महावीर गोयल, पानीपत

चीन में रासायनिक रंगों पर प्रतिबंध के कारण पानीपत के रंगाई उद्योग पर इस कदर दुष्प्रभाव पड़ा है कि वे सप्ताह में सिर्फ चार दिन ही चल पा रहे हैं। पिछले दो महीने में ही रासायनिक रंगों के भाव 55 से 60 फीसद तक बढ़ गए हैं। घाटा बढ़ने के कारण उद्यमियों ने 40 फीसद तक उत्पादन घटा दिया है। वह इस पसोपेश में हैं कि उद्योग चलाएं या बंद करें।

गौरतलब है कि पानीपत हैंडलूम कारोबार का बड़ा केंद्र है। एशिया में इसका प्रमुख स्थान है। 500 रंगाई उद्योग सिर्फ पानीपत में हैं, जिनका प्रत्यक्ष रूप से लगभग 5000 करोड़ का सालाना कारोबार है। यहा से हर साल लगभग छह हजार करोड़ का हैंडलूम उत्पादों का निर्यात होता है। 20 हजार करोड़ का घरेलू टेक्सटाइल कारोबार भी यहीं से संचालित होता है। टेक्सटाइल में कपड़े सहित हैंडलूम उत्पादों की रंगाई होती है, जिसमें रासायनिक रंगों का इस्तेमाल होता है। चीन से मंगाया गया रंग अपेक्षाकृत सस्ता होता था, लेकिन वहा पर प्रदूषण नियंत्रण के तहत इस पर सरकार ने इस रोक लगा दी है। अब यहा देशी रासायनिक रंगों का इस्तेमाल हो रहा है, जो काफी महंगा है।

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तीन तरफ से पड़ रही मार

उद्योग के जानकार बता रहे हैं कि रंगाई उद्योग पर तीन तरफ से मार पड़ रही है। चीन से कलर केमिकल के नहीं आने से 55 फीसद भाव बढ़ गए हैं। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) द्वारा राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में पेटकोक प्रतिबंध लगा देने के बाद यहा के उद्योगों में इंडोनेशिया का कोयला इस्तेमाल करना पड़ रहा है, जो डेढ़ गुणा महंगा है। अब रंगाई उद्योगों में लकड़ी और कोयले का इस्तेमाल हो रहा है, इससे भी डेढ़ गुणा खर्चा बढ़ गया है। तीसरी मार जीएसटी की है। डाई और केमिकल पर 18 फीसद जीएसटी लगाया गया है, जबकि रंगाई कर कपड़े का धागा देने पर पाच प्रतिशत जीएसटी है। नियमानुसार खरीद पर 18 फीसद और बिक्री पर पाच फीसद का अंतर इनपुट के रूप में रिफंड मिलना होता है। लेकिन रिफंड लेना टेढ़ी खीर है। क्लेम के बाद भी इसके लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। इससे उद्यमियों की बड़ी पूंजी सरकारी खजाने में फंसी रह रही है।

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उद्योग चलाने और बंद रखने दोनों में नुकसान : अरोड़ा

रंगाई उद्यमी नितिन अरोड़ा का कहना है कि रॉ-मेटिरियल कलर केमिकल के दाम 55-60 फीसद बढऩे, पेटकोक के उपयोग पर प्रतिबंध लगने और जीएसटी में इनपुट टैक्स का रिफंड न मिलने के कारण उद्यमियों की परेशानी बढ़ गई। अब उद्योग चलाने और बंद रखने में दोनों में नुकसान है। इसलिए उत्पादन कम किया गया है। तैयार माल के दाम नहीं बढ़ा पा रहे हैं, जबकि लागत बढ़ गई है।

By Jagran