पानीपत, [ महावीर गोयल]। आर्डर की कमी से जूझ रहे निर्यातकों की नजरें अमेरिका में चल रही ‘मार्केट विक’ पर लगी हुई है। निर्यातकों को उम्मीद है कि मार्केट विक में इस बार अच्छे आर्डर मिलेंगे। अमेरिका में मार्च और सितंबर माह में मार्केट विक लगता है। इसमें अमेरिका का आयातक सैंपल दिखाते हैं। कस्टमर सैंपल देखकर आर्डर देते हैं। उसी के मुताबिक भारत से माल मंगवाया जाता है।

पिछले दिनों आयातकों ने हैंडलूम, टेक्सटाइल के सैंपल तैयार करवाए थे। सितंबर माह में इसी सप्ताह वहां मार्केट विक लगा है। जिसमें चार दिन तक कामकाज होता है। सैंपल कस्टमर को दिखाए जाते हैं। जिन्हें देखकर कस्टमर आर्डर देता है।

पानीपत का 60 प्रतिशत टेक्सटाइल निर्यात अमेरिका को

पानीपत का हैंडलूम, टेक्सटाइल का 60-70 प्रतिशत निर्यात अमेरिका को होता है। अर्थात देश से होने वाले 15000 करोड़ के निर्यात में 9000-10000 करोड़ का माल अमेरिका को जाता है। मंदा होने के कारण टेक्सटाइल के आर्डर नहीं मिल पा रहे हैं। जिससे घरेलू मार्केट भी प्रभावित हो रही है।

कारपेट से लेकर बाथमैट होते निर्यात

पानीपत में बने कारपेट अमेरिका के फाइव स्टार होटल से लेकर अमेरिकन के घरों में बिछाए जाते हैं। हैंड मेड आइटम वहां अधिक पसंद की जाती है। होम फर्निसिंग की आइटम पानीपत से जाती है। मार्केट विक अमेरिका के न्यूयार्क शहर में लगता है।

कंटेनर भाड़े से कारोबार प्रभावित

पानीपत का निर्यात कारोबार कंटनेर के भाड़े से अधिक प्रभावित है। पानीपत एक्सपोर्ट एसोसिएशन के प्रधान ललित गोयल ने बताया कि तीन डालर का पफ अमेरिका भेजने में चार डालर का केंटेनर का किराया लगता है। जिस कारण विदेशों से आर्डर कम मिल पा रहे हैं। चीन ने कंटेनर का भाड़ा कम करके 1600 -1700 डालर कर दिया है। जबकि हमारे यहां 12000 डालर भाड़ा लगा रहा है। अधिक माल भाड़ा होने के कारण मांग कम चल रही है। मामले को केंद्र सरकार के समक्ष रखा गया है। निर्यातक विनीत शर्मा ने बताया कि अमेरिका में कारोबारियों से बात हुई है। उनका कहना है कि मार्केट विक का अच्छा रेस्पांस मिलने की उम्मीद है।

Edited By: Anurag Shukla