पानीपत/अंबाला, [दीपक बहल]। अंबाला जिले की विधानसभा सीटों की बात करें, तो नारायणगढ़ विधानसभा सीट से एक भी महिला प्रत्याशी जीत हासिल नहीं कर पाई, जबकि चार विधानसभा सीटों से महिलाओं ने किस्मत आजमाई है। हरियाणा गठन के बाद से अब तक 53 सालों में 20 महिलाएं चुनाव मैदान में उतरी हैं, लेकिन जनता ने चार को ही चुनकर विधानसभा में भेजा है। इन चारों में भी अंबाला से जीत हासिल कर केवल सुषमा स्वराज ही राज्य ही नहीं बल्कि केंद्र सरकार में भी मंत्री पद तक पहुंचीं। सन 2014 के विधानसभा चुनावों की बात करें, तो मुलाना (आरक्षित) में केवल संतोष सारवान ही जीत सकीं, जबकि अन्य मुख्य राजनीतिक दलों ने अन्य तीन सीटों से महिला को टिकट तक नहीं दिया। अब 2019 की पहली लिस्ट में संतोष सारवान का नाम काट दिया गया। अभी नजरें इसी पर हैं कि राजनीतिक दल अंबाला की चार सीटों अंबाला छावनी, शहर, नारायणगढ़ और मुलाना (आरक्षित) से किसी महिला को मैदान में उतारते हैं या  नहीं। 

चार महिलाएं ही जीत पाईं

अंबाला की विधानसभा सीटों की बात करें, तो इसमें चार महिलाएं ही जीत पाईं हैं। इनमें लेखवती जैन तीन बार, सुषमा स्वराज दो बार तो वीना छिब्बर एक बार ही जीत दर्ज कर सकी हैं। अपनी परफारमेंस तो लेखवती जैन व सुषमा स्वराज ही दोहरा पाई हैं, जबकि वीना छिब्बर अगले चुनाव में हार गई थीं। अंबाला की सीटों पर बात करें तो 2019 के चुनावों को लेकर अभी किसी महिला प्रत्याशी का नाम फाइनल नहीं हो पाया है, जबकि कुछ राजनीतिक दलों में महिला प्रत्याशियों पर बात चल रही है। 

यह महिलाएं लड़ीं चुनाव 

अंबाला की विधानसभा सीटों से 20 महिलाओं ने अपनी किस्मत आजमाई है। सन 1967 व 68 में लेखवती जैन, 1977 में सुषमा स्वराज व लेखवती जैन, 1982 में कोई भी महिला चुनाव मैदान में नहीं उतरी। इसके बाद 1987 में सुषमा स्वराज व बलबीर कौर, 1991 में रोशनी देवी व बृजबाला, 1996 में शारदा रानी, राजरानी, पुष्पा, कमलेश रानी, लाजो देवी ने किस्मत आजमाई। इसी तरह सन 2000 में कुसुम शेरवाल, जसविंदर कौर, सुदर्शन दुआ, पिंकी वर्मा, वीना छिब्बर, किरण बाला जैन, 2005 में हरबंस कौर व वीना छिब्बर, 2009 में गीता शर्मा व चरणजीत कौर, 2014 में महक खन्ना व संतोष सारवान विधानसभा चुनावों में अपनी किस्मत आजमाई। 

अंबाला शहर सीट से 12 चुनावों में भाजपा सात तो कांग्रेस पांच बार जीती

विधानसभा चुनावों पर नजर दौड़ाएं तो अंबाला शहर सीट पर हुए अब तक के 12 चुनावों में भाजपा जहां बढ़त बनाए हैं वहीं कांग्रेस भी दो कदम ही पीछे है। इन बारह चुनावों में भाजपा ने 7 बार तो कांग्रेस ने 5 बार सीट अपने नाम की है। मुकाबला हर बार दोनों पार्टियों में अच्छा खासा हुआ है। एडचवोकेट हेमंत कुमार का कहना है कि हरियाणा गठन के बाद चुनावी आंकड़े काफी दिलचस्प हैं। अब तक 12 विधानसभा चुनावों में अंबाला शहर हलके में 7 बार भाजपा (जनता पार्टी और  भारतीय जनसंघ मिलाकर) और 5 बार कांग्रेस पार्टी ने विजय हासिल की है। सबसे पहले वर्ष 1967 में हुए प्रदेश  के पहले विधानसभा  चुनावो में भारतीय जनसंघ के उम्मीदवार एडवोकेट फकीर चंद ने कांग्रेस के अब्दुल गफ्फार खान को हराकर हरियाणा में अंबाला शहर के पहले विधायक बने। इस सीट से लगातार तीन बार विधायक बनने का रिकॉर्ड भाजपा के वरिष्ठ नेता स्व. मास्टर शिव प्रसाद के नाम है, जो वर्ष 1977 के चुनावों में जनता पार्टी के टिकट पर  एवं वर्ष 1982 एवं 1987 में भाजपा से विधायक बने। इसके अलावा लगातार दो बार विधायक  बनाने वालों में कांग्रेस पार्टी की लेखवती जैन एवं  विनोद शर्मा है। लेखवती वर्ष 1968 और 1972 के चुनावों में और शर्मा वर्ष 2005 और 2009 में अंबाला शहर से चुनाव जीते। इनके अलावा कांग्रेस पार्टी ने सिर्फ वर्ष 1991 में यह सीट जीती  जब उसके प्रत्याशी सुमेर चंद भट्ट ने भाजपा के हेडमास्टर फकीरचंद अग्रवाल को मात्र 1101 वोटों से हराया। हालांकि इसके पांच वर्ष बाद वर्ष 1996 के चुनावों में फकीरचंद ने भट्ट  को 3670 वोटों से पराजित कर अपनी पिछली हार का बदला लिया। वर्ष 2000 के चुनावों में भाजपा की वीना छिब्बर ने कांग्रेस की किरण बाला जैन को हराया। सन 2014 में देश में मोदी लहर के चलते  भाजपा के वर्तमान विधायक  असीम गोयल ने हरियाणा जनचेतना पार्टी के विनोद शर्मा को 23 हजार 252 वोटों से हराया। 

Posted By: Anurag Shukla

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