जागरण संवाददाता, पानीपत

हम तो आज भी पानीपत हैं, तू कहां छिपा है अहमद शाह अब्दाली। वीर शिवाजी जिंदाबाद, मां जीजाऊ जिंदाबाद। रोड़-मराठा एकता जिंदाबाद, जिंदाबाद। मराठा जागृति मंच, हरियाणा के तत्वावधान में सनौली रोड स्थित काला अंब परिसर में मनाए गए शौर्य दिवस में रोड़-मराठा युवकों ने उत्साह में जमकर नारेबाजी की। कार्यक्रम का शुभारंभ हवन-यज्ञ और नागपुर के महाराजा मुधोजी राजे भौंसले द्वारा भगवा झंडा फहराने से हुआ।

मुधोजी राजे भौंसले ने इतिहासकारों द्वारा लिखित सामग्री का हवाला देते हुए कहा कि करीब 60 हजार सैनिकों ने पानीपत की तीसरी लड़ाई में बलिदान दिया था, हालांकि यह संख्या लाखों में हो सकती है। जिंदा रहे मराठों ने कुरुक्षेत्र के आसपास जंगलो में रहकर अपनी जान बचाई थी। विदेशियों के नजरिये से बेशक मराठा पराजित हुए थे लेकिन एक देशभक्त के नजरिये से देखें तो ये हार नही थी। 1761 में अहमदशाह अब्दाली और उसकी सेना को मानसिक तौर पर भी हरा दिया था। अब्दाली दिल्ली के तख्त पर बैठने की हिम्मत नहीं कर सका था। अपने देश लौट गया था। मंच की अध्यक्षता करते हुए वीरेंद्र मराठा का कहना है कि 1761 के इतिहास पर नए सिरे से विचार की जरूरत है। भारत में बसे सभी मराठा प्रण लें कि वर्ष में एक बार काला अंब जरूर आएं। विधायक जगदीश मुलिक ने शौर्य स्थल निर्माण में हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया। उन्होंने इतिहासकार वीरेंद्र मराठा की खोज की प्रशंसा की। जीजा माता खानदान के जाधवराव ने हरियाणा के रोड़-मराठों को अपने परिवार का सदस्य बताया। सरकार द्वारा काला अंब की उपेक्षा से नाराज आयोजकों ने इस बार प्रदेश के किसी जनप्रतिनिधि को आमंत्रित नहीं किया।

शोभायात्रा में शामिल हुए कुछ युवा तलवारें व फरसा लहराते देखे गए। आयोजन में शामिल अतिथियों को शाल ओढ़ाकर व स्मृति चिह्न भेंट कर स्वागत किया। देहाती कलाकारों व छात्र-छात्राओं ने शिवाजी महाराज की वीरता के किस्से रागनी और कविता के माध्यम से सुनाए। मंच संचालन जयपाल चौहान ने किया।

शोभायात्रा में दिखा जबरदस्त उत्साह :

करनाल से चलकर पानीपत पहुंची शोभायात्रा में शामिल बाइक व कार सवार युवकों में जबरदस्त उत्साह देखा गया। शोभायात्रा में पानीपत के तीसरे युद्ध को झाकियों के माध्यम से दर्शाया गया। छत्रपति शिवाजी महाराज की झाकी, जीजामाता की झाकी, मराठा सेना के तोपखाना प्रमुख इब्राहिम खान गार्दी की झाकी आकर्षण का बिंदू रही। शंखनाद व ढ़ोल नगाड़ों की आवाज और वीरता की धुनों ने तीसरे युद्ध के इतिहास को जीवंत कर दिया। आयोजन में जीजा माता और बाल शिवाजी का रूप भी देखने को मिला।

मुख्य रूप से ये रहे मौजूद :

छत्रपति शिवाजी विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष गौरव मराठा, मराठा महासंघ के अध्यक्ष अनिल पाटिल, संभाजी ब्रिगेड़ महाराष्ट्र के प्रदेशाध्यक्ष मनोज आखरे, एडवोकेट सुचेता पाटेकर, सुनील मराठा, अमर जाधव, डॉ. सुभाष जाधव, प्राचार्य भानुदास मोहिने, वामनराव वासुदेव भिलारे, एडवोकेट सुरेंद्र धवले, महिला काग्रेस प्रदेश महासचिव हरियाणा सुनीता, परमाल सिंह, बलविंद्र सिंह, ब्रह्मचारी रामस्वरूप, अनिल मराठा, अजय व श्याम आदि मौजूद रहे।

वर्जन :

पुणे की बड़गांव शेरी सीट से भाजपा विधायक जगदीश मुलिक ने कहा कि काला अंब की दुर्दशा देखकर बहुत दुख हुआ। महाराष्ट्र विधानसभा के आगामी सत्र में इस विषय को उठाया जाएगा। हरियाणा सरकार को पत्र भेजकर, इस स्थल को दर्शनीय बनाने की मांग की जाएगी।

वर्जन :

शंभा जी ब्रिगेड, महाराष्ट्र के राष्ट्रीय अध्यक्ष बाबा जाधवराव ने कहा कि यह स्थल सभी समाज की धरोहर है। केंद्र व राज्य की सरकार इसे किसी एक जाति से जोड़कर न देखे। इस ऐतिहासिक स्थल को शौर्य स्थल के रूप में विकसित कर, पर्यटन को बढ़ावा देने की जरूरत है।

वर्जन :

महाराष्ट्र सेवा संघ के ऑल इंडिया कोर्डिनेटर कामाजी पंवार ने कहा कि अब सरकार से कोई उम्मीद नहीं रखेंगे। देश में रोड़-मराठा की जनसंख्या 30 करोड़ से भी अधिक है। प्रत्येक सदस्य से 1 रुपया भी मिला तो तीस करोड़ एकत्र हा जाएंगे। स्थल को तीर्थ बनाया जाएगा।

वर्जन :

इतिहासकार मराठा वीरेंद्र ने कहा कि कई बार चर्चा हो चुकी है। अब ट्रस्ट बनाने पर सहमति बनी है। ट्रस्ट बनाने, उसका रजिस्ट्रेशन आदि की प्रक्रिया शुरू होगी। हरियाणा, दिल्ली, महाराष्ट्र आदि राज्यों के मुख्य लोगों को ट्रस्ट में शामिल किया जाएगा।

Posted By: Jagran

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