर्ष कलंदर उर्स पर दूर दराज से अकीदतमंद व कव्वाल अपनी फरियाद लेकर हाजिरी लगाने आते हैं। कव्वाल हनीश बजमी की कव्वाली मुझे अल्लाह का सुरूर है मुझे जमे वहदत पिला दिया, मुझे मस्त कलंदर बना दिया सुनाया। शाहरुख कलंदरी के हालत के कदमों पे कलंदर नहीं गिरता, टूटे जो सितारा वो जमी पर नहीं गिरता, गिरते समंदर में बड़े शोक से दरिया, लेकिन किसी दरिया में समंदर नहीं गिरता से शमां बांधा। डीसी ने की चादर पोशी कार्यक्रम में शाम को सामूहिक रोजा इफ्तार पार्टी का आयोजन किया गया। डीसी सुमेधा कटारिया ने चादर पोशी की। शहीयद आजाद अहमद हासमी का रोज खजूर पेश कर खुलवाया। इस अवसर पर उन्होंने थर्मोकोल के प्रयोग बंद करने का आह्वान करते हुए कहा कि धार्मिक स्थलों को इसका प्रयोग नहीं करना चाहिए। यहां से लोगों को प्रेरणा मिलती है। उन्होंने चादर पोशी कर देश की अमन शांति की दुआ मांगी। रात भर कव्वालियों की दौर चला। ये रहे मौजूद हजारों लोगों ने उर्स में भाग लिया। इस मौके पर मुख्य रूप से हाफिश मोहम्मद संपदा अधिकारी, खुर्शीद अहमद, सूफी साहब इस्लाम अली अंसारी, वकील रजनी बेनीवाल, अशोक चौधरी, मेहूल जैन, ललित गोयल, इरफान, रजनी गुप्ता मौजूद रहे। असली उर्स मुबारक यह उर्स मुबारक बाबा का असली उर्स मुबारक है। यह एक दिवसीय होता है। रमजान का महीना होने के कारण इसका जश्न ईद की सात दिन बाद मनाया जाता है। जो तीन दिन तक चलता है।

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