पानीपत, जेएनएन। समालखा के भोड़वाल माजरी में 16 नवंबर से संत निरंकारी समागम की शुरुआत हो रही है। समागम के पहले दिन दोपहर एक बजे माता सुदीक्षा को अनुयायी शोभा यात्रा के साथ मंच तक लाएंगे। फिर माता मानवता के नाम संदेश होगा। वहीं समागम में 17 डीएसपी 1500 पुलिसकर्मी तैनात रहेंगे। ओवरऑल इंचार्ज एएसपी अरुण सिंगला और एएसपी उदय सिंह मीणा होंगे। छह डीएसपी यातायात व्यवस्था संभालेंगे। तीन डीएसपी मुख्य द्वारों पर तैनात रहेंगे। समागम स्थल पर ही पुलिस कंट्रोल रूम बनाया गया है। 

निरंकारी मंडल के प्रेस व पब्लिसिटी विभाग की मेंबर इंचार्ज राज कुमारी और संयोजक राकेश मुटनेजा ने बताया कि निरंकारी संत समागम सर्वधर्म समभाव की मिसाल है। हर मजहब व संप्रदाय के लोग मिशन से जुड़े हैं। बड़े और  छोटे के बीच कोई अंतर नहीं है। दोनों एक दूसरे में परमात्मा को देखते हैं। हर व्यक्ति के लिए संत और महापुरुष शब्द का प्रयोग किया जाता है। वे एक दूसरे का पैर छूकर मानवता व भाईचारे सहित अनेकता में एकता का संदेश देते हैं। यही वजह है कि देश सहित विदेश में मिशन का विस्तार हो रहा है। करीब डेढ़ हजार विदेशी भी समागम में भाग लेंगे। उन्होंने कहा कि समागम की थीम मानवता को क्या दिया कहां पहुंचे हम..है।

संयोजक प्रिमल सिंह ने कहा कि चिकित्सा व अन्य पेशा से जुड़े करीब डेढ़ हजार विदेशी श्रद्धालु भी समागम में भाग लेने पहुंच रहे हैं। वे समागम के दौरान चिकित्सा व अन्य सेवाएं देंगे। उन्हें एयरपोर्ट से लाने व ले जाने सहित उनके रहने, खाने-पीने की व्यवस्था मिशन की है।  बाल प्रदर्शनी में बच्चों की कलाकृति से मिशन के प्रति भाव उजागर किया जाएगा। आधा दर्जन मोबाइल टावर लगाए जा चुके हैं। तीन और टावर लगने हैं। करीब 80 हजार सेवादारों की फौज विभिन्न कार्यों में लगी है।

जोन स्तर पर लंगर और शौचालय की व्यवस्था

समागम परिसर में लगे विभिन्न राज्यों के पंडाल को चार जोन ए,बी,सी और डी में बांटा गया है। जोन वाइज ही लंगर, पानी और शौचालय आदि की व्यवस्था की गई है। व्यवस्था की देखरेख के लिए सेवादारों की हर जगहों पर ड्यूटी लगाई गई है। समागम में 24 घंटे रोशनी की व्यवस्था की गई है। पीने के पानी के लिए पाइप लाइन तो गंदे पानी की निकासी के लिए सीवर लाइन दबी है। डिस्पेंसरी, एंबुलेंस, अग्निशमन, ट्रांसपोर्ट आदि की पर्याप्त व्यवस्था की गई है।

सफाई और खूबसूरती का रहेगा विशेष ध्यान

समागम के गेट व सड़कों को सजाने व संवारने का काम चल रहा है। जगह-जगह कूड़ेदान लगाए गए हैं। वाहनों के लिए विशाल पार्किंग की व्यवस्था है। धूल से बचाव के लिए पानी छिड़काव का इंतजाम है।

  • समागम का शेड्यूल  
  • 16 नवंबर को माता सुदीक्षा को अनुयायी दोपहर 1 बजे शोभा यात्रा के साथ मंच तक लाएंगे। फिर माता का मानवता के नाम संदेश होगा। तीनों दिन 8.30 बजे सत्संग का समापन होगा।
  • 17 नवंबर को 11 से एक बजे तक वर्दी में सेवादल की रैली होगी। सत्संग दोपहर 2 से सात 8.30 तक चलेगा।
  • 18 नवंबर को भी दोपहर 2 बजे से रात 8.30 बजे तक सत्संग होगा। बीच में 3 से 5 बहुभाषीय कवि सम्मेलन होगा।

सुरक्षा रहेगी चौकस

एसपी सुमित कुमार ने बुधवार को निरंकारी समागम स्थल का निरीक्षण कर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। उन्होंने बताया कि 19 नवंबर तक समागम में 17 डीएसपी 1500 पुलिसकर्मी तैनात रहेंगे। ओवरऑल इंचार्ज एएसपी अरुण ङ्क्षसगला और एएसपी उदय सिंह मीणा होंगे। छह डीएसपी यातायात व्यवस्था संभालेंगे। तीन डीएसपी मुख्य द्वारों पर तैनात रहेंगे। समागम स्थल पर ही पुलिस कंट्रोल रूम बनाया गया है। पुलिस अधिकारियों की ड्यूटी शाम 5 बजे से शुरू हो गई।

निरंकारी संत समागम में रोडवेज की 10 बसें, ग्रामीण रूटों पर बढ़ेगी परेशानी

समालखा में होने वाले निरंकारी संत समागम तक श्रद्धालुओं को पहुंचने में कोई परेशानी न हो, इसके लिए 10 बसें चलाने का फैसला लिया। 16 नवंबर से बसों के फेरे शुरू कर दिए जाएंगे। नेशनल हाईवे पर दो सब इंस्पेक्टरों की ड्यूटी लगाई जाएगी जो समागम स्थल के पास से गुजरने वाली रोडवेज बसों में यात्रियों को बैठाएंगे। बस स्टैंड से समागम स्थल पहुंचने के लिए यात्रियों को 30 रुपये किराया देना पड़ेगा।

ग्रामीण रूटों से हट सकती है लड़कियों की स्पेशल बसें

निरंकारी संत समागम में भेजने के लिए विभिन्न ग्रामीण रूटों पर चल रही लड़कियों की स्पेशल बसें हटाई जा सकती है। ग्रामीण क्षेत्र से स्कूल और कॉलेज जाने वाली युवतियों की परेशानी बढ़ सकती है। इसके अलावा अधिकारी कम रिसीट वाली बसों को रूट से हटाकर समागम में चलाने पर भी विचार कर रहे है।

चालक परिचालकों की कमी ने बढ़ाई परेशानी

स्थानीय रोडवेज डिपो में फिलहाल 129 बसें हैं। उन बसों को 189 चालक और 189 परिचालक चला रहे है। चालक परिचालकों की कमी के कारण लगभग 20 बसें डिपो में खड़ी रहती है। कर्मचारियों का मानना है कि अगर 40 चालक और 20 परिचालक का स्टॉफ और होता तो ग्रामीण रूटों पर से बसें नहीं हटानी पड़ती।

Posted By: Anurag Shukla

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