जागरण संवाददाता, पानीपत : पानीपत इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनिय¨रग एंड टेक्नोलॉजी (पाइट) पट्टीकल्याणा की प्रबंधन एनओसी पर उठे सवालों के बाद सामने आई है। उन्होंने इसमें फर्जीवाड़े के आरोपों को इन्कार किया है। दावा किया है कि कॉलेज ने 2011 में 37 लाख रुपये जमा कराकर एनओसी ली थी। मोहन ¨सह ने राज्य सूचना आयुक्त में शिकायत दी थी। उनका आरोप है कि पाइट कॉलेज समालखा की एनओसी रद की गई थी। तत्कालीन अधिकारियों ने जांच में पाया था कि कॉलेज को जाने वाला रास्ता 33 फुट की बजाय 16.5 फुट का है। अधिकारियों ने इसके बाद किसी तरह की कार्रवाई नहीं की। डीसी कार्यालय से इससे संबंधित फाइल भी गुम हो गई। राज्य सूचना आयुक्त ने इस मामले में सीटीएम से अंडरटे¨कग का शपथ पत्र देने के निर्देश दिए थे। एनओसी का यह मामला 2009 का था। विद्यापीठ एजुकेशन ट्रस्ट के चेयरमैन हरिओम तायल ने बताया कि जिला नगर एवं योजनाकार विभाग के निदेशालय में 2011 में एनओसी के लिए अप्लाई किया था। विभाग ने 33.76 लाख रुपये का कंपोजिशन चार्ज और 3.30 लाख रुपये कनवर्जन चार्ज लगाया था। ट्रस्ट ने इस राशि को उसी वक्त जमा करा दिया था। उनको 31 मार्च 2011 को इसके आधार पर एनओसी मिल गई थी। विद्यापीठ एजुकेशन ट्रस्ट के सचिव सुरेश तायल ने बताया कि कॉलेज के खिलाफ शिकायत गलत है। सरकारी जांच में सवाल उठने पर एनओसी नियमों के आधार पर ली थी। विभाग की पेनाल्टी को संस्था और समाज के हित में जमा कराया गया। उनका उद्देश्य विवादों में फंसने की बजाय शिक्षा देना है।

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