कुरुक्षेत्र, जेएनएन। भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष ओमप्रकाश धनखड़ का विरोध करने पहुंचे किसानों और पुलिस के बीच धक्का मुक्की हो गई। पुलिस ने दर्जनों किसानों को हिरासत में ले लिया। इस दौरान कुछ किसान इधर उधर से निकल गए। किसान यहां करीब डेढ़ घंटे तक जमे रहे।

भाजपा प्रदेशाध्यक्ष ओमप्रकाश धनखड़ शुक्रवार को आंबेडकर भवन में शाहाबाद मंडल के कार्यकर्ताओं के दो दिवसीय प्रशिक्षण शिविर में बतौर मुख्यातिथि पहुंचे थे। उनके आने का समय दोपहर बाद दो बजे का था। इसका पता लगते ही किसान आंबेडकर भवन के मुख्य गेट पर पहुंच गए। किसानों ने गेट को घेरकर सरकार के विरोध में नारेबाजी की। भाजपा नेता प्रदेशाध्यक्ष को पिछले दरवाजे से अंदर लेकर गए। वे यहां कार्यकर्ताओं से रूबरू हुए। इससे पहले मीडिया से रूबरू होकर किसान आंदोलन को कांग्रेस का मुखोटा बताया। उन्होंने कहा कि भाजपा की केंद्र व प्रदेश सरकार किसानों के हित में काम कर रही है।

Protest in Kurukshetra

भाजपा प्रदेशाध्यक्ष ओमप्रकाश धनखड़ ने कहा कि तीनों कृषि कानून इसी का हिस्सा हैं। पंजाब या हरियाणा के इन कांग्रेस प्रभावित लोगों की मांग लागू कर दी जाती है तो बाकी प्रदेशों में भी इसकी मांग उठने लग जाएगी। इससे पूरा सिस्टम की पटरी से उतर जाएगा। हरियाणा की मंडियों में पुराने सिस्टम से खरीद की जा रही है और यह आगे भी लागू रहेगा। सरकार किसानों के साथ कई बार बैठक कर चुकी है, लेकिन किसान अपनी जिद्द पर अड़़े हुए हैं। सरकार के किसानों के साथ बातचीत के दरवाजे आगे भी खुले हैं। वे किसी भी समय सरकार से बातचीत कर सकते हैं। उनके साथ सांसद नायब सिंह सैनी, मुख्यमंत्री के राजनीतिक सचिव एवं पूर्व मंत्री कृष्ण बेदी और भाजपा जिलाध्यक्ष राजकुमार सैनी मौजूद रहे।

किसानों की मांगों को लागू कर उनके बीच आएं नेता

किसानों की अगुवाई भाकियू के प्रदेश प्रवक्ता राकेश बैंस और संजू गुंदियाना ने की। किसानों ने धनखड़ गो बेक के नारे लगाए। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों को बदनाम करने का काम कर रही है। संयुक्त किसान मोर्चा के फैसले के बाद भी भाजपा नेता कार्यक्रमों को बंद नहीं कर रहे हैं। पिछले दिनों सांसद नायब सिंह सैनी का शाहाबाद में विरोध किया गया था। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष ओमप्रकाश धनखड़ विपक्ष में होने पर किसानों के लिए प्रदर्शन करते थे, लेकिन आज सत्ता में आने के बाद सबकुछ भूल गए हैं। भाजपा ने अंग्रेजो के राज की याद ताजा कर रही है। प्रशासन और पुलिस को अपना हथियार बनाकर प्रयोग कर रही है। उन्होंने पुलिस से आंदोलन में किसानों का साथ देने की मांग की।

प्रशासन व पुलिस अधिकारी पहुंचे

किसानों के आंबेडकर भवन में पहुंचने की सूचना मिलते ही पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे। एएसपी रविंद्र तोमर ने किसानों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन किसान अपनी मांग पर अड़े रहे। किसानों करीब तीन बजे आंबेडकर भवन के बाहर सड़क पर बैठ गए। पुलिस ने किसानों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन उन्होंने मुख्य गेट को खाली नहीं किया। इस दौरान पुलिस व किसानों के बीच धक्का मुक्की हो गई। पुलिस ने दर्जनों किसानों को हिरासत में ले लिया।

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