पानीपत, जेएनएन। 100 गज के मकान के कलह ने राजनगर के अनिल कुमार शर्मा का हंसता-खेलता परिवार उजाड़ दिया। इसी मकान के विवाद में अनिल ने दो मासूम बच्चों और पत्नी को गोली से उड़ाकर खुद को भी मौत की नींद सुला दिया। इस कांड को करने की उसने पहले से ही तैयारी कर रखी थी। उसने एफिडेविट पर सुसाइड नोट लिखा और शनिवार अलसुबह 3:21 बजे छोटे साले गुलशन को वाट््सएप करने के बाद पति व बच्चों को मौत की नींद सुलाकर खुद भी मौत गले लगा लिया। सुसाइड में लिखा है कि यह गलत काम कर रहा हूं। मेरी मां अब मेरी व बच्चों की लाश को हाथ न लगाए। अगर शवों को बेचकर भी पैसे मिले तो ले लेना।   

सुसाइड नोट में लिखा: मेरा सब कुछ हड़प लिया 

अनिल ने सुसाइड लिखा में लिखा कि ये सभी ममेरे भाई मोहन, भाई नवीन, नवीन की पत्नी कविता, पिता नफे ङ्क्षसह और मां अंगूरी देवी की वजह से कर रहा हूं। इन सभी ने मुझे और मेरे परिवार को बहुत परेशान कर रखा है। मेरा सब कुछ हड़प लिया है। मेरी पत्नी के बारे में अपशब्द भी कहते हैं। आज हमारे पास जो है वे सारा इन्हीं ने हड़पा है। 

नफे सिंह व नवीन ने सुसाइड नोट जला दिया 

पूनम के छोटे भाई गुलशन ने आरोप लगाया कि दरवाजे तोडऩे के बाद नफे सिंह ने जीजा अनिल के कमरे से सुसाइड नोट चुरा लिया था। बाद में नफे सिंह ने बेटे नवीन के साथ मिलकर या तो सुसाइड नोट फाड़ दिया या फिर जला दिया है। उसने थाना मॉडल टाउन प्रभारी सुनील कुमार को सुसाइड नोट मोबाइल फोन पर दे दिया है। 

इंस्पेक्टर बता रिश्ता कराया, ममेरे भाई ने सात लाख रुपये हड़पे

पूनम के बड़े भाई पवन ने बताया कि नफे सिंह ने झूठ बोला था कि उसका बेटा अनिल कुमार चंडीगढ़ पुलिस में सिपाही है। तभी उन्होंने पूनम की शादी अनिल से कराई। एक साल बाद उन्हें पता चला कि अनिल पुलिस में नहीं है। 2014 में अनिल ने कार लोन पर लेकर फुफेरे भाई मोहन को दी थी। मोहन सात लाख रुपये भी हड़प गया और कार की किश्त भी नहीं भरी। चार साल बाद उन्हें गाड़ी लौटा दी। जो मकान जीजा को दे रखा था वे भी उनकी मां के नाम है। जीजा बार-बार कह रहे थे कि बारिश में मकान टपकता है। नया मकान वह लोन लेकर बना लेगा, लेकिन इसे उसके नाम कर दे। नफे सिंह मकान नाम नहीं करा रहा था। 

 

डिपो का लाइसेंस रद हो जाएगा, एफआइआर दर्ज होगी 

प्रत्यक्षदर्शी आजाद नगर के राजेश कुमार ने बताया कि अनिल कुमार ने 2014 में राशन डिपो लिया था। शुक्रवार देर शाम 7:30 बजे खाद्य पूर्ति विभाग के नियंत्रक रवि ने कॉल कर बताया कि अनिल ने मार्च महीने का राशन वितरण नहीं किया है। 35 क्विंटल राशन अनिल के पास है। कार्ड धारकों ने शिकायत की है। वे कॉल भी रिसीव नहीं कर रहा है। इससे इससे डिपो को लाइसेंस रद हो जाएगा और एफएआइआर भी दर्ज होगी। उसने भी अनिल को शुक्रवार और फिर शनिवार सुबह कॉल की, लेकिन अनिल ने रिसीव नहीं की। वह अनिल के घर गया तो दरवाजा नहीं खोला। पिता नफे सिंह ने दरवाजा तोड़ा। 

बेटी व नाती के शव को देख बेहोश हो गई 

पूनम की मां सुरेश देवी सामान्य अस्पताल में एंबुलेंस में बेटी पूनम, नाती प्राची व अंशु के शव देखकर कह रही थी कि बेटी ने किसी का क्या बिगड़ा था, जो उसे मार डाला। ऐसा जुल्म किसी के साथ न हो। वे बेहोश हो गई। स्वजनों ने उसे पानी पिलाया और होश में आने पर घर ले गए। 

 

पत्नी व बच्चों के सिर में मारी गाली

सामान्य अस्पताल ने चारों के शवों को पीजाआइ रोहतक रेफर कर दिया। पीजीआइ के डॉक्टरों ने कहा कि ये शव गले-सड़े नहीं है। इनका पोस्टमार्टम पानीपत में हो जाएगा। इसके बाद शवों को अस्पताल लाया गया। डॉ. संजीव गुप्ता, डॉ. प्रदीप और डॉ. राजीव मान के बोर्ट ने शवों का पोस्टमार्टम किया। पूनम, प्राची और अंशु के सिर में गोली लगी थी। प्राची व अंशु के सिर के गोली आर-पार हो गई। अनिल ने कान के दाई तरफ गोली मारी थी। पूनम के सिर और अनिल के सिर से गोली निकाली गई। पुलिस के पहरे में रात 8:45 बजे शिवगनर के श्मशान भूमित में चारों के शवों को अंतिम संस्कार कराया गया। 

 

हंगामा कर नफे सिंह से हाथापाई

पूनम के स्वजनों ने सामान्य अस्पताल में हंगामा किया और नफे ङ्क्षसह व उसके साले के सुबह और फिर शाम को भी हाथापाई की। पुलिस ने नफे सिंह को जिप्सी में बैठाकर स्वजनों को शांत कराया। स्वजनों ने पुलिस पर भी ढीली कार्रवाई का आरोप लगाया। डीएसपी संदीप कुमार ने उन्हें आश्वासन दिया कि मामले की निष्पक्ष जांच की जाएगी। दोषियों को सदजा दिलाई जाएगी। इसके बाद ही वे शांति हुए। 

मना करने के बावजूद नफे सिंह ने बनवाया था लाइसेंस

मॉडल टाउन में रह रहे मोरखी गांव के डॉ. सतबीर ने बताया कि 15 साल पहले गांव की जमीन बेचकर नफे सिंह ने राजनगर में मकान लिया था। मकान के साथ में ही दुकान में अनिल का राशन डिपो खुलवा रखा था। दस साल पहले नफे सिंह ने अनिल का रिवाल्वर का लाइसेंस बनवाया था। तब उसने मना किया था कि हथियार रखना ठीक नहीं है। नफे सिंह ने कहा कि बेटा गार्ड की नौकरी कर लेगा। अनिल के पास बंदूक (डोगा) व रिवाल्वर है। उसने अनिल को एनएफएल में ठेकेदार के पास और एक इंजीनियरिंग कॉलेज में गार्ड भी लगवाया था। 2014 में उसने अनिल को राशन डिपो भी दिलाया था। 

सात कारतूस, गिलास बरामद 

पुलिस व सीनियर साइंटिफिक ऑफिसर डॉ. नीलम आर्य की टीम ने अनिल के कमरे से 7 जिंदा कारतूस और पांच खोल बरामद किए हैं। मौके से दो छोटे गिलास व मग मिला है। इनमें दूध की कुछ बूंदें मिली है। आशंका यही है कि  अनिल ने दूध में नशीला पदार्थ मिलाकर पत्नी, बेटे व बेटी को पिलाया था। इसके बाद उन्हें गोली मारी थी। गिलास व विसरा 

 

Posted By: Anurag Shukla

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