संवाद सूत्र, रिफाइनरी : सिंहपुरा-सिठाना गांव को आखिरकार स्वच्छ पानी मिलने की राह खुल गई है। पानीपत रिफाइनरी ने पहल करते हुए जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के साथ मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टेंडिग (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। इसके तहत पानीपत रिफाइनरी 50 लाख रुपये विभाग को देगी। विभाग यहां पर पाइप लाइन बिछाएगा। सिंहपुरा और सिठाना में एक-एक ट्यूबवेल लगाएगा। घर-घर में स्वच्छ पानी की सप्लाई होगी। यह समझौता डीसी धर्मेंद्र सिंह, रिफाइनरी के कार्यकारी निदेशक जीसी सिकदर, मुख्य महाप्रबंधक महुआ बसु, एक्सईएन राजेश कौशिक की मौजूदगी में हुआ।

जीसी सिकदर ने कहा कि रिफाइनरी के आसपास के गांवों में स्कूलों में काफी काम किया गया है। स्वास्थ्य और स्वच्छता में सुधार, पर्यावरण संरक्षण, महिला सशक्तीकरण और कौशल विकास के लिए प्रतिबद्ध हैं।

महाप्रबंधक एसके त्रिपाठी ने आसपास के गांवों में चलाई जा रही विभिन्न कल्याणकरी योजनाओं के बारे में विस्तृत जानकारी दी। कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ प्रबंधक राकेश रोशन ने किया। इस अवसर पर पीआरपीसी की ओर से एमके शर्मा, मुख्य-महाप्रबंधक (वित्त) एएस साहनी, मुख्य-महाप्रबंधक (तकनीकी) हितेश शाह, सरपंच सतपाल राठी मौजूद रहे।

जांच कमेटी ने की थी सिफारिश

सिहपुरा-सिठाना पंचायत ने अपने गांव में स्वच्छ पेयजल के लिए मांग की थी। गांव के साथ ही रिफाइनरी लगती है। एनजीटी में जो केस चल रहा है, उसमें भी जांच कमेटी ने सिफारिश की थी कि गांव में पाइप लाइन बिछाकर पानी की सप्लाई की जाए। रिफाइनरी की ओर से पहले ही इसके लिए प्रयास किए जा रहे थे। करीब 150 मीटर तक बोर करके ट्यूबवेल लगाया जाएगा। गैस रिसाव से खतरे से बचने को मॉक ड्रिल

पानीपत रिफाइनरी नेफ्था क्रैकर संयंत्र में हाइड्रोकार्बन गैस के खतरे से निपटने की तैयारियों का जायजा लेने के लिए मॉक ड्रिल की गई। पीपी यूनिट की प्रोपलीन फिल्टर के इनलेट फ्लेंज से हाइड्रोकार्बन गैस का रिसाव दर्शाया गया। आपातकालीन सायरन बजते ही फायर स्टेशन से दमकल गाड़ियां साइट पर गई और ज्वलनशील पदार्थ के रिसाव पर काबू करने के लिए वाटर कर्टन के माध्यम से आपातकाल नियंत्रण कार्य प्रारंभ किया। कार्यकारी निदेशक जीसी सिकदर मौके पर पहुंचे। ड्रिल के बाद एक समीक्षा बैठक की गई।

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