पानीपत, [रवि धवन]। जिस तरह से अस्पतालों में मरीजों की देखभाल की जा रही है, ठीक उसी तरह इंडियन ऑयल कारपोरेशन लिमिटेड (आइओसीएल) भी ऐसी मुहिम में जुटा है, जो दिखाई न देते हुए हम सभी के लिए किसी बड़ी राहत से कम नहीं है। लॉकडाउन के बाद बदली परिस्थितियों में लिक्विड पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) सिलेंडर की मांग बढ़ सकती है। खासकर, ग्रामीण क्षेत्र में, जहां पर गैसपाइप लाइन भी नहीं है। लोग अपने घरों में ही हैं। गैस सिलेंडर का उपयोग बढ़ गया है। आने वाले दिनों में गैस की कमी की वजह से कोई संकट न खड़ा हो जाए, पानीपत रिफाइनरी ने अभी से ही एलपीजी उत्पादन को 25 फीसद तक बढ़ा दिया है। इसके साथ ही दो सप्ताह से अधिक समय के लिए स्टॉक पर काम किया जा रहा है।

पानीपत रिफाइनरी में 150 लाख टन सालाना तेल शोधन का काम होता है। कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाव के लिए रिफाइनरी में भी घर से ही काम के निर्देश दिए हैं, लेकिन प्रोडक्शन संबंधी काम ऐसा है, जिसे संयंत्र में आकर ही पूरा किया जा सकता है। पूरी टीम ने इस चुनौती को स्वीकारा। यह तय किया कि देश में किसी हाल में पेट्रोल-डीजल की कमी नहीं रहने देंगे। 600 अधिकारी और कर्मचारी प्रोडक्शन टीम से जुड़े हैं, जो तय सुरक्षा प्रबंधों का पालन करते हुए उत्पादन में जुटे हैं। करीब दो हजार की टीम घर से ही काम कर रही है।

पानीपत से यहां पर सप्लाई 

हरियाणा, पंजाब, जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ल एनसीआर में पानीपत आइओसीएल के माध्यम से सप्लाई होती है। कच्चे तेल का शोधन करके पेट्रोल, डीजल, एलपीजी व अन्य उत्पाद बनाए जाते हैं। 

बदला गया है प्रोसेस  

क्रूड ऑयल से ही पेट्रोल, डीजल, एलपीजी और अन्य उत्पाद बनाए जाते हैं। अभी तक की प्रोसेस अनुसार, मांग के मुताबिक पेट्रोल और डीजल का ज्यादा उत्पादन किया जाता था। पर लॉकडाउन के बाद से तेल की मांग कम हुई है। एलजीपी की मांग बढ़ सकती है। इसलिए प्रक्रिया को बदलकर एलपीजी का उत्पादन 25 फीसद बढ़ा दिया है। 

डीजीएम स्तर के अधिकारी काम कर रहे हैं। पानीपत रिफाइनरी की टीम दिन-रात लगी है, जिससे कि देश को तेल से लेकर एलपीजी की कमी न रहे। शिफ्टों में काम बांटा गया है। इसके साथ ही प्रोडक्शन टीम स्वास्थ्य संबंधी सुरक्षा के मानकों के साथ काम कर रही है। अभी एलपीजी पर हमारा ज्यादा फोकस है, क्योंकि तेल की इस समय कम जरूरत है। 

एसके त्रिपाठी, महाप्रबंधक, प्रशासन, कार्पोरेट कम्युनिकेशन और सीएसआर

Posted By: Anurag Shukla

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