यमुनानगर, जागरण संवाददाता। प्लाईवुड एक बार फिर रेड की वजह से चर्चा में है। इस बार यूरिया की जांच को लेकर कृषि मंत्रालय की टीमों ने रेड की है। जिसका व्यापारियों ने पुरजोर विरोध किया। यहां तक कि दो दिनों के लिए फैक्ट्रियां बंद रखी। इसके बावजूद टीम ने यहां से रिकार्ड जुटाया। काम में सहयोग न करने वाली तीन फैक्ट्रियों पर केस दर्ज हुआ। जबकि तीन के स्टाक पर बिक्री के लिए रोक लगा दी है।

अब व्यापारियों ने सीएम मनोहर लाल से मिलने के लिए समय मांगा है। शिक्षा मंत्री कंवरपाल गुर्जर के माध्यम से व्यापारी सीएम से मिलेंगे। इससे पहले भी प्लाईवुड उद्यमियों पर रेड पड़ चुकी है।

चार माह पहले इनकम टैक्स की टीमों ने प्लाईवुड व्यापारियों के प्रतिष्ठानों व आवास पर रेड की थी। सीएम फ्लाइंग की टीमें भी समय-समय पर रेड करती रहती हैं। अधिकतर में कृषि सब्सिडी यूरिया के अवैध प्रयोग करने को लेकर ही कार्रवाई की जाती है। 25 अप्रैल को भी जीएसटी की टीम ने यहां पर रेड की थी।

एक ग्लू बनाने वाली फैक्ट्री पर रेड के बाद खाद विक्रेता के गोदाम पर छापेमारी की गई थी। जिससे पुख्ता हुआ कि ग्लू बनाने के लिए कृषि योग्य यूरिया का प्रयोग फैक्ट्रियों में किया जा रहा है। करेहडा खुर्द में हर्षित ट्रेडर्स व एमएस खाद भंडार पर बिलों में हेराफेरी मिली थी। 90 लाख रुपये की जीएसटी चोरी पकड़ी गई थी।

टेक्निकल यूरिया काफी महंगा, इसलिए सब्सिडी यूरिया का प्रयोग

दरअसल, यूरिया का प्रयोग प्लाईवुड फैक्ट्रियों में ग्लू बनाने के लिए होता है। नियमानुसार व्यापारियों काे टेक्निकल यूरिया का प्रयोग करना होता है। यह 4600 रुपये प्रति बैग पड़ता है। जबकि कृषि योग्य यूरिया महज 300 से 400 रुपये का पड़ता है, लेकिन इसके फैक्ट्री में प्रयोग पर रोक है। इसका ही अवैध धंधा होता है। खाद विक्रेताओं की मिलीभगत से किसानों को मिलने वाला यूरिया फैक्ट्रियों में सप्लाई होता है। यही वजह है कि सीजन में कृषि यूरिया की किल्लत भी बनती है।

टेक्निकल यूरिया के प्रयोग से नुकसान

व्यापारियों की मानें, टेक्निकल यूरिया काफी महंगा पड़ता है। यदि इसका प्रयोग करते हैं, तो प्लाई तैयार करने में लागत बढ़ जाएगी। इससे प्लाई की लागत पांच रुपये प्रति फीट तक बढ़ेगी। जिससे रेट बढ़ाने होंगे। इसका मार्केट पर असर पड़ेगा। यहां का माल महंगा होने की वजह से मार्केट में पकड़ नहीं रहेगी। पहले ही काम में काफी मंदा है। यदि इस तरह से रेड पड़ने लगी, तो नुकसान अधिक बढ़ेगा। जिले में करीब 100 फैक्ट्रियां बंद हो चुकी हैं। जबकि कुछ फैक्ट्रियां घाटे में चल रही हैं।

Edited By: Anurag Shukla