विजय गाहल्याण, पानीपत :

पट्टीकल्याणा गांव के मजदूर सतीश पांचाल की बेटी कोमल (14) डेढ़ साल पहले गांव के ज्ञानीराम अखड़ा में गई तो उसकी सहेलियां ठिठौली करती थी। कहती थीं ये है दंगल फिल्म की गीता पहलवान। इससे वह परेशानी हो गई थी। पिता और कोच कृष्ण पहलवान ने समझाया कि कड़ा अभ्यास करके सफलता हासिल कर। ताने मारने वाले ही तारीफ करेंगे। कोमल ने हर रोज छह घंटे अभ्यास किया और अब वे अक्टूबर में जापान में होने वाली जूनियर एशियन चैंपियनशिप में दमखम दिखाएगी। इससे पहले कोमल राज्य स्तरीय कुश्ती चैंपियनशिप में पांच स्वर्ण पदक और नेशनल जूनियर नेशनल कुश्ती प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीत चुकी है। दंगल जीतकर निकलाती है बादाम का खर्च

कोमल की तीन बहन व एक भाई है। मजदूर पिता सतीश पांचाल का घर का गुजारा मुश्किल से चला पाते हैं। पिता ने उन्हें कह दिया था कि खुराक के लिए उसके पास ज्यादा रुपये नहीं हैं। तब काजल ने कह दिया था कि वह घर के दूध-घी से ही काम चला लेगा। बादाम खर्च के लिए दंगल लड़ेगी। कोमल दो महीने में राठधाना, बड़वासनी और आसपास के गांवों में दंगल जीतकर 20 हजार रुपये से ज्यादा जीत चुकी है। इसी राशि से उसका बादाम खर्च चलता है।

अब वह पहलवान कहलाना पसंद करती है

कोमल का कहना है कि पहली उसके सहेली पहलवान कहकर चिढ़ाती थीं। तब बुरा लगता था। अब उसे पहलवान कहलाना पसंद है। सहेली भी उससे कुश्ती के गुर सीखती हैं। कोमल ने बताया कि हर रोज तीन लीटर दूध पीती है। साथ में घी व बादाम गिरी भी खाती है। धोबी पछ़ाड़ से विरोध को कर देती है चित

कोच कृष्ण पहलवान ने बताया कि गांव ज्ञानीराम अखाड़ा है। यहां पर सरकारी कोच की बजाय वह, सीनियर पहलवान विनोद कुमार, हरीश और अनिल कुमार 20 लड़कियों को कुश्ती सीखाते हैं। कोमल को जो दांव बता दिया जाता है वह तुरंत उस पर अमल करती है। कोमल धोबी पछाड़ दांव से विरोधी पहलवान को चित कर देती है। कोमल ने जूनियर नेशनल कुश्ती चैंपियनशिप में चार मुकाबले लड़े। विरोधी पहलवान को एक भी प्वाइंट नहीं दिया। कोमल की तैयारी अच्छी है। इससे वह जापान में भी पदक जीतेगी।

Posted By: Jagran